जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। उत्तर भारत में अब कड़ाके की ठंड पड़ने लगी है। यूपी में सुबह सुबह अब कोहरा छाने लगा है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले कुछ दिनों लगातार कोहरा देखने को मिलेगा। वहीं, दिल्ली एनसीआर में शीतलहर चलने से ठंड परेशान कर रही है। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में शीतलहर जारी है, ठंड से बचने के लिए लोग अलाव का सहारा ले रहे हैं।
दिल्ली-यूपी समेत कई राज्यों में बारिश के आसार
दक्षिणी बंगाल की खाड़ी में चक्रवातीय संचरण और उत्तर के पहाड़ों में पश्चिमी विक्षोभ के असर से दिसंबर के अंतिम सप्ताह में देश के बड़े हिस्से का मौसम बदलने वाला है। 28-29 दिसंबर को हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान एवं गुजरात समेत उत्तर भारत में बारिश की स्थितियां बन रही हैं। मध्य प्रदेश एवं उत्तर प्रदेश का बाकी हिस्सा भी वंचित नहीं रह सकेगा।
यहां भी जहां-तहां अच्छी बारिश होगी। इससे अगले तीन-चार दिनों तक आसमान साफ रहेगा। न्यूनतम तापमान में हल्की गिरावट आएगी। क्रिसमस के माहौल में ठंड घुल सकती है। हालांकि मौसम विभाग (आइएमडी) का मानना है कि ऐसी स्थिति कुछ ही दिन तक रहेगी। लंबे वक्त तक ठंड का असर प्रचंड नहीं रह सकता है। अगले पांच-सात दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में शीत लहर की स्थिति बनी रहने की संभावना जताई है।
दरअसल उत्तर भारत में ठंड के मौसम में तापमान पश्चिमी विक्षोभ पर निर्भर करता है। इसके देर से आने के चलते पिछले वर्ष भी ठंड की शुरुआत में विलंब हुआ था। इस बार भी पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता देर से ही हुई है। नवंबर में आने वाले पश्चिमी विक्षोभ काफी कमजोर थे। हवा की गति भी धीमी रहती थी, जिससे प्रदूषण बढ़ रहा था। इस वर्ष अभी तक एक विक्षोभ ही मजबूत आया है। एक दिन पहले सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ भी काफी कमजोर है, जिसके चलते ऊंचे पहाड़ों पर ही बर्फबारी हो पाई है।
दिल्ली तक हवा का असर बहुत कमजोर है। एक अन्य विक्षोभ 26-27 दिसंबर तक आने वाला है। इसी दौरान दक्षिण-पूर्व में बंगाल की खाड़ी से अपने साथ काफी मात्रा में नमी लेकर हवाएं आने वाली हैं, जिससे पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पूर्वी राजस्थान से सटे क्षेत्र में चक्रवातीय संचरण बनेगा। इसके असर से बारिश होगी।
दरअसल उत्तर भारत में ठंड के मौसम में तापमान पश्चिमी विक्षोभ पर निर्भर करता है। इसके देर से आने के चलते पिछले वर्ष भी ठंड की शुरुआत में विलंब हुआ था। इस बार भी पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता देर से ही हुई है। नवंबर में आने वाले पश्चिमी विक्षोभ काफी कमजोर थे। हवा की गति भी धीमी रहती थी, जिससे प्रदूषण बढ़ रहा था। इस वर्ष अभी तक एक विक्षोभ ही मजबूत आया है। एक दिन पहले सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ भी काफी कमजोर है, जिसके चलते ऊंचे पहाड़ों पर ही बर्फबारी हो पाई है।