महाराष्ट्र की राजनीति में स्थानीय निकाय चुनाव के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने उपमुख्यमंत्री अजित पवार पर तंज कसते हुए कहा कि दोनों दलों के बीच दोस्ताना मुकाबले पर सहमति थी, लेकिन अजित पवार का संयम अब डगमगाता दिख रहा है। यह टिप्पणी पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ के नगर निगम चुनाव अभियान के बीच आई है।
फडणवीस ने कहा कि भाजपा और एनसीपी ने पहले ही तय किया था कि पुणे और पिंपरी-चिंचवाड़ में दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ेंगे, लेकिन एक-दूसरे की आलोचना नहीं करेंगे। मुख्यमंत्री के मुताबिक उन्होंने इस समझौते का पालन किया, जबकि अजित पवार बार-बार भाजपा पर स्थानीय प्रशासन को लेकर हमला कर रहे हैं। फडणवीस ने कहा कि मैं काम बोलने देता हूं, बयान नहीं।
ये भी पढ़ें- PMK में नेतृत्व संकट गहराया: अध्यक्ष पद की लड़ाई के लिए पिता और पुत्र आमने-सामने; चुनाव आयोग तक पहुंचा विवाद
अजित पवार की रणनीति पर सवाल क्यों।
फडणवीस ने भरोसा जताया कि 15 जनवरी को मतदान के बाद अजित पवार की भाषा बदल जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि पुणे के मतदाता मुफ्त घोषणाओं से प्रभावित नहीं होते। उनके अनुसार लोग भरोसेमंद सेवाएं चाहते हैं और न्यूनतम शुल्क देने को तैयार हैं। फडणवीस ने मुफ्त मेट्रो और परिवहन यात्रा के वादों को अव्यावहारिक बताया।
मुफ्त वादों पर फडणवीस की आपत्तियां क्यों?
घोषणापत्र में अजित पवार के वादे…
- पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में सत्ता में आने पर मेट्रो में मुफ्त यात्रा देने का वादा।
- नगर निगम की बस और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में फ्री सफर का एलान।
- आम लोगों को राहत देने के नाम पर मुफ्त सुविधाओं को चुनावी मुद्दा बनाना।
फडणवीस की आपत्तियां…
- मेट्रो के किराए तय करने का अधिकार कानूनन किराया निर्धारण समिति के पास होता है।
- राज्य सरकार अपने स्तर पर अकेले मेट्रो किराया माफ नहीं कर सकती।
- अगर किराया नहीं लिया जाएगा तो संचालन लागत कैसे निकलेगी, यह स्पष्ट नहीं।
- ऐसे वादे करना भ्रामक है, जो सरकार के अधिकार क्षेत्र में ही नहीं आते।
- पुणेवासी मुफ्त नहीं, बल्कि भरोसेमंद और बेहतर सार्वजनिक सेवा चाहते हैं।
ये भी पढ़ें- अमेरिका के साथ FTA को लेकर एसकेएम ने पारित किया प्रस्ताव, सरकार को दी बड़े आंदोलन की दी चेतावनी
आपराधिक पृष्ठभूमि वालों को फडणवीस का सीधा संदेश
गृह मंत्री भी रहे फडणवीस ने कहा कि 60 लाख की आबादी वाले पुणे में आपराधिक पृष्ठभूमि वालों को टिकट देने की कोई जरूरत नहीं। उन्होंने परोक्ष रूप से एनसीपी पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग कोयता गैंग खत्म करने की बात करते हैं, वही ऐसे लोगों को आगे कर रहे हैं। फडणवीस ने दो टूक कहा कि अपराधियों की जगह जेल है, नगर निगम नहीं।
राजनीतिक समीकरण और भरोसे का सवाल
फडणवीस ने यह भी कहा कि जिन दलों को हार का अंदेशा होता है, वे अव्यावहारिक घोषणाएं करते हैं। उनका दावा है कि पुणे के लोग समझदार हैं और ऐसे वादों पर भरोसा नहीं करेंगे। उन्होंने स्थानीय सेवाओं की गुणवत्ता, समयबद्धता और भरोसे को चुनाव का असली मुद्दा बताया।