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अहमदाबाद में पुरुष महिलाओं के वेश में गरबा क्यों करते हैं, रोचक है इसके पीछे की कहानी

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Oct 21, 2026


महिलाओं का वेश धारण करने के बाद ये पुरुष सदुमाता के चौक में बने मंदिर के सामने इकट्ठा होते हैं और गरबा गाते हैं.

इमेज कैप्शन, महिलाओं का वेश धारण करने के बाद ये पुरुष सदुमाता के चौक में बने मंदिर के सामने इकट्ठा होते हैं और गरबा गाते हैं

अहमदाबाद के शाहपुर इलाक़े में सदुमाता की पोल नाम की एक बस्ती है. हर साल शारदीय नवरात्रि की अष्टमी की रात यहां का माहौल बिल्कुल अलग होता है.

इस रात बस्ती के पुरुष सोलह शृंगार करते हैं. वे महिलाओं की तरह पारंपरिक गुजराती साड़ी या चनिया-चोली पहनते हैं. सिर पर चुनरी ओढ़ते हैं, बालों का जूड़ा बनाते हैं, गहने पहनते हैं और आंखों में काजल लगाते हैं.

महिलाओं का वेश धारण करने के बाद ये पुरुष सदुमाता के चौक में बने मंदिर के सामने इकट्ठा होते हैं और गरबा गाते हैं.

उनकी मान्यता है कि यह गरबा मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि माफ़ी मांगने की परंपरा का हिस्सा है.

पश्चाताप ज़ाहिर करते हैं गीत

गरबा गाते हुए वे ‘सदुमाता का पवाड़ा’ भी गाते हैं.

इमेज कैप्शन, गरबा गाते हुए वे ‘सदुमाता का पवाड़ा’ भी गाते हैं

गरबा गाते हुए वे ‘सदुमाता का पवाड़ा’ भी गाते हैं. आम तौर पर ‘पवाड़ा’ छंदों और दोहों में लिखी गई ऐसी कविता होती है, जिसमें किसी की वीरता का गुणगान किया जाता है. लेकिन यहां गाया जाने वाला ‘पवाड़ा’ इस बस्ती में रहने वाले पुरुषों के पश्चाताप को ज़ाहिर करता है.

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