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Supreme Court:बैंक धोखाधड़ी मामले में एमटेक ग्रुप के पूर्व चीफ को जमानत, ₹27000 करोड़ की हेराफेरी का है आरोप – Former Amtek Group Chief Granted Bail In Bank Fraud Case Involving ₹27000 Crore Fraud

Byadmin

Jan 6, 2026


सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 27,000 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले से जुड़े धन शोधन मामले में एमटेक समूह के पूर्व चेयरपर्सन अरविंद धाम को जमानत दे दी। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें धाम की जमानत याचिका खारिज की गई थी। न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने यह फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली पीठ में बैठे न्यायमूर्ति आराधे ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अदालत ने इस मामले में धाम की अपील को स्वीकार कर लिया है।

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हाईकोर्ट का तर्क क्या था?

दिल्ली हाईकोर्ट ने पिछले साल 19 अगस्त को जमानत खारिज करते हुए कहा था कि समय से पहले रिहाई से जवाबदेही तय करने के प्रयास प्रभावित हो सकते हैं। हाईकोर्ट ने यह भी रेखांकित किया था कि तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के साथ मनी लॉन्ड्रिंग जैसे आर्थिक अपराध देश की वित्तीय प्रणाली के लिए गंभीर खतरा बन गए हैं और ऐसे मामलों में जांच जटिल व लंबी होती है।

उच्च न्यायालय ने आगे कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए सावधानीपूर्वक और गहन जांच आवश्यक है कि निर्दोष व्यक्तियों को गलत तरीके से फंसाया न जाए और वास्तविक अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाया जाए।

एमटेक समूह की 550 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों को किया गया कुर्क

इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोधी कानून के तहत एमटेक समूह की कंपनियों की 550 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क की थीं। सितंबर 2024 में एजेंसी ने 5,115.31 करोड़ रुपये की संपत्तियां भी अटैच की थीं। जांच के दौरान 145 एकड़ जमीन (राजस्थान व पंजाब), दिल्ली-एनसीआर में 342 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां, तथा 112.5 करोड़ रुपये के फिक्स्ड डिपॉजिट और बैंक बैलेंस कुर्क किए गए।

एमटेक समूह पर एजेंसी का आरोप

ईडी की जांच 27 फरवरी 2024 को सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर शुरू हुई थी। धाम को जुलाई 2024 में गिरफ्तार किया गया और सितंबर 2024 में चार्जशीट दाखिल हुई। एजेंसी का आरोप है कि समूह की कंपनियों ने वित्तीय विवरणों में हेरफेर कर फर्जी ऋण और संपत्तियां दिखाईं, जिससे बैंकों को 80% से अधिक का ‘हेयरकट’ झेलना पड़ा और सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थानों को भारी नुकसान हुआ।




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