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विशेषज्ञों का कहना है कि जून में ओपनएआई के एक अनधिकृत एजेंट ने ऑस्ट्रेलियाई सरकार की एक वेबसाइट को हैक कर लिया था. एआई ने पर्सनल डेटा तक पहुंच हासिल कर ली थी.
ये दुनिया में अपनी तरह का पहला मामला है.
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने बुधवार को न्यूयॉर्क में कहा कि ओपनएआई एजेंट ने ऑस्ट्रेलिया की यूनिवर्सल हेल्थ सर्विस स्कीम मेडिकेयर से जुड़े “गैर-संवेदनशील” डेटा वाले एक पोर्टल में “घुसपैठ” की थी.
उन्होंने ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन के साथ डेटा लीक को सार्वजनिक करने में “बहुत अधिक देरी” करने को लेकर खुलकर चर्चा की और कहा कि इसके “कानूनी परिणाम” होंगे.
ओपनएआई ने कहा कि उसे इस सेंध की जानकारी अगस्त में तब हुई, जब वह “ग़लत दिशा में काम कर रहे मॉडल की गतिविधि” की समीक्षा कर रहा था. इसके बाद 10 सितंबर को उसने ऑस्ट्रेलियाई सरकार की एक एजेंसी के सामान्य ईमेल इनबॉक्स पर इसकी जानकारी भेजी.
पाँच दिन बाद, उस सरकारी एजेंसी सर्विसेज़ ऑस्ट्रेलिया ने इस ईमेल को ऑस्ट्रेलिया के साइबर सुरक्षा केंद्र के पास भेज दिया. इसके बाद एक सरकारी मंत्री को इसकी जानकारी दी गई और फिर प्रधानमंत्री को बताया गया.
अल्बनीज़ ने कहा कि उन्होंने ऑल्टमैन से बात की और इस घटना को लेकर ‘ऑस्ट्रेलिया की बेहद गंभीर चिंता’ और कंपनी की ओर से इस सेंध की जानकारी देने में महीनों की देरी पर अपनी ‘निराशा’ जताई. उन्होंने यह भी कहा कि जिस तरह कंपनी ने इसकी जानकारी दी, उससे भी वह निराश हैं.
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने कहा कि ऑल्टमैन ने माना है कि ओपनएआई में ‘प्रोटोकॉल से जुड़ी कुछ समस्याएं’ थीं.
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पीएम ने ‘फॉरेंसिक जाँच’ की कही बात
अल्बनीज़ ने कहा कि देश की साइबर सुरक्षा एजेंसी की अगुआई में ‘फॉरेंसिक जाँच’ की जाएगी, ताकि पता लगाया जा सके कि सरकार के दूसरे सिस्टम भी प्रभावित हुए हैं या नहीं.
उन्होंने कहा कि इस जाँच में यह भी देखा जाएगा कि क्या इस मामले को पुलिस के पास भेजने की ज़रूरत है. उन्होंने कहा कि इसमें ‘ज़ाहिर तौर पर क़ानूनी परिणाम होंगे.’
अल्बनीज़ ने सेंध के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि इसमें मेडिकेयर स्टैटिस्टिक्स रिपोर्टिंग सर्विस पोर्टल की ‘सार्वजनिक और गैर-सार्वजनिक फ़ाइलें’ शामिल थीं. इस पोर्टल पर “गैर-संवेदनशील” डेटा और आँकड़े मौजूद हैं.
सरकार के तीन अन्य सिस्टम भी ‘प्रभावित हो सकते हैं.’ इनमें ऑस्ट्रेलियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ हेल्थ एंड वेलफ़ेयर और दो राज्यों की एजेंसियाँ, न्यू साउथ वेल्स ब्यूरो ऑफ़ क्राइम स्टैटिस्टिक्स एंड रिसर्च और विक्टोरिया का स्वास्थ्य विभाग शामिल हैं.
अल्बनीज़ ने कहा, “इस समय ऐसा नहीं माना जा रहा है कि किसी की निजी जानकारी तक पहुँच बनाई गई है, लेकिन जाँच जारी है.”
उन्होंने कहा, “इसके बावजूद यह स्थिति साफ़ तौर पर नामंज़ूर है.”
ओपनएआई ने सफ़ाई में क्या कहा?
ओपनएआई ने एक बयान में कहा कि उसने “ऑस्ट्रेलिया के बारे में सवालों के जवाब और उपलब्ध आँकड़े तलाशने के दौरान हमारे मॉडल्स की ओर से ऑस्ट्रेलियाई सरकार की कई वेबसाइटों और सेवाओं से जुड़ी गतिविधियों की पहचान की. यह एक आंतरिक मूल्यांकन के दौरान हुआ.”
बयान में कहा गया, “इस दौरान हमारे मॉडल्स ने ऐसे काम किए, जिनका हमने इरादा नहीं किया था.”
अल्बनीज़ ने इस सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया कि क्या उन्होंने मंगलवार रात न्यूयॉर्क में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ आमने-सामने हुई मुलाक़ात में यह मामला उठाया था. दुनिया के नेता संयुक्त राष्ट्र महासभा के लिए न्यूयॉर्क में जुटे हैं.
ऑस्ट्रेलिया उन 22 देशों में शामिल था, जिन्होंने इस सप्ताह की शुरुआत में एआई के विकास की वैश्विक निगरानी और सुरक्षा उपायों की माँग करने वाले एक संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर किए थे.
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने बीबीसी से कहा कि यह घटना नियामकों के लिए एक चेतावनी है, क्योंकि एआई एजेंट अब व्यक्तिगत और व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए ज़्यादा आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं.
न्यू साउथ वेल्स यूनिवर्सिटी के इंस्टीट्यूट फ़ॉर साइबर सिक्योरिटी के वरिष्ठ लेक्चरर डॉ. हैमंड पियर्स ने बीबीसी से कहा कि यह पहला ज्ञात मामला है, जिसमें एआई एजेंट्स ने अपनी मर्ज़ी से किसी सरकारी संस्था में सेंध लगाने का फ़ैसला किया, लेकिन ऐसे और मामले सामने आएंगे.
उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद है कि इस तरह के हमले होते रहेंगे.” उन्होंने कहा कि इन हमलों की “गंभीरता और संख्या, दोनों बढ़ने की संभावना है.”
उन्होंने कहा, “मैं उम्मीद करता हूँ कि इस घटना से दुनिया भर की सरकारों के लिए ख़तरे की घंटियाँ बजनी शुरू होंगी.”
एआई को लेकर कैसी है बहस?
इस साल की शुरुआत में ओपनएआई ने बताया था कि जिन एआई एजेंट्स का वह परीक्षण कर रहा था, उनमें से एक समूह अपने नियंत्रण से बाहर निकल गया था और उसने गुप्त रूप से मिलकर हगिंग फ़ेस नाम की एक दूसरी टेक कंपनी को हैक करने की कोशिश की थी.
इस साल एआई से जुड़ी ऐसी कई दूसरी घटनाएँ भी सामने आई हैं. इनमें एक मामला भी शामिल है, जिसमें एक डिजिटल असिस्टेंट ने बिना किसी निर्देश के किसी व्यक्ति को पिलाटे क्लास की वेटिंग लिस्ट से हटा दिया, ताकि एक ऑस्ट्रेलियाई व्यक्ति को उस क्लास में जगह मिल सके.
ऑल्टमैन, एंथ्रोपिक के डारियो अमोदेई और एलन मस्क समेत एआई कंपनियों के कई प्रमुख लोगों ने ख़ुद कहा है कि एआई जिस तेज़ी से विकसित हो रहा है, वह मानवता के लिए ख़तरनाक है और इसकी रफ़्तार को नियंत्रित करने की ज़रूरत है.
लेकिन एआई में वर्चस्व हासिल करने की होड़ में लगे अमेरिका और चीन इसके रास्ते में बड़ी रुकावट हैं. दोनों देश ज़्यादा नियमन के पक्ष में नहीं हैं. वे एआई से होने वाले आर्थिक और तकनीकी फ़ायदों को हासिल करना चाहते हैं और सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को कम करके देखते रहे हैं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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