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Trade War And Us Tariffs,क्या बैंकों को ले डूबेगा अमेरिका का टैरिफ? ग्लोबल ट्रेड वॉर से हो सकता है बड़ा नुकसान, जानें किसने दी चेतावनी – global trade war and us tariff hike could cut bank profits by up to 25 basis points according icra

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Apr 2, 2025


नई दिल्ली: ग्लोबल ट्रेड वॉर (Global Trade War) से बैंकों को नुकसान हो सकता है। वहीं अमेरिकी टैरिफ की वजह से वित्तीय वर्ष 2026 (FY26) में बैंकों का मुनाफा 25 बेसिस पॉइंट्स तक गिर सकता है। दरअसल, ट्रेड वॉर को लेकर रेटिंग एजेंसियों ने चेतावनी जारी की है। ये एजेंसियां मानती हैं कि इससे सामान की सप्लाई में दिक्कत आ सकती है। इसका असर महंगाई पर भी पड़ सकता है।

अगर ऐसा हुआ तो बैंकों को नुकसान हो सकता है। उनका मुनाफा FY26 में 0.25% यानी 25 बेसिस पॉइंट तक गिर सकता है। ऐसा इसलिए होगा क्योंकि बैंकों को लोगों को अपनी तरफ खींचने के लिए ज्यादा ब्याज देना पड़ेगा।
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क्या कहना है एजेंसियों का?

रेटिंग एजेंसियों का कहना है कि FY26 में भारत की GDP 6.5% से 7% के बीच रह सकती है। ICRA नाम की रेटिंग एजेंसी के अनुसार, दुनिया में कई तरह की परेशानियां चल रही हैं। जैसे कि अलग-अलग देशों के बीच लड़ाई-झगड़े हो रहे हैं। इससे सामान की सप्लाई और व्यापार में दिक्कत आ रही है।

कुछ देश अपने फायदे के लिए नीतियां बना रहे हैं, जिससे दूसरे देशों को नुकसान हो रहा है। इससे निवेश और व्यापार में अनिश्चितता बनी हुई है। बॉन्ड और करेंसी के रेट भी ऊपर-नीचे हो रहे हैं। इन सब चीजों का असर भारत के एक्सपोर्ट पर पड़ सकता है।

दूसरी तरफ, बैंकों के लिए लोगों से पैसे जमा करवाना एक बड़ी चुनौती होगी। क्योंकि लोगों को अपनी तरफ खींचने के लिए बैंकों के बीच कड़ी टक्कर होगी। केयरएज (CareEdge) का कहना है कि इस वजह से रिजर्व बैंक की पॉलिसी का असर दिखने में थोड़ा समय लगेगा।

बैंकों को रहना होगा सावधान

क्रिसिल (Crisil) के चीफ रेटिंग ऑफिसर कृष्णन सीतारामन का कहना है, ‘बैंकों को मुनाफा कमाने के लिए बहुत सावधानी से चलना होगा। क्योंकि लोगों को अपनी तरफ खींचने के लिए बैंकों के बीच बहुत ज्यादा मुकाबला है। जो लोन बाहरी बेंचमार्क रेट से जुड़े हैं, उनका रेट तो जल्दी कम हो जाएगा। लेकिन जो लोन मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स-बेस्ड लेंडिंग रेट से जुड़े हैं, उनका रेट कम होने में दो-तीन महीने लगेंगे।’

उन्होंने आगे कहा, ‘बैंकों को जमा पर ब्याज दरें बढ़ानी पड़ सकती हैं, क्योंकि मुकाबला बहुत ज्यादा है। हमें लगता है कि बैंकों का मुनाफा 0.20% तक कम हो सकता है।’

NBFC को बेहतर रेटिंग

रेटिंग एजेंसियों ने कुछ बड़ी NBFC को बेहतर रेटिंग दी है। ऐसा इसलिए है क्योंकि इन कंपनियों को अच्छा निवेश मिला है। उन्होंने अपना कारोबार भी बढ़ाया है। साथ ही, उनकी एसेट क्वालिटी भी अच्छी है और उन्होंने ज्यादा कर्ज भी नहीं लिया है।

जिन NBFC की रेटिंग घटाई गई है, उनकी एसेट क्वालिटी खराब हो गई है। उनका मुनाफा भी कम हो गया है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि उन्हें ज्यादा लोन देना पड़ा है और उनका खर्चा भी बढ़ गया है। खासकर उन कंपनियों को ज्यादा नुकसान हुआ है जो बिना गारंटी के लोन देती हैं या जिन्हें समय पर फंडिंग नहीं मिल पाती है।

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