राज्य ब्यूरो, मुंबई। दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन ने महाराष्ट्र के मृतप्राय विपक्षी दलों को लामबंद होने का मौका उपलब्ध करा दिया है। उद्धव ठाकरे और शरद पवार जैसे नेता दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचकर छात्र आंदोलन के साथ अपनी एकजुटता प्रदर्शित कर रहे हैं, तो वंचित बहुजन आघाड़ी के नेता प्रकाश आंबेडकर ने 23 जुलाई को महाराष्ट्र बंद का आह्वान कर दिया है।
डा.भीमराव आंबेडकर के पौत्र प्रकाश आंबेडकर ने फडणवीस के नेतृत्व वाली पिछली सरकार के दौरान हुए भीमा-कोरगांव कांड के बाद महाराष्ट्र बंद का आह्वान किया था, जो काफी हद तक सफल रहा था। तब राज्य के कई हिस्सों में हिंसा भी हुई थी।
सरकारी संपत्तियों को नुकसान भी पहुंचाया गया था। उसके बाद अब छात्र आंदोलन के बहाने प्रकाश आंबेडकर अपनी बांहें चढ़ाते नजर आ रहे हैं। 23 जुलाई को महाराष्ट्र बंद के आह्वान को देखते हुए राज्य सरकार भी अपनी तैयारियां कर रही है।
प्रकाश आंबेडकर को न तो पिछले लोकसभा चुनाव में कोई सफलता मिली, ना ही विधानसभा चुनाव में। इसके बावजूद अब वह छात्र आंदोलन के सहारे अपनी ताकत दिखाने की तैयारी कर रहे हैं।
राज्य में मुख्य धारा के तीन राजनीतिक दलों कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) और राकांपा (शरदचंद्र पवार) की भी राज्य की राजनीति में हालत खराब है। शिवसेना (यूबीटी) के नौ में से छह सांसद हाल ही में टूटकर एकनाथ शिंदे के नेतृत्ववाली शिवसेना में जा चुके हैं। 20 में से 14 विधायकों के भी कभी भी टूट जाने की संभावना जताई जा रही है।
राकांपा (शरदचंद्र पवार) के भी कभी राकांपा सुनेत्रा पवार गुट में शामिल होने के कयास लगाए जाते हैं, तो कभी स्वतंत्र रूप से राजग गठबंधन में शामिल होने के। लेकिन अब दिल्ली के छात्र आंदोलन ने उक्त दोनों दलों के नेताओं को भी सक्रिय कर दिया है।
उद्धव ठाकरे जहां दिल्ली पहुंचे हैं वहीं उनके पुत्र आदित्य ठाकरे मुंबई में मोर्चा संभाल रहे हैं। उन्होंने मुंबई में प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों के खिलाफ मामले दर्ज कर हिरासत में लिए गए युवाओं से आह्वान किया है कि जिन लोगों पर भी पुलिसिया कार्रवाई हुई है, वे पार्टी द्वारा जारी मेल आईडी पर संपर्क कर सकते हैं।