इस्लामिक गणराज्य ईरान की सरकार अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। खामेनेई सत्ता के खिलाफ जनता का विरोध प्रदर्शन जारी रहने से देश के अंदर गृह युद्ध के हालात बने हुए हैं। वहीं अमेरिका की लगातार धमकियों से युद्ध जैसे संकट से भी ईरान गुजर रहा है। इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने बड़ा झटका दिया है।
यूएई के विदेश मंत्रालय ने सोमवार (26 जनवरी) को साफ कहा है कि वह ईरान के खिलाफ किसी भी शत्रुतापूर्ण सैन्य कार्रवाई के लिए अपने हवाई क्षेत्र, भूभाग या क्षेत्रीय जल का उपयोग नहीं होने देगा। जो कि ईरान के साथ अपनी दोस्ती की प्रतिबद्धता दिखाई है।
भूमि, हवाई क्षेत्र या जल क्षेत्र की अनुमति नहीं: यूएई
दरअसल, ईरान में सैन्य कार्रवाई की संभावना को लेकर अनिश्चितता तब से बनी हुई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले सप्ताह कहा था कि एक ‘विमानों का बेड़ा’ उनकी तरफ बढ़ रहा है, लेकिन उन्हें यह भी उम्मीद जताई कि उन्हें इसका इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा। विदेश मंत्रालय ने सोमवार को जारी आधिकारिक बयान में कहा कि देश अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है व किसी भी पड़ोसी देश के खिलाफ शत्रुतापूर्ण सैन्य कार्रवाई में अपनी भूमि, हवाई क्षेत्र या जल क्षेत्र की अनुमति नहीं देगा।
बता दें कि यूएई और अमेरिका के बीच अच्छे द्विपक्षीय संबंध हैं। ऐसे में अमेरिका के सैन्य अड्डे वहां मौजूद हैं। हालांकि ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को लेकर यूएई ने अपना रुख साफ कर दिया है। ईरान के प्रति अपना सकारात्मक रुख दर्शाते हुए यूएई ने पड़ोसी देशों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने की अपनी नीति को दोहराया है।
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ईरान में हजारों लोगों की मौत
ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन को लेकर मानवाधिकार समूहों के अनुसार हजारों लोगों की मौत की पुष्टि की गई हैं। मानवाधिकार समूह इस अशांति को 1979 की क्रांति में शिया मुस्लिम धर्मगुरुओं के सत्ता में आने के बाद से सबसे बड़ी दमनकारी कार्रवाई बता रहे हैं। विरोध प्रदर्शनों की शुरुआत देश के अंदर बढ़ती महंगाई, खराब अर्थव्यवस्था और गिरते मुद्रा के स्तर के बाद हुई, जो कि 28 दिसंबर 2025 से जारी है।
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