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आसिम मुनीर के सामने अमेरिका का ज़िक्र करते हुए ईरान के राष्ट्रपति ने क्या कहा

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Oct 21, 2026


दिल्ली प्रदर्शन

इमेज कैप्शन, संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर कोई भी रोक क़ानून के तहत होनी चाहिए (फ़ाइल फ़ोटो: दिल्ली प्रदर्शन)

भारत में हाल के महीनों में हुए प्रदर्शनों पर पुलिस की सख़्त कार्रवाई को लेकर संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई है.

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय के अनुसार, भारतीय अधिकारियों से शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करने, उसकी रक्षा करने और मानवाधिकार उल्लंघनों के मामलों में न्याय करने की अपील की है.

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने आरोप लगाया कि भारतीय अधिकारियों को शांतिपूर्ण सभा पर अनुचित प्रतिबंध लगाने, अत्यधिक बल प्रयोग करने, मनमाने ढंग से हिरासत में लेने और स्टूडेंट्स को निशाना बनाने जैसे मामलों को लेकर पहले भी आगाह किया जा चुका है.

संयुक्त राष्ट्र की ओर से मंगलवार को जारी आधिकारिक बयान में कहा गया, “ख़बरों के मुताबिक़, मार्च में सादे कपड़ों में आए पुलिसकर्मियों ने नई दिल्ली में स्टूडेंट राइट्स और मज़दूरों के अधिकारों के लिए काम करने वाले 10 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया था. उन्हें 24 घंटे से ज़्यादा समय तक किसी से संपर्क नहीं करने दिया गया. आरोप है कि इस दौरान उनके साथ बुरा व्यवहार किया गया, उन्हें धमकाया गया, दबाव डाला गया और जबरन बयान दिलवाए गए. बाद में अदालत ने उन्हें रिहा किया.”

संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने कहा, “ये कदम भारत के अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत ज़रूरी बुनियादी दायित्वों का उल्लंघन करते हैं. इनमें शांतिपूर्ण तरीक़े से इकट्ठा होने की आज़ादी, अपनी बात कहने की आज़ादी, व्यक्तिगत स्वतंत्रता, सुरक्षा और मानवाधिकारों की रक्षा के लिए आवाज़ उठाने का अधिकार शामिल हैं.”

संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर कोई भी रोक क़ानून के तहत होनी चाहिए, उसका कोई सही उद्देश्य होना चाहिए और साथ ही उचित सीमा में भी होनी चाहिए.

“सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों. स्टूडेंट्स व दूसरे लोगों के लोकतांत्रिक अधिकार की रक्षा की जाए, ताकि वे एक जगह इकट्ठा होकर अपनी शिकायतें और नाराज़गी जाहिर कर सकें.”

संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञों ने मांग की है कि क़ानूनी एजेंसियों और उनसे जुड़ी दूसरी ताक़तों के कामकाज की स्वतंत्र, निष्पक्ष और पूरी जांच बिना किसी देरी के शुरू की जाए.

संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़, इसका मक़सद यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि ज़िम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय हो, पीड़ितों को न्याय मिले और उन्हें हुए नुकसान की भरपाई की जाए.

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