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‘कुछ देश राजनीतिक हिसाब-किताब करते हैं’, अमेरिका के पाकिस्तान से संबंध बनाए रखने की बात पर जयशंकर का तंज

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Oct 25, 2026


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कुछ दिन पहले पाकिस्तान के साथ रिश्ते बनाए रखने की बात कही थी। रुबियो के इस बयान पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने तंज कसा है।

एस. जयशंकर ने आज रविवार को कहा कि आतंकवाद का इस्तेमाल राज्य-नीति के एक साधन के रूप में करना अस्वीकार्य है और इसे कभी भी सही नहीं ठहराया जा सकता।

आतंकवाद पर एस. जयशंकर की चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र दिवस के अवसर पर ‘चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन’ में बोलते हुए जयशंकर ने कहा, ‘आतंकवाद शांति के लिए एक और घातक खतरा है। इसे कभी भी सही नहीं ठहराया जा सकता, न ही इसके लिए कोई तर्क दिया जा सकता है। फिर भी, यह जारी है क्योंकि सभी देश वास्तव में ‘जीरो टॉलरेंस’ नहीं दिखाते हैं।’

जयशंकर ने वैसे तो किसी देश का नाम नहीं लिया, लेकिन स्पष्ट रूप से उनका निशाना पाकिस्तान की तरफ था।

विदेश मंत्री ने आगे कहा, ‘इतिहास से इतने सबक मिलने के बावजूद, कुछ देश अभी भी राजनीतिक हिसाब-किताब को अहमियत देते हैं।’

एस. जयशंकर ने आगे कहा, ‘दुनिया को इस साझा खतरे के प्रति अधिक जागरूक होने की जरूरत है। सभी देशों को मजबूत संकल्प के साथ एकजुट होकर आतंकवाद के हर रूप और प्रकार का मुकाबला करना चाहिए।’

मार्को रुबियो ने पाकिस्तान से रिश्ते पर क्या कहा?

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कुछ दिन पहले पाकिस्तान के साथ वाशिंगटन के संबंधों का बचाव करते हुए कहा कि अमेरिका को उन देशों के साथ भी रिश्ते बनाए रखने की जरूरत है, जिनके साथ उसके मतभेद हैं।

एक टीवी चैनल से बात करते हुए रुबियो ने कहा, ‘पाकिस्तान एक ऐसा देश है जिसके साथ हमें रिश्ते रखने होंगे, क्योंकि उसके पास परमाणु हथियार हैं। भौगोलिक दृष्टि से भी, हमें उनके साथ बातचीत करने की जरूरत है। ठीक उसी तरह, जैसे भारत सरकार ईरान के साथ संबंध रखती है और वहां के नेताओं से मिलती-जुलती है।’

रुबियो ने आगे कहा, ‘यह एक सकारात्मक बात हो सकती है, क्योंकि अगर हम उनसे बात कर सकते हैं, तो शायद हम ऐसी स्थिति में आ सकते हैं जहां हम उन चीजों को रोकने में मदद कर सकें, जिन्हें लेकर भारत चिंतित है।’

रुबियो ने व्यवसायों से यह भी आग्रह किया कि वे भारत-अमेरिका संबंधों को तकनीक, व्यापार और सुरक्षा से जुड़ी एक रणनीतिक साझेदारी के रूप में देखें। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी को आकार देने वाले मुद्दों पर दोनों देश पूरी तरह से एकमत हैं। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि कुछ मतभेद बने रह सकते हैं।

‘कहीं भी युद्ध होना, हर जगह शांति के लिए खतरा’

विदेश मंत्री ने शांति के महत्व पर जोर दिया, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया के विभिन्न हिस्सों में संघर्ष जारी है। उन्होंने आगाह किया कि कहीं भी युद्ध होना, हर जगह शांति के लिए खतरा है।

जयशंकर ने दुनिया में जारी दो बड़े संघर्षों-यूक्रेन और पश्चिम एशिया का जिक्र करते हुए कहा कि दूर-दराज के समाजों, अर्थव्यवस्थाओं और ऐसे लोगों को इसकी कीमत चुकानी पड़ रही है, जिनका इन मामलों से बहुत कम लेना-देना है। भारत शांति स्थापना का प्रयास कर रहा है और इस दिशा में अन्य साझेदारों के साथ काम करने के लिए तैयार है।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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