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म्यांमार के मिलिट्री काउंसिल ने बताया है कि शुक्रवार आए शक्तिशाली भूकंप से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1644 हो गई है.
सैन्य नेताओं ने बताया है कि भूकंप से घायलों का आंकड़ा भी बढ़कर 3408 पहुंच गया है और 139 लोग अभी भी लापता हैं.
इससे पहले म्यांमार के सैन्य शासन प्रमुख मिन ऑन्ग हल्येंग ने कहा था कि मृतकों और घायलों की संख्या और बढ़ सकती है.
भूकंप केंद्र के सबसे नज़दीकी शहर मांडले में ही 694 से अधिक लोगों की मौत हुई है. वहीं राजधानी नेपीडॉ में 94 लोगों की मौत हुई है.
म्यामांर में शुक्रवार को भूकंप के तेज़ झटके महसूस किए गए थे. भूकंप की तीव्रता 7.7 थी. इस भूकंप के झटके पड़ोसी देश थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक तक महसूस किए गए थे. थाईलैंड में भूकंप के कारण 6 लोगों की मौत हुई है जबकि 100 मज़दूर लापता हैं.
भूकंप के झटकों से सैकड़ों मील दूर थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में एक 30 मंज़िला निर्माणाधीन इमारत गिर गई थी. इसमें अभी भी कई मज़दूरों के फंसे होने की आशंका है.
यूएस जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक़ म्यांमार में भूकंप के पहले झटके के 12 मिनट के बाद ही दूसरा झटका आया. दूसरे भूकंप की तीव्रता 6.4 थी. इस भूकंप का केंद्र सागाइंग से 18 किलोमीटर दक्षिण में था.
म्यांमार के दूसरे बड़े शहर मांडले में बचाव दल के एक कर्मचारी ने बीबीसी को बताया कि भूकंप से भारी तबाही हुई है और सैकड़ों लोगों के मरने की आशंका है.
समाचार एजेंसी एपी के अनुसार, अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे और जर्मनी के जीएफ़ज़ेड सेंटर फॉर जियोसाइंस ने कहा है कि भूकंप का केद्र म्यांमार में था.
एजेंसी के अनुसार, थाईलैंड की राजधानी बैंकाक में भी भूकंप के तेज़ झटके महसूस किए गए और वहां कई इमारतों को खाली कराया गया है.
अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे ने इसे 7.7 तीव्रता का बताया है. जबकि चीन की सरकारी न्यूज़ एजेंसी शिन्हुआ ने चीन के चाइना अर्थक्वेक नेटवर्क्स सेंटर के हवाले से भूकंप की तीव्रता 7.9 बताई है.
म्यांमार के बड़े हिस्से में इमरजेंसी का एलान कर दिया गया है. अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे के मुताबिक़ मरने वालों की संख्या हज़ारों में हो सकती है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार में आए भूकंप के बाद शनिवार को म्यांमार के वरिष्ठ जनरल और सैन्य शासक मिन आंग ह्लाइंग से बात की.
प्रधानमंत्री मोदी ने इसकी जानकारी देते हुए एक्स पर पोस्ट किया, “म्यांमार के वरिष्ठ जनरल मिन आंग ह्लाइंग से बात की. विनाशकारी भूकंप में हुई जनहानि पर अपनी गहरी संवेदना ज़ाहिर की. एक करीबी मित्र और पड़ोसी के तौर पर, भारत इस मुश्किल वक्त में म्यांमार के लोगों के साथ खड़ा है.”
प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की ओर से म्यांमार की मदद के लिए शुरू किए गए ऑपरेशन ब्रह्मा का हैशटैग डालते हुए लिखा, “आपदा राहत सामग्री, मानवीय मदद, खोज और बचाव दल को प्रभावित क्षेत्रों में बिना देरी किए भेजा जा रहा है.”
भारत ने भेजी मदद
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म्यांमार में आए भूकंप के बाद भारत ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के तहत वहां मदद भेज रहा है.
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के मुताबिक 118 सदस्यों वाली इंडियन आर्मी फील्ड हॉस्पिटल यूनिट आगरा से मांडले के लिए शनिवार को रवाना हुई.
यह टीम म्यांमार के लोगों को फर्स्ट एड और आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं देने में मदद करेगी.
भारतीय नेवी के जहाज़ आईएनएस सतपुरा और आईएनएस सावित्री के ज़रिए 40 टन मानवीय सहायता भेजी गई है.
म्यांमार में बचाव कार्यों में मदद के लिए भारत की ओर से शनिवार को राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की 80 सदस्यों की टीम भी म्यांमार रवाना हुई.
इसके अलावा भारतीय वायु सेना के सी-130 विमान से कंबल, तिरपाल, स्वच्छता किट, स्लीपिंग बैग, सोलर लैंप, फूड पैकेट और किचन सेट म्यांमार भेजा गया.
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अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे ने कहा है कि भूकंप का केंद्र धरती में 10 किलोमीटर नीचे था.
भूकंप का केंद्र बर्मा के मांडले शहर के पास था. ताज़ा तस्वीरों में दिख रहा है कि इरावजी नदी पर बना एक विशाल पुल ढह गया है. ऐसी भी ख़बरें हैं कि म्यांमार की राजधानी नेपीडॉ में सड़कों पर दरार आ गई है.
जबकि थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में भूंकप के झटकों के बाद गिरती इमारतों से लोग दूर भागते नज़र आ रहे हैं. एक वीडियो में दिख रहा है कि एक इमारत के स्वीमिंग पूल के पानी ऊंची लहर उठ रही है. सरकार एक इमर्जेंसी मीटिंग की कर रही है.
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बैंकॉक में मौजूद पत्रकार ने क्या बताया
बैंकॉक में रहने वाली बीबीसी पत्रकार बुई थू ने बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के न्यूज़डे प्रोग्राम में कहा कि जब भूकंप आया तो वह घर में खाना बना रही थीं.
उन्होंने कहा, “मैं बहुत घबरा गई थी. मुझे नहीं पता कि यह क्या था क्योंकि मुझे लगता है कि एक दशक हो गया जब बैंकॉक में इतना तेज़ भूकंप महसूस किया गया था.”
उन्होंने कहा, “मेरे अपार्टमेंट में मैंने कुछ दीवारों में दरारें देखीं और स्वीमिंग पूल से पानी छलक रहा था, लोग चिल्ला रहे थे.”
भूकंप के ऑफ़्टरशॉक के बाद वह और अन्य लोग सड़क की ओर भागे.
उन्होंने कहा, “हमारे आस-पास क्या हो रहा है, हम अभी समझने की कोशिश कर रहे हैं.”
“बैंकॉक में इमारतें भूकंपरोधी नहीं बनाई जाती हैं, मुझे लगता है कि इसलिए नुकसान अधिक हुआ है.”
भूकंप का केंद्र ज़मीन में कितना अंदर था
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बैंकॉक में मौजूद बीबीसी की टीम ने इमारतों को हिलते हुए महसूस किया और लोगों को सड़कों पर निकलते हुए देखा.
बीबीसी टीम ने कहा, भूकंप का झटका बहुत तेज़ था और खिड़की से, एक गगनचुंबी इमारत की ऊपरी मंज़िल से पानी सड़क पर गिर रहा था.
यूएसजीएस के अनुसार, भूकंप का केंद्र बर्मा के सागैंग शहर से 16 किमी उत्तर-पश्चिम में, मांडले शहर के पास स्थित था. यह राजधानी से लगभग 100 किमी उत्तर में स्थित है.
राजधानी में मौजूद एएफ़पी के पत्रकारों ने कहा कि भूकंप के झटकों के कारण सड़कें टूट गईं और छत से टुकड़े गिरने लगे.
चाइना डेली के अनुसार, चाइना अर्थक्वेक नेटवर्क्स सेंटर ने कहा है कि भूकंप का केंद्र धरती के 30 किलोमीटर अंदर था.
बैंकॉक में तबाही
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ये भी बताया जा रहा है कि भूकंप के तेज़ झटके दक्षिणपश्चिम चीन के यून्नान प्रांत तक भी महसूस किए गए हैं. कुछ तस्वीरों में एक बड़ा पुल म्यांमार की मुख्य नदी इरावजी में गिरता दिख रहा है.
ऐसी भी ख़बरें हैं कि नेपीडॉ में कई सड़कें टूट गई है या उनमें दरारें आ गई हैं.
थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक म्यांमार के भूकंप के केंद्र वाली जगह करीब 1000 किलोमीटर दूर है. हालांकि, यहां भी इतना ज़ोरदार झटका महसूस किया गया है कि एक निर्माणाधीन इमारत के ढहने की खबर है.
पुलिस ने बताया है कि यहां कई लोग मलबे में दबे हुए हैं.
म्यांमार में भूकंप का इतिहास
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म्यांमार से जो तस्वीरें आ रही हैं उसमें राजधानी नेपीडॉ की सड़कों पर दरारें दिख रही हैं.
हालांकि थाईलैंड के मुकाबले म्यांमार में अधिक भूकंप आते हैं.
एएफ़पी न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे की रिपोर्ट कहती है कि साल 1930 से 1956 के बीच सागैंग फॉल्ड के पास रिक्टर पैमाने पर 7.0 की तीव्रता के छह भूकंप आए. यह फ़ॉल्ट देश के मध्य से होकर गुजरता है.
थाईलैंड भूकंप ज़ोन नहीं है और यहां महसूस किए गए सभी भूकंप पड़ोसी म्यांमार में आए.
बैंकॉक में इमारतों के निर्माण में भूकंपरोधी तकनीक का इस्तेमाल नहीं होता है, इसलिए यहां नुकसान अधिक हो सकता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित