• Tue. Feb 10th, 2026

24×7 Live News

Apdin News

Russian Oil:अमेरिकी टैरिफ में कटौती और रूसी तेल पर भारत का रुख, क्या है पूरी डील? इन छह सवालों के जवाब जरूरी – India Us Trade Deal Trump Tariff Cut Russian Oil Sanctions India Russian Oil Imports Indian Economy

Byadmin

Feb 10, 2026


अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक संबंधों में हाल ही में एक नाटकीय मोड़ आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय सामानों पर लगने वाले टैरिफ (आयात शुल्क) में कटौती की घोषणा की है, लेकिन माना जा रहा है कि इसके पीछे एक बड़ी शर्त जुड़ी है- और वह शर्त है रूस से कच्चे तेल के आयात को रोकना। यह गतिविधि ऐसे समय पर हुई है जब रूस पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंध और कड़े हो रहे हैं और वहां की अर्थव्यवस्था भारी दबाव में है। इस पूरे मामले को कुछ जरूरी सवालों के जवाब के जरिए समझते हैं। 

सवाल: अमेरिका ने भारत के लिए टैरिफ में क्या बदलाव किए हैं और इसके बदले में क्या शर्त रखी है?

जवाब: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 3 फरवरी को भारत से आयात होने वाले सामानों पर टैरिफ को 25% से घटाकर 18% करने की सहमति दी है। इसके अलावा, उन्होंने शुक्रवार को रूसी तेल के निरंतर आयात को लेकर लगाए गए अतिरिक्त 25% टैरिफ को भी हटा दिया। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रूस से कच्चे तेल का आयात रोकने पर सहमति जताई है। यह कदम अमेरिका की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत वह रूस की तेल से होने वाली कमाई को पूरी तरह से सुखाना चाहता है ताकि यूक्रेन युद्ध के लिए उसकी फंडिंग रोकी जा सके।

सवाल: क्या भारत ने आधिकारिक तौर पर रूस से तेल खरीदना बंद करने की पुष्टि की है?

जवाब: इस मुद्दे पर अभी तक एक विरोधाभासी स्थिति बनी हुई है। जहां एक तरफ राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि पीएम मोदी रूसी तेल रोकने पर सहमत हो गए हैं, वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने खुद इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है। अमेरिका के साथ हुए अंतरिम व्यापार समझौते की बारीकियों का एलान करने के दौरान जब केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से इस बावत सवाल पूछा गया तो उन्होंने इसका जवाब देने से बचते हुए कहा कि इस पर जवाब विदेश मंत्रालय की ओर से आएगा। हालांकि, रूस से तेल खरीद पर अमेरिका को क्या आश्वासन दिया गया है? जब यह सवाल देश के विदेश मंत्री एस जयशंकर से पूछा गया तो उन्होंने भी कहा दिया कि वे शायद यह पूछे जाने के लिए उपयुक्त नहीं हैं। दूसरी ओर, भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कूटनीतिक जवाब देते हुए कहा कि भारत की रणनीति “बाजार की वस्तुनिष्ठ स्थितियों के आधार पर अपनी ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने” की है। इसका मतलब है कि भारत अपने हितों के अनुसार फैसला लेगा। वहीं, डेटा फर्म केप्लर का मानना है कि भारत निकट भविष्य में सस्ते रूसी ऊर्जा स्रोतों से पूरी तरह अलग नहीं होने वाला है।


सवाल: क्या आंकड़ों में रूसी तेल के आयात में कोई गिरावट दर्ज की गई है?

जवाब: हां, हालिया आंकड़ों में गिरावट साफ दिखाई दे रही है। कीव स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन के आंकड़ों के मुताबिक, भारत में रूसी तेल की शिपमेंट में पिछले कुछ हफ्तों में कमी आई है। यह आंकड़ा अक्टूबर में 2 मिलियन बैरल प्रतिदिन से घटकर दिसंबर में 1.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन रह गया है। यह गिरावट दर्शाती है कि अमेरिकी दबाव और प्रतिबंधों का असर व्यापारिक निर्णयों पर पड़ रहा है, भले ही आधिकारिक बयानों में पूरी तरह से इनकार न किया गया हो।

सवाल: रूस की अर्थव्यवस्था पर इन प्रतिबंधों और घटते तेल निर्यात का क्या असर हो रहा है?

जवाब: रूस के लिए तेल निर्यात एक ‘कैश काउ’ (दुधारू गाय) की तरह रहा है, जिसने युद्ध के दौरान उसकी अर्थव्यवस्था को संभाले रखा था, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। अमेरिकी और यूरोपीय संघ के नए दंडात्मक उपायों और भारत पर अमेरिकी दबाव के कारण रूस का राजस्व कई वर्षों के निचले स्तर पर आ गया है। जनवरी 2026 में रूस का तेल और गैस से होने वाला कर राजस्व गिरकर 393 अरब रूबल ($5.1 बिलियन) रह गया, जो दिसंबर में 587 अरब रूबल और जनवरी 2025 में 1.12 ट्रिलियन रूबल था। यह कोविड-19 महामारी के बाद का सबसे निचला स्तर है।

 






































































































महीना आयात बैरल प्रति दिन कुल बैरल मूल्य डॉलर में मूल्य (करोड़ रुपये में)
फरवरी 2025 1.48 41.44 2,838 23,839
मार्च 2025 1.87 57.97 3,971 33,356
अप्रैल 2025 1.96 58.8 4,028 33,835
मई 2025 1.95 60.45 4,141 34,784
जून 2025 2.1 63 4,316 36,254
जुलाई 2025 1.6 49.6 3,400 28,560
अगस्त 2025 1.7 52.7 3,610 30,324
सितंबर 2025 1.62 48.6 3,329 27,964
अक्टूबर 2025 1.62 50.22 2,750 23,100
नवंबर 2025 1.84 55.2 3,700 31,080
दिसंबर 2025 1.22 37.82 2,700 22,680
जनवरी 2026 1.16 35.96 2,560 21,504

नोट: वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय और वाणिज्यिक खुफिया और सांख्यिकी महानिदेशालय की ओर से जारी आंकड़ों पर आधारित।

सवाल: वैश्विक बाजार में रूसी तेल की कीमतों और डिस्काउंट पर इसका क्या प्रभाव पड़ा है?

जवाब: कड़े अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से खरीदार अब रूसी तेल पर भारी छूट की मांग कर रहे हैं। दिसंबर में यह डिस्काउंट बढ़कर लगभग 25 डॉलर प्रति बैरल हो गया। रूस का प्रमुख क्रूड ‘यूराल ब्लेंड’ 38 डॉलर प्रति बैरल से नीचे गिर गया, जबकि अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 62.50 डॉलर प्रति बैरल थी। चूंकि रूस में तेल उत्पादन पर टैक्स तेल की कीमत पर आधारित होता है, इसलिए कम कीमत का सीधा मतलब है रूसी सरकार के खजाने में कम पैसा आना।

सवाल: रूस इस आर्थिक संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठा रहा है?

जवाब: घटते तेल राजस्व और धीमी आर्थिक वृद्धि से निपटने के लिए क्रेमलिन ने टैक्स बढ़ाने और कर्ज लेने का सहारा लिया है। रूसी संसद ने उपभोक्ता खरीद पर वैट को 20% से बढ़ाकर 22% कर दिया है और कार आयात, सिगरेट व शराब पर भी लेवी बढ़ाई है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स बढ़ाने से विकास दर और धीमी हो सकती है और कर्ज लेने से महंगाई का जोखिम बढ़ सकता है। अगर यह स्थिति 6 महीने या एक साल तक बनी रहती है, तो रूस को युद्ध की तीव्रता कम करने और मोर्चे पर अपनी रणनीति बदलने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।

By admin