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आस्था के ‘बैंक’ में जमा गणेशजी के 1000 से ज्यादा रूप, संग्रहालय का स्वरूप देने की तैयारी

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Sep 23, 2026


जेएनएन, राजनांदगांव। देशभर से भगवान श्री गणेश की प्रतिमाओं का संग्रह करने वाले रवि खरे आज भले ही इस संसार में नहीं हैं, लेकिन उनके द्वारा जुटाई गई आस्था व संस्कृति की पूंजी राजनांदगांव की प्रमुख धरोहर बन चुकी है।

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक के कर्मचारी रहे रवि खरे ने वर्ष 2003 से 2017 के मध्य देश के भिन्न-भिन्न स्थानों में गणेशजी की 1,000 से अधिक प्रतिमाएं संग्रहित कीं।

पितृ पक्ष में शुभ कार्य नहीं करने की बात सुनकर रवि खरे ने वर्ष 2003 में इसी अवधि में गणेश प्रतिमाएं संग्रहित करने का संकल्प लिया था। अब उनके निधन के पश्चात पत्नी 60 वर्षीय साधना खरे इसे संग्रहालय का स्वरूप देने की तैयारी कर रही हैं।

गणेश प्रतिमाओं की तलाश में रवि खरे ने मुंबई के सिद्धिविनायक से लेकर चेन्नई और पुणे तक यात्राएं कीं। उनके संग्रह में हीरे को छोड़कर लगभग हर प्रमुख धातु और सामग्री से बनी गणेश प्रतिमाएं शामिल हैं।

संग्रह में नीलम, स्फटिक, तांबा, पीतल, सोना, चांदी और टेराकोटा से बनी प्रतिमाओं के साथ छत्तीसगढ़ की पहचान से जुड़ी धान से निर्मित गणेश प्रतिमा भी सम्मिलित हैं।

एक-एक प्रतिमा की अलग कहानी उनके संग्रह में सबसे छोटी करीब एक सेंटीमीटर की मूंगा-मोती से बनी प्रतिमा है, जबकि सबसे बड़ी करीब ढाई फीट ऊंची ब्लैक मेटल की प्रतिमा है।

विशेष यह है कि उन्हें अपने संग्रह की हर प्रतिमा की पहचान थी। वे न केवल उसके स्वरूप को जानते थे, अपितु उसके पीछे जुड़ी कहानी भी बताते थे। इस अनोखे संग्रह के कारण खरे परिवार के घर में वर्षभर तक गणेशजी के प्रति आस्था का वातावरण बना रहता था।

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