अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश के बड़े बैंक जेपी मॉर्गन चेस और उसके सीईओ जेमी डाइमोन के खिलाफ पांच अरब डॉलर (करीब 41 हजार करोड़ रुपये) का मुकदमा दायर किया है। ट्रंप का आरोप है कि बैंक ने उनके और उनकी कंपनियों के अकाउंट सिर्फ राजनीतिक वजहों से बंद कर दिए थे। यह मुकदमा फ्लोरिडा के मियामी-डेड काउंटी कोर्ट में दायर किया गया है। ट्रंप का कहना है कि जब वे जनवरी 2021 में राष्ट्रपति पद से हटे, उसके कुछ ही हफ्तों बाद फरवरी 2021 में जेपी मॉर्गन ने उनके कई बैंक खातों को सिर्फ 60 दिन का नोटिस देकर अचानक बंद कर दिया। बैंक ने न तो कोई ठोस कारण बताया और न ही कोई स्पष्ट जवाब दिया।
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ट्रंप और उनकी कंपनी को हुआ लाखों डॉलर का नुकसान
ट्रंप के अनुसार, बैंक के इस फैसले से उनके और उनकी कंपनियों को लाखों डॉलर का नुकसान हुआ। उनका कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ। उन्हें और उनकी कंपनियों को मजबूरी में जल्दी-जल्दी दूसरे बैंकों में नए खाते खुलवाने पड़े। यह सब इसलिए किया गया क्योंकि उस समय का राजनीतिक माहौल ट्रंप के खिलाफ था।
राजनीतिक बदले का ट्रंप ने लगाया आरोप
अमेरिकी राष्ट्रपति की तरफ से दायर मुकदमे में लिखा गया है, जेपी मॉर्गन ने ट्रंप और उनकी कंपनियों को इसलिए बैंकिंग सिस्टम से बाहर किया क्योंकि उन्हें लगा कि उस समय का राजनीतिक रुख ऐसा करने के पक्ष में है।’ यानी ट्रंप का सीधा आरोप है कि यह फैसला व्यापारिक नहीं, बल्कि राजनीतिक बदले की भावना से लिया गया।
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बैंक ने ट्रंप के आरोप को किया खारिज
वहीं, जेपी मॉर्गन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। बैंक ने बयान में कहा, उन्हें इस मुकदमे पर अफसोस है। उन्होंने ट्रंप के खाते राजनीतिक वजह से बंद नहीं किए। यह केस बिना आधार है। बैंक के प्रवक्ता ने कहा, ‘हम किसी के खाते राजनीतिक या धार्मिक कारणों से बंद नहीं करते। हम खाते तभी बंद करते हैं जब वे कंपनी के लिए कानूनी या नियामकीय जोखिम पैदा करते हैं।’
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