जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कर्नाटक की डीके शिवकुमार की नई सरकार में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्दरमैया के बेटे यतींद्र सिद्दरमैया को शामिल कर कांग्रेस हाईकमान ने उनसे किए दूसरे वादे को भी पूरा कर दिया।
राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की राह आसान करने की कसरत में शीर्ष नेतृत्व ने मुख्यमंत्री शिवकुमार के बुधवार को हुए शपथ से पूर्व मंगलवार रात ही सिद्दरमैया को पार्टी की सर्वोच्च नीति निर्धारण इकाई कांग्रेस कार्यसमिति में शामिल किए जाने की घोषणा कर दी थी।
इन दोनों फैसलों से साफ है कि कांग्रेस नेतृत्व का सिद्दरमैया को राष्ट्रीय राजनीति में लाने का इरादा है और ऐसे में राज्यसभा चुनाव की उम्मीदवारी के लिए उनको राजी करना ही अब बाकी रह गया है।
सिद्दरमैया को राष्ट्रीय राजनीति में लाने के प्रयासों के तहत ही डीके शिवकुमार की नई सरकार में बेटे ही नहीं उनके समर्थकों को भी तवज्जो दी गई है। कर्नाटक समेत अन्य राज्यों के राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों का फैसला कांग्रेस नेतृत्व द्वारा इसी हफ्ते लिया जाना है।
दरअसल हाईकमान डीके शिवकुमार के बतौर मुख्यमंत्री बचे दो साल के कार्यकाल के दौरान कोई अंदरूनी दूसरा सत्ता केंद्र नहीं बनने देना चाहता ताकि कर्नाटक के 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव में दुबारा वापसी में कोई अड़चन न आए। लोकसभा के अगले आम चुनाव में भी कांग्रेस की राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से कर्नाटक में पार्टी की मजबूत सियासी पैठ कायम रहना बेहद अहम है।
इसके मद्देनजर ही शिवकुमार सरकार में शामिल किए गए 13 मंत्रियों के पहले बैच में राज्य के सभी क्षेत्रों और प्रमुख सामाजिक समीकरण का ध्यान रखा गया है। सियासी चर्चाओं के उलट केवल एक डिप्टी सीएम ही बनाया गया है और वह हैं दलित समुदाय के सूबे के बड़े नेता जी परमेश्वरन। प्रियांक खरगे भी राज्य में दलित वर्ग के उभरते नेता हैं।
मुख्यमंत्री शिवकुमार जहां खुद राज्य के वोक्कालिंगा समुदाय के सबसे बड़े चेहरे बन गए हैं तो सबसे प्रभावशाली लिंगायत समुदाय के प्रमुख नेताओं एमबी पाटिल, शरण पाटिल और ईश्वर खंडरे को मंत्री बनाया गया है। कुरूबा समुदाय के सिद्दरमैया का अहिंदा समीकरण न बिगड़े इसलिए यतींद्र कैबिनेट में शामिल किए गए हैं।
आदिवासी समुदाय के सबसे मुखर नेता सतीश जारकीहोली मुस्लिम वर्ग के यूटी खादर और ईसाई समुदाय से केजे जॉर्ज को मंत्रिमंडल में शामिल कर सामाजिक और राजनीतिक संतुलन साधने की कोशिश की गई है। इस छोटी कैबिनेट में भी शिवकुमार ने सूबे के क्षेत्रीय संतुलन को बनाए रखने का संदेश देने के लिए उत्तरी कर्नाटक ही नहीं बेंगलुरु और पुराने मैसूर क्षेत्रों के प्रमुख नेताओं को भागीदारी सुनिश्चित की है।
शिवकुमार सरकार के 13 मंत्रियों की पहली कैबिनेट में कोई महिला चेहरा नहीं है मगर राज्यसभा चुनाव के बाद होने वाले विस्तार में कुछ महिलाओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा।