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अमेरिका ने जब्त किया ईरान का जहाज, शांति वार्ता पर संकट और बढ़ा

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Apr 21, 2026


जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच मंगलवार से शुरू होने वाली वार्ता पर संकट के बादल गहरा गए हैं।

होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नौसेना नाकाबंदी समेत तमाम मसलों पर बने गतिरोध के चलते ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप द्वारा घोषित दूसरे दौर की शांति वार्ता में शामिल होने को लेकर चुप्पी साध ली।

रविवार देर रात अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज से गुजर रहे ईरान के एक मालवाहक जहाज को जब्त करके तनाव और बढ़ा दिया। इसके बाद ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका खुद ही शांति वार्ता को लेकर गंभीर नहीं है।

दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थ बने पाकिस्तान ने शांति वार्ता को खटाई में पड़ता देख कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने कथित रूप से ट्रंप से बात की और कहा कि ईरान के साथ शांति वार्ता में अमेरिकी नाकेबंदी रोड़ा बन रही है।

इस पर ट्रंप ने उनकी सलाह मानने की बात कही। हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से बात कर मामले को ठंडा करने का प्रयास किया।

तेल बाजार पर पड़ रहा असर

अमेरिका-ईरान में तनाव बढ़ने की आहट से वैश्विक तेल बाजार फिर गरम हो गया और तेल के दाम 95 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गए। वहीं, अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट देखी गई। 28 फरवरी के बाद से तेल के दाम 30 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं।

सीएनएन ने व्हाइट हाउस के हवाले से बताया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को पाकिस्तान के लिए रवाना होगा। वहीं, पाकिस्तान अब भी शांति वार्ता के प्रति आश्वस्त है।

गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने व्यवस्थाओं पर चर्चा करने के लिए इस्लामाबाद में ईरानी राजदूत और कार्यवाहक अमेरिकी राजदूत के साथ अलग-अलग बैठकें कीं। दो पाकिस्तानी सूत्रों ने बताया कि ईरान अब भी वार्ता में शामिल होने का इच्छुक है।

चीन से लौट रहे जहाज पर अमेरिका का कब्जा

आइएएनएस के अनुसार, अमेरिकी सेना ने रविवार को ईरान के बंदर अब्बास की ओर जा रहे एक ईरानी झंडे वाले मालवाहक जहाज पर छह घंटे की तनातनी के बाद फायरिंग कर उसके इंजन निष्क्रिय कर दिए और मरीन हेलीकॉप्टर से उतरकर जहाज पर चढ़ गए।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसका वीडियो भी जारी किया है। ईरानी सेना ने बताया गया कि ये जहाज चीन से लौट रहा था। ईरान ने इसे सशस्त्र समुद्री डकैती करार देते हुए कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी, हालांकि जहाज पर मौजूद परिवारों के कारण कार्रवाई सीमित रखने की बात कही।

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आइआरजीसी) ने दावा किया है कि ओमान सागर में अमेरिकी बलों ने एक ईरानी व्यापारी जहाज को निशाना बनाया, लेकिन उनकी नौसैनिक इकाइयों की त्वरित प्रतिक्रिया के चलते अमेरिकी बलों को पीछे हटना पड़ा।

उधर, ईरानी तेल के प्रमुख खरीदार चीन ने घटना पर चिंता जताते हुए होर्मुज में सामान्य आवाजाही बहाल करने और विवाद का कूटनीतिक समाधान निकालने की अपील की है।

ईरान का दावा, वार्ता के प्रति अमेरिका गंभीर नहीं ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री से बातचीत में कहा कि ईरानी जहाजों और बंदरगाहों को दी जा रही अमेरिकी धमकियां प्रस्तावित वार्ता के प्रति वॉशिंगटन की अगंभीरता को दर्शाती हैं।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने रॉयटर्स से कहा कि अगले दौर की वार्ता में शामिल होने की हमारी कोई योजना नहीं है। उन्होंने कहा कि जब बात देश के हितों की आती है तो हम किसी समयसीमा या चेतावनियों के दबाव में नहीं आते। तेहरान अपनी स्पष्ट मांगों से पीछे नहीं हटेगा।

बघाई ने कहा कि अमेरिका कुछ अतार्किक और अवास्तविक मांगों पर अड़ा हुआ है। हम अब भी युद्ध की स्थिति में हैं। ये सच है कि युद्धविराम घोषित है, लेकिन दुर्भाग्य से अमेरिका शुरुआत से ही इसका उल्लंघन करता आ रहा है।

एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र ने बताया कि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी और तेहरान की रक्षात्मक क्षमता, जिसमें मिसाइल कार्यक्रम भी शामिल है, वार्ता के मुद्दों में शामिल ही नहीं है।

ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने इंटरनेट मीडिया पर कहा कि होर्मुज की सुरक्षा ‘मुफ्त नहीं’ है और दुनिया को तय करना होगा कि वह सभी के लिए मुक्त तेल बाजार चाहता है या फिर बढ़ती लागत का जोखिम उठाना चाहता है।

पाकिस्तान ने नहीं छोड़ी आस

एपी के अनुसार, पाकिस्तान ने वार्ता के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस्लामाबाद पिछले 24 घंटों में वॉशिंगटन और तेहरान दोनों के संपर्क में रहा है।

दावा किया गया कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप से फोन पर बातचीत कर शांति वार्ता में आ रही बाधाओं, विशेषकर ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकाबंदी, को दूर करने के लिए कुछ सुझाव दिए।

ट्रंप ने इन सुझावों पर विचार करने की बात कही है, जिसे अमेरिका के नरम रुख के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, व्हाइट हाउस में एक प्रेस कान्फ्रेंस में इससे जुड़े एक सवाल पर ट्रंप ने कहा कि मुनीर ने उन्हें कोई सुझाव नहीं दिया।

ट्रंप बोले- ईरान को परमाणु कार्यक्रम छोड़ना ही होगा

न्यूयार्क टाइम्स के अनुसार, ट्रंप ने संकेत दिया है कि यदि पाकिस्तान में प्रस्तावित दूसरे दौर की वार्ता में कोई ठोस प्रगति होती है, तो वह ईरान के शीर्ष नेताओं से मिलने के लिए तैयार हैं। हालांकि उन्होंने दोहराया कि तेहरान को अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह छोड़ना होगा।

न्यूयार्क पोस्ट को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि शांति वार्ता को लेकर कोई भी पक्ष खेल नहीं खेल रहा है। ट्रंप ने ईरान के साथ जारी युद्ध को लेकर स्पष्ट किया है कि इसमें इजरायल की कोई भूमिका नहीं थी। उन्होंने कहा कि यह फैसला सात अक्टूबर की घटनाओं और उनके लंबे समय से बने इस रुख का परिणाम है कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं रखने दिए जा सकते।

ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर मीडिया रिपोर्टों को ‘फेक न्यूज’ बताते हुए कहा कि इजरायल ने उन्हें युद्ध में नहीं उलझाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि ईरान के नए नेता समझदारी दिखाते हैं, तो देश का भविष्य समृद्ध और बेहतर हो सकता है।

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