कर्नाटक के कलबुर्गी में एक कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर बेहद तीखा बयान दिया। उन्होंने कहा कि ट्रंप तानाशाह हैं और मोदी उनके गुलाम बन गए हैं। खरगे ने आरोप लगाया कि भारत की विदेश नीति और व्यापार नीतियां अब अमेरिका के दबाव में चल रही हैं, जिससे देश और खासकर किसानों को नुकसान हो सकता है।
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अमेरिका का रवैया अहंकारी है- मल्लिकार्जुन खरगे
कांग्रेस अध्यक्ष ने पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का जिक्र करते हुए कहा कि किसी भी देश के नेता की हत्या से दुनिया में शांति नहीं रह सकती। उन्होंने कहा कि अगर अली खामेनेई जैसे नेताओं को निशाना बनाया जाता है तो इससे अंतरराष्ट्रीय कानून और वैश्विक स्थिरता पर गंभीर असर पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका का रवैया अहंकारी है और वह कई मामलों में अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन कर रहा है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भी बोले खरगे
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर हमला बोलते हुए खरगे ने कहा कि भारत को मजबूरी में कई शर्तें माननी पड़ी हैं। उनके मुताबिक भारत अपने कई कृषि उत्पादों पर टैरिफ नहीं लगा सकता, जबकि अमेरिका भारतीय निर्यात पर टैरिफ लगाता है। उन्होंने कहा कि भारत में करीब 65 प्रतिशत लोग खेती पर निर्भर हैं, जबकि अमेरिका में यह संख्या सिर्फ 3 प्रतिशत है। ऐसे में अगर अमेरिकी कृषि उत्पाद भारत में बिना रोक-टोक आएंगे तो भारतीय किसानों पर बड़ा असर पड़ेगा।
‘अंतरराष्ट्रीय हालात पर खुलकर बात नहीं करते पीएम मोदी’
कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि पहले भारत रूस, ईरान और वेनेजुएला जैसे देशों से सस्ता तेल खरीदता था, लेकिन अब अमेरिका के दबाव में फैसले लिए जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि ट्रंप ने भारत को रूसी तेल खरीदने से मना किया और टैरिफ लगाने की धमकी दी, जिसके कारण भारत को अपनी नीति बदलनी पड़ी। खरगे ने आरोप लगाया कि मोदी चुनावी रैलियों में ज्यादा व्यस्त रहते हैं और अंतरराष्ट्रीय हालात पर खुलकर बात नहीं करते। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मन की बात तो करते हैं, लेकिन जब अमेरिका भारत के खिलाफ फैसले लेता है तो वह चुप रहते हैं।
‘एपस्टीन फाइल्स के जरिए मोदी पर दबाव बना रहे ट्रंप’
अपने भाषण में खरगे ने यह भी दावा किया कि ट्रंप, तथाकथित एपस्टीन फाइल्स के जरिए मोदी पर दबाव बना रहे हैं। हालांकि भारत सरकार पहले ही इन आरोपों को खारिज कर चुकी है और कहा है कि इन फाइलों में प्रधानमंत्री का नाम होने का दावा बेबुनियाद और आपत्तिजनक है।
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पूर्व पीएम इंदिरा गांधी का खरगे ने किया जिक्र
मल्लिकार्जुन खरगे ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण देते हुए कहा कि 1971 में जब पाकिस्तान से युद्ध हुआ था, तब उन्होंने अमेरिका के दबाव की परवाह किए बिना फैसला लिया और बांग्लादेश के निर्माण में भूमिका निभाई। खरगे ने सवाल उठाया कि आज की सरकार में वैसी हिम्मत क्यों नहीं दिखती। कांग्रेस नेता ने आखिरी में कहा कि अगर मौजूदा नीतियां जारी रहीं तो देश की गरीब जनता पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा, क्योंकि किसी भी वैश्विक संकट या युद्ध की स्थिति में सबसे ज्यादा मुश्किल गरीबों को ही झेलनी पड़ती है।
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