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कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के फ़ाउंडर अभिजीत दीपके के बीते शनिवार को दिल्ली के जंतर-मंतर पर अपने समर्थकों के साथ प्रदर्शन किया.
इस प्रदर्शन में ज़्यादातर युवा शामिल थे और वे केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग कर रहे थे.
युवा पीढ़ी के इस प्रदर्शन को दुनिया के अन्य देशों की मीडिया ने कवर किया है और इसे ‘जेन ज़ी का प्रदर्शन’ बताया.
इस प्रदर्शन में जाने माने पर्यावरणविद़ सोनम वांगचुक भी शामिल हुए जिन्हें बीते मार्च में छह महीने जेल में रहने के बाद रिहा किया गया था. उन पर एनएसए के तहत मामला दर्ज किया गया था.
शनिवार की सुबह अभिजीत दीपके अमेरिका से दिल्ली लौटे.
दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरते ही उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफ़ा देने की मांग की.
अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इस प्रदर्शन को प्रमुखता से जगह मिली.
‘भारत के युवा तंग’
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अमेरिकी मीडिया सीएनएन ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आंदोलन पर लिखा, “भारत के युवा अब तंग आ चुके हैं. सालों से चल रहे परीक्षा घोटालों, लगातार बनी हुई बड़ी बेरोज़गारी और अवसरों की कमी के कारण, लोगों की निराशा अब ऑनलाइन और सड़कों पर खुले ग़ुस्से में बदल रही है.”
सीएनएन के मुताबिक़, “जवाबदेही की ऐसी मांग उठ रही है, जिसे कई लोग अब नज़रअंदाज़ नहीं कर सकते.”
इस ख़बर में लिखा है, “कॉकरोच जनता पार्टी, भारत के चीफ़ जस्टिस सूर्यकांत की एक टिप्पणी की वजह से बनी है. आम तौर पर माना गया कि उन्होंने देश के बेरोज़गार युवाओं को ‘कॉकरोच’ कहा. बहुत से लोगों ने इस बात पर नाराज़गी जताई.”
हालाँकि बाद में चीफ़ जस्टिस ने स्पष्ट किया कि वह उन लोगों के बारे में बात कर रहे थे जिन्होंने पेशे में आने के लिए फ़र्ज़ी डिग्रियों का इस्तेमाल किया.
फ्रांस 24 ने भी कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को जगह दी है. उसने अपनी एक स्टोरी में लिखा है, “भारत की जेन ज़ी ‘कॉकरोच’ पार्टी के समर्थकों ने नई दिल्ली में अपना पहला विरोध प्रदर्शन किया.”
इसमें लिखा गया है, “(सीजेपी के) समर्थकों ने ‘कॉकरोच आ रहे हैं, धर्मेंद्र प्रधान जा रहे हैं’ जैसे नारे लगाए, और प्रदर्शन के दौरान एक पोस्टर पर लिखा था कि ऐसे एग्ज़ाम का इंतज़ार है जो लीक न हो.”
इसमें सीजेपी की चुनौतियों पर भी चर्चा की गई है और लिखा गया है, “(सीजेपी के लिए) एक और बड़ी चुनौती यह होगी कि वह उस विरोध का सामना कैसे करती है, जिसका सामना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के दौरान पहले के विरोध आंदोलनों को करना पड़ा है.”
खाड़ी और दक्षिण एशिया की मीडिया में चर्चा
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खाड़ी देश क़तर की मीडिया अल जज़ीरा ने लिखा , ‘आई एम कॉकरोच: भारत की राजधानी में पहुंचा जेन ज़ी का विरोध प्रदर्शन.’
अल जज़ीरा ने ख़बर दी है, “भारत के जेन ज़ी ‘कॉकरोच मूवमेंट’ ने राजधानी में अपना पहला विरोध प्रदर्शन किया है और शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े की मांग की है. 1.4 अरब आबादी वाले देश भारत की आधी आबादी 25 साल से कम के युवाओं की है और उनमें काफ़ी समय से ग़ुस्सा पनप रहा था.”
“पेपर लीक और देश के सबसे बड़े स्कूल बोर्ड (सीबीएसई) में गड़बड़ियों ने इस गुस्से को और बढ़ा दिया.”
अल जज़ीरा लिखता है, “यह ग़ुस्सा एक व्यंग्यात्मक राजनीतिक पार्टी, तथाकथित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (सीजेपी) के रूप में अचानक बाहर आया. यह पार्टी व्यंगात्मक अभियान के ज़रिये बनी थी.”
“पिछले महीने भारत के मुख्य न्यायाधीश ने युवाओं की तुलना कॉकरोच से की थी, जिससे बहुत ज़्यादा नाराज़गी फैली. इसके जवाब में, बोस्टन यूनिवर्सिटी से हाल ही में ग्रेजुएट हुए अभिजीत दीपके ने उस समय सोशल मीडिया एक्स पर सोचा कि क्या होगा अगर सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएं?”
ख़बर में आगे लिखा है, “यह बात भारतीय इंटरनेट पर छा गई और सीजेपी की शुरुआत का रास्ता बनी. यह नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बीजेपी के नाम पर एक मज़ाकिया तंज़ था. दीपके के इस हल्के-फुल्के मज़ाक ने इंस्टाग्राम पर 22 मिलियन से ज़्यादा फ़ॉलोअर्स जुटा लिए – जो मोदी की पार्टी के फ़ॉलोअर्स से दोगुने थे.”
अरब के एक अन्य मीडिया पोर्टल अल अरबिया ने लिखा, “आंदोलन को लेकर संदेह रखने वाले लोग, खासकर मोदी की पार्टी के समर्थक, इसे महज सोशल मीडिया का एक दिखावा मानते हैं.”
“उनका कहना है कि ऑनलाइन लोकप्रियता का मतलब यह नहीं है कि आंदोलन को ज़मीनी स्तर पर भी उतना ही समर्थन मिलेगा. उनका यह भी मानना है कि इसकी तेज़ी से बढ़ी लोकप्रियता लंबे समय तक टिकने वाली नहीं है.”
द डॉन अख़बार ने इस प्रदर्शन की फ़ोटो गैलरी प्रकाशित की और इसे वायरल कॉकरोच पार्टी नाम दिया.
इसने लिखा, “राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि प्रमुख राज्यों के हालिया चुनावों में उनकी पार्टी की जीत के बावजूद इस समूह की लोकप्रियता ने प्रधानमंत्री मोदी की छवि पर असर डालना शुरू कर दिया है. वहीं, ईरान युद्ध के कारण बढ़ती ईंधन कीमतों और गैस की कमी को लेकर लोगों में असंतोष भी बढ़ रहा है.”
ज़मीनी समर्थन को लेकर सवाल
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जर्मन मीडिया डीडब्लू ने लिखा, “दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की भारी भीड़ जमा हुई. यहाँ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम के एक व्यंग्यात्मक संगठन ने विरोध प्रदर्शन किया और हाल की परीक्षाओं में गड़बड़ी के आरोपों के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग की.”
प्रदर्शनकारी कॉकरोच के मास्क पहने हुए और जवाबदेही की मांग करने वाले पर्चे लिए हुए थे. उन्होंने सरकार को पूरे देश में विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी भी दी.
डीडब्लू ने लिखा है, भारतीय मीडिया ने नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) को लेकर हुई गड़बड़ी की ख़बरें दी हैं. नीट देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक है, जो मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए ज़रूरी है.”
ब्रिटिश अख़बार द संडे गार्डियन ने लिखा, “ऑनलाइन 2.2 करोड़ से ज़्यादा फ़ॉलोअर्स होने का दावा करने के बावजूद, जंतर-मंतर पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के पहले बड़े विरोध प्रदर्शन में महज़ क़रीब दो हज़ार लोग ही शामिल हुए, जिससे डिज़िटल लोकप्रियता और असल दुनिया में लोगों को एकजुट करने की क्षमता के बीच का फ़र्क साफ़ पता चलता है.”
अख़बार ने लिखा है, “कॉकरोच जनता पार्टी ने सोशल मीडिया पर बीजेपी को पीछे छोड़ते हुए सिर्फ़ चार दिनों में बड़ी ऑनलाइन फ़ैन फ़ॉलोइंग बना ली. सीजेपी के इंस्टाग्राम अकाउंट पर सिर्फ़ पाँच दिनों में 2 करोड़ से ज़्यादा फ़ॉलोअर्स हो गए…लेकिन ज़मीनी स्तर पर, विरोध प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक़ नहीं रहा.”
शनिवार को हुए प्रदर्शन के बाद सीजेपी की ओर से चेतावनी दी गई है कि अगर सात दिन के अंदर शिक्षा मंत्री का इस्तीफ़ा नहीं होता है तो वो फिर प्रदर्शन करेगी.
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन के बाद एक्स पर लिखा, “आज का प्रदर्शन तो सिर्फ़ एक ट्रेलर था.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.