शराब पीने से टोकना पड़ा भारी
दरअसल, बीती रात नर्मदा परिक्रमा मार्ग पर कुछ युवक शराब पी रहे थे। परिक्रमा कर रहे साधुओं ने उन्हें ऐसा करने से रोका। इस पर युवकों ने साधुओं पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि पंचमुखी हनुमान मंदिर के पास शराब पी रहे युवकों ने पहले एक बाबा पर कुल्हाड़ी से हमला किया। फिर बीच-बचाव करने आए साधु द्वाकरा लाल दास पर पत्थर फेंके। इससे वे घायल हो गए। इस घटना की शिकायत पुलिस थाने में दर्ज कराई गई है।
घटना से संत समाज में गुस्सा
घायल साधु द्वाकरा लाल दास ने कहा कि वे सिर्फ धार्मिक स्थल की मर्यादा बनाए रखने के लिए युवकों को समझा रहे थे। लेकिन युवकों ने उन पर हमला कर दिया। उन्होंने कहा कि वे केवल धार्मिक स्थल की मर्यादा बनाए रखने के लिए युवकों को समझा रहे थे। इसके बदले उन्हें हिंसा का सामना करना पड़ा। इस घटना से संत समाज में गुस्सा है। संतों ने मुख्यमंत्री तक शिकायत पहुंचाने का फैसला किया है।
बड़े संतों ने की घटना की निंदा
संत मंडल अध्यक्ष मंगलदास त्यागी ने इस घटना की निंदा की है। उन्होंने कहा कि यह तीर्थ नगरी की शांति और मर्यादा पर हमला है। उन्होंने कहा कि शराबबंदी के बावजूद ऐसी घटनाएं दिखाती हैं कि प्रशासन और संबंधित विभाग ठीक से काम नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि शराबबंदी के बावजूद ऐसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि प्रशासन और संबंधित विभाग अपने कर्तव्यों का पालन नहीं कर रहे हैं।
पुलिस बल की भी कमी
थाना प्रभारी आलोक सिंधिया ने कहा कि पुलिस बल की कमी है। वीआईपी ड्यूटी की वजह से स्थिति को नियंत्रण में लाना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि शराबबंदी को लागू करना आबकारी विभाग की जिम्मेदारी है।
ओपिनियन:
सरकार धार्मिक स्थलों को शराब मुक्त बनाना चाहती है। लेकिन इसे लागू करने में लापरवाही हो रही है। सरकार और प्रशासन को ऐसे आदेश गंभीरता से लेने चाहिए। ओंकारेश्वर में शराबबंदी को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि शराबबंदी के बावजूद, यहां आसानी से शराब मिल जाती है। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि पुलिस और आबकारी विभाग इस मामले में ठीक से कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। अगर यही हाल रहा तो एमपी की शराबबंदी का हाल बिहार की शराबबंदी जैसा ही हो जाएगा।