आरक्षण पर उठ रही ये मांगें, कैसे जवाब देगी बीजेपी?- द लेंस
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भारत की राजनीति को आरक्षण ने लंबे समय से प्रभावित किया है. कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के बाद पिछले दिनों उसी जंतर-मंतर पर आरक्षण के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन हुए.
‘रिज़र्वेशन हटाओ आंदोलन’ के बैनर तले हो रहे इन प्रदर्शनों से आरक्षण की बहस एक बार फिर राजनीति के केंद्र में है.
लेकिन बीजेपी के लिए ये सिर्फ़ आरक्षण की नीति पर बहस नहीं है. ये उसके सामने खड़ी एक बड़ी राजनीतिक चुनौती है. इनके बीच उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अब कुछ ही महीने दूर हैं.
मौजूदा राजनीतिक संदर्भ में एक महत्वपूर्ण मांग यूजीसी के 2026 के जातिगत भेदभाव और समानता से जुड़े नियमों को वापस लेने की भी है.
ऐसे में कई सवाल हैं. बीजेपी आरक्षण को लेकर उठ रही इन नई मांगों का जवाब कैसे देगी?
क्या बीजेपी जनरल श्रेणी की चिंताओं को संबोधित करते हुए ओबीसी, एससी और एसटी समुदायों के बीच अपने समर्थन को बनाए रख पाएगी?
द लेंस के इस एपिसोड में ऐसे ही सवालों पर चर्चा हुई. इस चर्चा में कलेक्टिव न्यूज़रूम के डायरेक्टर ऑफ़ जर्नलिज़म मुकेश शर्मा के साथ शामिल हुए वरिष्ठ पत्रकार हिमांशु मिश्रा, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज़ के वाइस चांसलर प्रोफ़ेसर बद्री नारायण तिवारी और आंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में एसोसिएट प्रोफ़ेसर अदिति नारायणी पासवान.
प्रोड्यूसरः शिल्पा ठाकुर, सईदुज़्जमान
गेस्ट कोऑर्डिनेटरः संगीता यादव
वीडियो एडिटिंगः आशीष जैन
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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