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अभिजीत दीपके को हिरासत के बाद रिहा किया गया, सीजेपी ने क्या बताया

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Oct 17, 2026


अभिजीत दीपके

इमेज कैप्शन, अभिजीत दीपके को शुक्रवार को तिरंगा मार्च से पहले हिरासत में लिया गया था (फ़ाइल फ़ोटो)

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के फ़ाउंडर अभिजीत दीपके को शनिवार को रिहा कर दिया गया. इसकी जानकारी सीजेपी की लीगल सेल की हेड रत्ना सिंह ने बताया.

बीबीसी संवाददाता जुगल पुरोहित के मुताबिक़, सीजेपी ने कहा कि रिहाई के बाद अभिजीत दीपके वहां से चले गए.

दीपके ने शुक्रवार शाम को ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च का आह्वान किया था लेकिन उन्हें मार्च से पहले ही प्रिवेंटिव डिटेंशन में ले लिया गया था.

बार एंड बेंच के मुताबिक़, एसईएम कोर्ट ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है. कोर्ट ने कुछ शर्तें भी लगाई हैं लेकिन विस्तृत जानकारी का इंतज़ार है.

वीडियो कैप्शन, अभिजीत दीपके को पुलिस ने विमान से ही हिरासत में लिया

अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को 10 अक्तूबर को भी हिरासत में लिया गया था.

तीनों मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होना चाहते थे. दिल्ली पुलिस ने विमान के उतरने के बाद उन्हें उसके अंदर से ही हिरासत में ले लिया था.

अगले दिन एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने तीनों को रिहा करने का आदेश दिया.

सौरव और आशुतोष को 50 हज़ार रुपये के मुचलके और एक साल तक शांति भंग न करने की शर्त पर छोड़ा गया था.

पुलिस ने इसी शर्त के कथित उल्लंघन को दोनों को तिहाड़ भेजे जाने का एक आधार बताया है.

सरकार और बीजेपी ने क्या कहा?

सरकार ने विपक्ष पर युवाओं का इस्तेमाल करके अराजकता फैलाने का आरोप लगाया है

इमेज कैप्शन, सरकार ने विपक्ष पर युवाओं का इस्तेमाल करके अराजकता फैलाने का आरोप लगाया है

बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन ने कहा कि विपक्ष की लड़ाई चुनाव सुधार, एसआईआर या युवाओं के भविष्य के लिए नहीं है.

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष अराजकता फैलाकर सत्ता हासिल करना चाहता है.

नितिन नबीन ने कहा, “लोकतंत्र में सत्ता तक पहुंचने का रास्ता जनादेश से होकर जाता है, अराजकता से नहीं.”

वहीं, अभिजीत दीपके ने कहा कि सत्ता में बैठे लोगों से जवाब मांगना अराजकता नहीं, बल्कि लोकतंत्र की बुनियादी अभिव्यक्ति है.

उन्होंने कहा, “कारोबार शांतिपूर्ण प्रदर्शनों से नहीं, बल्कि सरकार की ओर से शहर बंद करने, इंटरनेट रोकने और लोगों की आवाजाही पर पाबंदियां लगाने से प्रभावित होता है.”

सीजेपी का कहना है कि वह महात्मा गांधी के शांति और अहिंसा के रास्ते पर चल रही है.

तिरंगा मार्च में सुरक्षा बंदोबस्त

पुलिस का कहना था कि बिना अनुमति जमा होने वाले लोगों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी.

इमेज कैप्शन, पुलिस का कहना था कि बिना अनुमति जमा होने वाले लोगों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी

सीजेपी के कार्यक्रम को देखते हुए शुक्रवार को नई दिल्ली और उसके आसपास 25 हज़ार से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए गए थे.

कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क और राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के पास सीसीटीवी कैमरे लगाए गए.

भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत कनॉट प्लेस और आसपास के इलाक़ों में लोगों के इकट्ठा होने पर पाबंदी लगाई गई थी.

नई दिल्ली नगर पालिका परिषद ने सेंट्रल पार्क को 16 और 17 अक्तूबर के लिए बंद कर दिया.

सेंट्रल पार्क के आसपास प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के लिए बसें पहले से खड़ी की गई थीं.

पुलिस का कहना था कि बिना अनुमति जमा होने वाले लोगों के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी. प्रदर्शन के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी मैदान और सीबीडी ग्राउंड का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसके लिए भी पहले अनुमति लेनी होगी.

अभिजीत दीपके को दिए गए नोटिस में पुलिस ने कहा कि कनॉट प्लेस एक व्यस्त कारोबारी इलाक़ा है, जहां आने-जाने के रास्ते सीमित हैं.

पुलिस का कहना था कि बड़ी भीड़ जमा होने से आसपास की सड़कों पर यातायात रुक सकता है. इससे लोगों को वहां से निकालने और एंबुलेंस व दमकल की गाड़ियों के आने-जाने में भी मुश्किल हो सकती है.

नोटिस में कहा गया कि राजीव चौक मेट्रो स्टेशन से रोज़ औसतन करीब दो लाख यात्री सफ़र करते हैं.

पुलिस ने कनॉट प्लेस के व्यापारियों, कर्मचारियों और वहां आने वाले लोगों के अधिकारों का भी हवाला दिया.

हालांकि, पुलिस ने कहा था कि सीमित संख्या में लोगों को किसी उचित स्थान पर तिरंगा फहराने और राष्ट्रगान गाने की सुविधा दी जा सकती है.

सरकार उलझती दिखाई दे रही है?

शुक्रवार को दिल्ली में तिरंगा यात्रा निकालते कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ता.

इमेज कैप्शन, शुक्रवार को दिल्ली में तिरंगा यात्रा निकालते कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ता

यह पूछे जाने पर कि सरकार इस आंदोलन को क्यों नहीं दबा पा रही है या इसमें क्यों उलझती जा रही है, रशीद किदवई कहते हैं, “विडंबना देखिए, अगर कोई दिल्ली के कनॉट प्लेस में झंडा लहराने जा रहा है और पुलिस उस पर डंडे चलाए, तो क्या किसी ने सोचा था कि मोदी राज में ऐसा हो सकता है?”

“सरकार कॉकरोच जनता पार्टी के साथ सख़्ती से पेश आ रही है. जबकि राहुल गांधी जब मार्च करते हैं, तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचने दिया जाता है.”

वह कहते हैं, “महात्मा गांधी ने एक बार कहा था कि कभी-कभी हम अपने राजनीतिक विरोधियों के कारण आगे बढ़ते हैं.”

“इसलिए यह देखना होगा कि कॉकरोच जनता पार्टी के साथ सख़्ती बीजेपी की सोची-समझी राजनीति है या इसके पीछे कोई और वजह है.”

लव कुमार मिश्रा का मानना है कि भारत की राजनीतिक स्थिति बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों से अलग है और नरेंद्र मोदी सरकार काफ़ी मज़बूत है.

लेकिन उनके मुताबिक़, सरकार की सख़्ती और प्रदर्शनकारी युवाओं की आंदोलन जारी रखने की कोशिश के बीच टकराव बना रह सकता है.

वह कहते हैं, “सरकार चाहेगी कि प्रदर्शन ख़त्म हो, मगर छात्र चाहेंगे कि यह चलता रहे. सरकार को इस आंदोलन को बातचीत की मेज़ पर लाना पड़ेगा.”

पिछली कार्रवाई में क्या हुआ था?

अभिजीत दीपके

इमेज कैप्शन, 10 अक्तूबर के प्रदर्शन के दौरान अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को हिरासत में लिया गया था और फिर मुचलके पर छोड़ा गया था

पुलिस ने दावा किया कि उसकी कार्रवाई से दिल्ली में क़ानून-व्यवस्था का एक बड़ा संकट टल गया.

पुलिस के मुताबिक़, हिरासत में लिए गए आम प्रदर्शनकारियों को अस्थायी केंद्रों में रखा गया और दो से छह घंटे के भीतर छोड़ दिया गया.

पुलिस ने यह भी दावा किया कि हिरासत में लिए गए राजनीतिक नेताओं को थानाध्यक्षों के कमरों में बैठाया गया और उन्हें चाय, कॉफ़ी और खाना दिया गया.

इस कार्रवाई के दौरान दिल्ली आने-जाने वाली करीब 241 ट्रेनें रद्द की गई थीं. 45 मेट्रो स्टेशन 25 घंटे तक बंद रहे.

रायसीना हिल्स के चार किलोमीटर के दायरे में 24 घंटे तक मोबाइल इंटरनेट भी बंद रखा गया था.

पुलिस ने अपनी कार्रवाई को सही ठहराने के लिए 20 जुलाई को हुए सीजेपी के प्रदर्शन का भी हवाला दिया.

पुलिस का आरोप है कि उस प्रदर्शन में 30 हज़ार से अधिक लोग शामिल हुए थे और 240 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे.

सीजेपी ने इसके उलट पुलिस पर प्रदर्शनकारियों, ख़ासकर महिलाओं के साथ मारपीट करने का आरोप लगाया था.

बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.

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