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Indian H1b Visa Holders,H-1B और L-1 वीजा धारकों के लिए खड़ी हो सकती है मुश्किल! US में वर्क परमिट ऑटो रिन्यूअल को रद्द करने का प्रयास, जानें भारतीयों पर असर – indian h1b l1 visa holders at risk as attempt to overturn extended automatic renewal of employment authorization in us

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Feb 5, 2025


वॉशिंगटन: अमेरिका में रिपब्लिकन सीनेटरों रिक स्कॉट और जॉन कैनेडी ने बाइडेन प्रशासन के एक नियम को पलटने के लिए एक प्रस्ताव पेश किया है। अगर प्रस्ताव पारित होता है तो भारतीय H-1B और L-1 वीजा धारकों के लिए परेशानी खड़ी हो सकती है। इस नियम ने एम्प्लॉयमेंट ऑथराइजेशन (वर्क परमिट) के लिए ऑटोमेटिक रिन्यूअल अवधि को 180 दिनों से बढ़ाकर 540 दिन कर दिया था। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने 13 जनवरी को इस नियम को अंतिम रूप दिया था। इस नियम को आप्रवासी समूहों से समर्थन मिला है, लेकिन कुछ रिपब्लिकन सांसदों की ओर से इसका कड़ा विरोध हो रहा है, जिनका तर्क है कि यह आप्रवासन प्रवर्तन को कमजोर करता है।कई आप्रवासियों, शरणार्थियों, ग्रीन कार्ड धारकों और H-1B और L-1 वीजा धारकों के जीवनसाथियों, विशेषकर भारत जैसे देशों के विदेशी पेशेवरों के लिए यह विस्तार एक आवश्यक जीवनरेखा बन गया है। वे नियमित आधार पर रिन्यूअल के लिए आवेदन किए बिना अपनी अमेरिकी नौकरी की स्थिति को बनाए रखने में सक्षम रहे हैं। इस नीति को आवश्यक माना गया है, क्योंकि यह उन लोगों को अत्यंत आवश्यक स्थिरता प्रदान करती है जो अपने व्यवसाय और परिवार को चलाने के लिए वर्क परमिट पर निर्भर हैं।

रिपब्लिकन सीनेटरों का क्या कहना है?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, रिपब्लिकन सीनेटर कैनेडी और स्कॉट का दावा है कि इस नियम से आव्रजन नियमों की निगरानी करना और सुरक्षा बनाए रखना कठिन हो जाता है, क्योंकि इससे आप्रवासियों को अमेरिकी अधिकारियों को रिपोर्ट करने से बचने के लिए ज्यादा समय मिल जाता है। सीनेटर कैनेडी ने इस रणनीति को ‘खतरनाक’ बताया और दावा किया कि इससे ट्रंप प्रशासन की आव्रजन प्रवर्तन रणनीति खतरे में पड़ जाएगी। सीनेटरों ने चेतावनी दी कि वर्क परमिट रिन्यूअल की अवधि बढ़ाए जाने से उन लोगों पर नजर रखना कठिन हो जाएगा जो देश में अवैध रूप से रह रहे हैं और काम कर रहे हैं।

इस नियम से जुड़ा विवाद मुख्य रूप से H-1B और L-1 वीजा धारकों को प्रभावित करता है, जो उन विदेशी पेशेवरों के बीच आम हैं जो टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और फाइनेंस जैसे विशिष्ट क्षेत्रों में जॉब करते हैं। उदाहरण के लिए H-1B वीजा अमेरिकी नियोक्ताओं को टेक्नोलॉजी और इंजीनियरिंग जैसे क्षेत्रों में कम से कम स्नातक की डिग्री वाले विदेशी पेशेवरों को नियुक्त करने की अनुमति देता है। ये ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें भारत के कुशल श्रमिकों पर काफी निर्भरता देखी गई है।
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H-1B, H-4, L-1 और L-2 वीजा क्या हैं?

  • H-1B वीजा: यह टेक और फाइनेंस जैसी इंडस्ट्री में विशेष विदेशी कर्मचारियों के लिए है।
  • H-4 वीजा: यह H-1B धारकों के आश्रितों (जीवनसाथी और बच्चों) के लिए है और इसमें वर्क ऑथराइजेशन की कुछ एलिजिबिलिटी भी मिलती है।
  • L-1 वीजा: यह मल्टीनेशनल कंपनियों को कर्मचारियों को अमेरिकी शाखाओं में ट्रांसफर करने की अनुमति देता है। L-1A कार्यकारी अधिकारियों के लिए है, जबकि L-1B स्पेशलाइज्ड नॉलेज वाले कर्मचारियों के लिए है।
  • L-2 वीजा: यह L-1 वीजा धारकों के आश्रितों को जारी किया जाता है, जिससे उन्हें अमेरिका में काम करने और अध्ययन करने की अनुमति मिलती है।

H-1B और L-1 वीजा धारकों में भारतीय नागरिकों की संख्या महत्वपूर्ण है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2023 में भारतीय पेशेवरों को अमेरिका की ओर से जारी किए गए 76,671 L-1 वीजा और 83,277 L-2 वीजा में से एक बड़ा हिस्सा मिला। इसी तरह 2023 में जारी किए गए सभी H-1B वीजा में से 72 फीसदी भारतीयों के थे। इन वीजा धारकों को विशेष रूप से स्वचालित विस्तार से लाभ हुआ है, जो उन्हें अपने वर्क ऑथराइजेशन की स्थिति के अपडेट की प्रतीक्षा करते हुए अमेरिका में कार्यरत रहने के लिए ज्यादा समय प्रदान करता है।

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