सांस्कृतिक झांकियों की शुरुआत असल में “विविधता में एकता” के तहत हुई थी। शुरुआती परेड में साधारण झांकियां होती थीं जिनमें फ्लैटबेड ट्रकों पर क्षेत्रीय हस्तशिल्प और लोक कलाकार होते थे। धीरे-धीरे समय के साथ झांकियों की झलक भी बदलती गई। आज हम यहां पिछले 16 सालों में जो झांकियां विजेता रहीं, उनकी बात करेंगे।
उत्तर प्रदेश, महाकुंभ 2025

इस झांकी ने महाकुंभ मेले का एक शानदार नजारा पेश किया था। इसमें ‘समुद्र मंथन’, ‘अमृत कलश’ और संगम के किनारे पवित्र स्नान करते साधु-संतों को दिखाकर आध्यात्मिक भव्यता को दर्शाया गया था। इसमें ‘विरासत’ और ‘विकास’ के लाक्षणिक संगम को भी दिखाया गया था।
ओडिशा, महिला सशक्तिकरण और रेशम 2024

झांकी में पट्टाचित्र कला रूप दिखाया गया था और राज्य की हस्तशिल्प अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका पर जोर दिया गया था। इसकी बारीक हाथ से बनी डिटेल्स और पारंपरिक नर्तकियों की लाइव परफॉर्मेंस के लिए इसकी खूब तारीफ हुई।
उत्तराखंड, मानसखंड 2023

इस झांकी में घने देवदार के जंगलों के बीच जागेश्वर धाम को दिखाया गया था। यह कर्तव्य पथ पर शांत, ‘देवभूमि’ का माहौल लाने के लिए खास थी।
उत्तर प्रदेश, अयोध्या और राम मंदिर 2021

इसमें बन रहे राम मंदिर का एक भव्य मॉडल दिखाया गया था। इसमें दीपोत्सव की झलकियां और रामायण महाकाव्य की अलग-अलग कहानियों के साथ-साथ ऋषि वाल्मीकि की एक विशाल मूर्ति भी दिखाई गई थी।
असम, भोरताल नृत्य और हस्तशिल्प 2020

इस झांकी को भोरताल नृत्य और राज्य के बांस और बेंत की कारीगरी पर फोकस करके दिखाया गया था। झांकी पर कलाकारों द्वारा मंजीरों की लयबद्धता से एक अनोखा अनुभव हुआ।
त्रिपुरा 2019

इस झांकी में गांधीवादी तरीके से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनता हुआ दर्शाया गया था।
महाराष्ट्र 2018

इस झांकी में छत्रपति शिवाजी महाराज के राज तिलक को दर्शाया गया था।
अरुणाचल प्रदेश 2017

इस झांकी में मोनपास के याक डांस को दर्शाया गया।
पश्चिम बंगाल 2016

इस झांकी में भटके हुए जोगियों को दर्शाया गया।
महाराष्ट्र 2015

इस झांकी की थीम वारी से पंढर पुर थी।
पश्चिम बंगाल 2014

इस झांकी की थीम पुरुलिया छऊ नृत्य थी।
केरल 2013

इसने “गॉड्स ओन कंट्री” की प्राकृतिक सुंदरता को वहां के लोगों की आजीविका के साथ खूबसूरती से बैलेंस किया, जिसमें एक विशाल हाउस-बोट (केट्टुवल्लम) का रेप्लिका दिखाया गया था।
एचआरडी मंत्रालय 2012

इस झांकी थीम साक्षर भारत थी।
दिल्ली 2011

इस झांकी की थीम सांस्कृतिक और धार्मिक सद्भाव थी।
संस्कृति मंत्रालय, 2010

इस झांकी थीम भारतीय संगीत वाद्ययंत्र थी।
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