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असम: न ट्रेनिंग, न कोई मोटरबोट… खुद का घर डूबता छोड़ श्रवण कुमार ने बाढ़ के बीच से 2 हजार लोगों को बचाया

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Aug 3, 2026


डिजिटल डेस्क, गुवाहाटी। असम में भयानक बाढ़ के बीच एक 25 वर्षीय युवा श्रवण कुमार ने साहस और इंसानियत की अद्भुत मिसाल पेश की है। दरअसल, 10वीं की पढ़ाई छोड़ चुके श्रवण न तो कोई रेस्कूय ट्रेनिंग की है और न कोई मोटरबोट, लेकिन अपनी पारंपरिक लकड़ी की नाव (‘टुलुड़ा नाव’) और नदी में तैरेने के अनुभव के दम पर उसने 5 गांवों के करीब 2,000 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।

असम के शिवसागर जिले के नाजिरा क्षेत्र में 19 जुलाई को जब श्रवण का खुद का घर डूब रहा था, तब वह अपने घर लौटने की जगह अपने दोस्तों के साथ मिलकर गांव वालों को निकालने के लिए दिन-रात रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। इस दौरान उसके मां-भाई को सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए भागदौड़ करना पड़ा।

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(फोटो- ANI)

श्रवण और उसके साथियों ने डूबे हुए मकानों और छतों में फंसे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और मरीजों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। श्रवण और उसके साथियों ने ऐसे जलक्षेत्र में बचाव अभियान चलाया, जहां अनुभवी नाविक भी जाने से डरते थे। उस दिन सुबह 10 बजे से लेकर पूरी रात और अगली सुबह तक, टीम ने अथक परिश्रम किया।

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(फोटो- ANI)

पूरी रात अंधेरे में किया काम

श्रवण ने बताया कि यह बहुत डरावना था क्योंकि रात में हम पूरी तरह अंधेरे में काम कर रहे थे। घरों में पानी भर जाने से लोग छत के ऊपर थे और हमें उन्हें सुरक्षित निकालना पड़ा।

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टुलुड़ा नाव के सहारे श्रवण और उसके साथी एक के बाद एक गांव, एक के बाद एक घर से निकालते रहे। बचाव अभियान के समाप्त होने तक, श्रवण का अनुमान है कि उन्होंने और उनकी टीम ने पांच गांवों में लगभग 2,000 लोगों को बचाया।

मानसून में नदी के किनारे इकठ्ठे करता है लकड़ी

जानकारी के अनुसार, श्रवण हर मानसून में नदी किनारे जाकर बहकर आए पेड़ों के लट्ठे इकट्ठा करता है। यह उसके परिवार के लिए आमदनी और जलाऊ लकड़ी का एक छोटा लेकिन महत्वपूर्ण जरिया है। इस मानसून में जब वह लकड़ी बिनने गया तो विशाल पेड़ों के तने असामान्य ताकत से पानी में गिर रहे थे।

इस दौरान उसे तुरंत खतरे का आभास हो गया और सूर्योदय होते-होते उसका डर सच साबित हो गया, क्योंकि बाढ़ का पानी पूरे इलाके को डुबोने लगा था। श्रवण का खुद का घर भी बाढ़ की चपेट में आ गया, उसके मां-भाई को सामान सुरक्षित ऊंची जगह पर ले जाने के लिए भागदौड़ करनी पड़ी।

इस दौरान श्रवण परिवार के पास वापस लौटने की बजाय वहीं रुककर दूसरों की मदद करने का फैसला किया। उसने बताया कि अगर मैं अपना घर बचाने के लिए वापस चला जाता, तो दूसरों को बचाने वाला कोई नहीं बचता।

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