दिल्ली दंगों से जुड़े मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत न मिलने को लेकर सियासत एक बार फिर तेज हो गई है। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने इस मुद्दे पर कांग्रेस को सीधे कटघरे में खड़ा किया है।
ओवैसी का कहना है कि सख्त यूएपीए कानून कांग्रेस सरकार के दौर में लाया गया, जिसकी वजह से आज कार्यकर्ताओं को वर्षों तक जेल में रहना पड़ रहा है।
यूएपीए की जड़ कहां से जुड़ी है?
ओवैसी ने अमरावती में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम को जिस यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया गया, वह कानून कांग्रेस शासनकाल में बना। उस समय गृह मंत्री पी. चिदंबरम थे और संसद में इस कानून का विरोध करने वाले वे अकेले सांसद थे। यूएपीए की परिभाषा इतनी व्यापक है कि इसमें असहमति को भी आतंकवाद की श्रेणी में डाल दिया गया।
ओवैसी ने बताया जमानत क्यों बनी असंभव?
ओवैसी ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि दिल्ली दंगों के कथित साजिश मामले में धारा 15ए के आधार पर उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत नहीं मिली। इसी मामले में कुछ अन्य आरोपियों को भागीदारी के स्तर के आधार पर राहत दी गई। पांच साल से ज्यादा समय से दोनों कार्यकर्ता जेल में हैं, जबकि मुकदमा अब तक अंतिम चरण में नहीं पहुंचा है।
ओवैसी ने कही ये बड़ी बातें
- यह कानून मुसलमानों, दलितों, आदिवासियों और सरकार की नीतियों का विरोध करने वाले बुद्धिजीवियों के खिलाफ इस्तेमाल किया जा रहा है।
- एल्गार परिषद मामले में आरोपी 85 वर्षीय स्टैन स्वामी की जेल में मौत इसी कानून की कठोरता का उदाहरण है।
- कांग्रेस और भाजपा, दोनों ने समय-समय पर इस यूएपीए कानून को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है।
2019 में संशोधन पर भी निशाना
ओवैसी ने कहा कि वर्ष 2019 में यूएपीए में संशोधन के समय कांग्रेस ने भाजपा सरकार का समर्थन किया। आज वही संशोधन आम लोगों की जिंदगी तबाह कर रहा है। विपक्ष जब धर्मनिरपेक्षता की बात करता है, तो असल में वह सिर्फ चुनावी फायदे के लिए करता है।
अन्य वीडियो-