शनिवार पहली बार मैतेयी और कुकी समुदाय के प्रतिनिधि आमने-सामने बैठकर स्थायी शांति बहाली के रोडमैप पर बातचीत करेंगे। केंद्रीय गृह मंत्रालय के बातचीत के निमंत्रण ने कुकी संगठनों ने स्वीकार कर लिया है और दिल्ली में प्रतिनिधिमंडल भेजने का ऐलान किया है। पिछले साल भी गृहमंत्रालय ने दोनों समुदायों को बैठक के लिए आमंत्रित किया था लेकिन कुकियों ने इसे अस्वीकार कर दिया था।
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। मई 2023 में हिंसा शुरू होने के बाद शनिवार पहली बार मैतेयी और कुकी समुदाय के प्रतिनिधि आमने-सामने बैठकर स्थायी शांति बहाली के रोडमैप पर बातचीत करेंगे।
कुकी संगठनों ने दिल्ली में प्रतिनिधिमंडल भेजने का ऐलान किया
केंद्रीय गृह मंत्रालय के बातचीत के निमंत्रण ने कुकी संगठनों ने स्वीकार कर लिया है और दिल्ली में प्रतिनिधिमंडल भेजने का ऐलान किया है। पिछले साल भी गृहमंत्रालय ने दोनों समुदायों को बैठक के लिए आमंत्रित किया था, लेकिन कुकियों ने इसे अस्वीकार कर दिया था।
राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद केंद्र के वार्ताकार एके मिश्रा कुकी और मैतेयी दोनों समुदायों के संगठनों से अलग-अलग बातचीत कर चुके हैं। दोनों समुदायों के आमने-सामने बैठककर बातचीत करने को स्थायी शांति बहाली की दिशा में काफी अहम माना जा रहा है।
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन पर लोकसभा की मुहर
फरवरी महीने में मणिपुर में लगाए गए राष्ट्रपति शासन पर लोकसभा की मुहर लग गई है। गुरूवार को इसे राज्यसभा भी अनुमोदित कर सकती है। मणिपुर में राष्ट्रपति शासन के अनुमोदन का प्रस्ताव पेश करते हुए केंद्रीय गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि मणिपुर में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है और पिछले चार महीने में जातीय हिंसा की एक भी घटना नहीं हुई है।
अनुमोदन प्रस्ताव का विपक्ष का समर्थन मिला
शाह ने गृहमंत्रालय द्वारा जल्द ही मैतेयी, कुकी व अन्य नस्लीय समुदायों की संयुक्त बैठक बुलाये जाने का भरोसा दिया। रात के दो बजे पारित अनुमोदन प्रस्ताव का विपक्ष का समर्थन मिला। मणिपुर हिंसा की प्रकृति की जानकारी देते हुए अमित शाह ने कहा कि यह न तो आतंकवाद है और न ही दंगा है। बल्कि आरक्षण विवाद को लेकर मणिपुर हाईकोर्ट के एक फैसले की व्याख्या के कारण दो समुदायों के बीच हुई जातीय हिंसा है।
मणिपुर में हिंसा पहली बार नहीं हुई है- शाह
विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए शाह ने कहा कि मणिपुर में हिंसा पहली बार नहीं हुई है, बल्कि नस्लीय हिंसा का वहां पुराना इतिहास है। 1993 के बाद तीन बड़ी जातीय हिंसा और तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा नहीं जाने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस की पिछली सरकार के दौरान मणिपुर साल में औसतन 212 दिन बंद रहा।
मणिपुर में स्थायी शांति के लिए सरकार हरसंभव प्रयास कर रही
जबकि हाईकोर्ट के फैसले के पहले भाजपा के शासन के दौरान एक भी दिन बंद नहीं हुआ और न ही हिंसा हुई। अमित शाह ने कहा कि मणिपुर में स्थायी शांति के लिए सरकार हरसंभव प्रयास कर रही है। इस सिलसिले में राष्ट्रपति शासन लगाने के बाद मैतेयी और कुकी दोनों समुदायों के साथ चर्चा हुई और दोनों समुदायों के सभी संगठनों के साथ अलग-अलग दो बैठकें हो चुकी हैं।
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