जेएनएन, नई दिल्ली। बंगाल समेत पांच राज्यों व केंद्र शासित प्रदेश के विधानसभा चुनावों की मतगणना के लिए अनधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश को पूरी तरह से रोकने के उद्देश्य से चुनाव आयोग ने पहली बार क्यूआर कोड आधारित फोटो पहचान पत्र प्रणाली शुरू की है।
आयोग का कहना है कि यह प्रणाली 4 मई को लागू होगी, जब पांच विधानसभा चुनावों के लिए मतों की गणना की जाएगी और भविष्य में सभी लोकसभा, विधानसभा और उपचुनावों में मानक प्रथा के रूप में लागू होगी।
तीन-स्तरीय सुरक्षा तंत्र निर्धारित
बंगाल, असम, केरलम, तमिलनाडु और पुडुचेरी में मतगणना केंद्रों पर पहचान सत्यापन के लिए तीन-स्तरीय सुरक्षा तंत्र निर्धारित किया गया है।
पहले और दूसरे स्तर पर संबंधित रिटर्निंग अधिकारियों द्वारा जारी फोटो पहचान पत्रों की मैन्युअल जांच की जाएगी।
तीसरे और सबसे भीतरी सुरक्षा घेरे में मतगणना हाल के निकट, क्यूआर कोड स्कैनिंग के माध्यम से सफल सत्यापन के बाद ही प्रवेश की अनुमति दी जाएगी।
नए क्यूआर कोड आधारित कार्ड उन व्यक्तियों के लिए लागू होंगे जिन्हें चुनाव आयोग ने मतगणना केंद्रों और हाल में प्रवेश के लिए अधिकृत किया है, जिसमें रिटर्निंग अधिकारी, सहायक रिटर्निंग अधिकारी, मतगणना कर्मचारी, तकनीकी कर्मी, उम्मीदवार, चुनाव एजेंट और मतगणना एजेंट शामिल हैं।
स्ट्रॉन्ग रूमों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
राज्य ब्यूरो के अनुसार, बंगाल में दूसरे व अंतिम चरण का मतदान बुधवार को संपन्न होने के बाद अब चुनाव आयोग की ओर से राज्यभर में स्ट्रॉन्ग रूमों के पुख्ता सुरक्षा प्रबंध से लेकर मतगणना केंद्रों पर जरूरी इंतजाम युद्धस्तर पर किए जा रहे हैं।
बंगाल में इस बार मतगणना केंद्रों की संख्या घटाकर 87 कर दी गई है। 2021 के चुनाव में यह संख्या 108 थी। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि मतगणना में पारदर्शिता, निष्पक्षता व सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखकर यह निर्णय लिया गया है।
मीडिया के लिए भी प्रबंध
चुनाव आयोग ने यह स्पष्ट किया कि मीडिया कर्मियों का प्रवेश आयोग द्वारा जारी प्राधिकरण पत्रों के आधार पर जारी रहेगा, जो आयोग के मौजूदा निर्देशों के अनुसार है। बयान में कहा गया है कि मतगणना की मीडिया कवरेज को सुविधाजनक बनाने के लिए प्रत्येक मतगणना केंद्र में गणना हाल के निकट एक मीडिया केंद्र स्थापित किया जाएगा।