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क्या AI करेगा जजों की रिप्लेस? कोर्टरूम में आर्टीफिशल इंटेलीजेंस के इस्तेमाल का मसौदा तैयार

Byadmin

Jun 4, 2026


जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। अदालतों में एआई के औपचारिक इस्तेमाल की ओर कदम बढ़ाया गया है। अदालतों में एआई का कैसे इस्तेमाल होगा उसके क्या नियम होंगे। क्या सुरक्षा उपाय और एहतियात बरते जाएंगे इस सबका खाका तैयार हो गया है।

सुप्रीम कोर्ट ने रेगुलेशन्स फार यूज ऑफ एआई इन कोर्ट 2026 का ड्राफ्ट जारी कर सभी हितधारकों और आमजनता से सुझाव आमंत्रित किये हैं। जारी मसौदे में अदालतों में एआई के इस्तेमाल के रेगुलेशन का उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया में मानवीय प्रधानता, जवाबदेही, डेटा सुरक्षा, और न्यायिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों पर आधारित है।

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कोर्ट में AI एक इस्तेमाल का मसौदा तैयार

अदालतों में एआई के इस्तेमाल के लिए जो ड्राफ्ट रेगुलेशन जारी किये गए हैं उनमें कहा गया है कि आर्टीफिशल इंटेलीजेंस का प्रयोग हर समय इंसानी निणर्य और न्यायिक अधिकार के अधीन रहेगा।

प्रत्येक एआई प्रणाली केवल एक सहायक की हैसियत से काम करेगी और किसी विधिवत नियुक्त न्यायिक अधिकारी यानी जज की जगह नहीं लेगी।

कानून, तथ्यों और न्याय से संबंधित मामलों का निर्धारण करने का अंतिम अधिकार केवल न्यायाधीशों के पास होगा। कोई भी एआई सिस्टम किसी भी मामले में, मानवीय हस्तक्षेप के बिना , निर्णय देने, सजा सुनाने का काम नहीं करेगा।

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क्या कहता है नियम?

नियम यह भी कहते हैं कि एआई द्वारा तैयार किया गया कोई भी आउटपुट , उसके एआई जेनरेटेड प्रकृति के पूर्ण पारदर्शी खुलासे के बिना, किसी अदालत में साक्ष्य या स्वतंत्र सोर्स के रूप में पेश नहीं किया जाएगा। यानी इससे साफ है कि वकील दलीलें और साक्ष्य तैयार करने में एआई का उपयोग कर सकते हैं लेकिन उन्हें ऐसा करने पर अदालत को सूचित करना होगा।

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कहा गया है कि अदालती प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाला हर एआई सिस्टम पारदर्शिता और स्पष्टता के ऊंचे मानकों को पूरा करेगा। किसी भी अदालती प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाला एआई सिस्टम के काम करने के तरीके, डेटा इनपुट और फैसले के तर्क को समझा जा सकेगा और जहां जरूरी होगा, उसे न्यायिक अधिकारियों, संबंधित पक्षों और आम लोगों को समझाया जा सकेगा।

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कैसे होगा AI का प्रयोग?

ऐसे एआई सिस्टम का इस्तेमाल, जो अस्पष्ट हो या जिन्हें समझाया न जा सके, कड़ी जांच के दायरे में होगा और उन ज्यादा जोखिम वाली जगहों पर उनके इस्तेमाल पर रोक होगी, जहां वे किसी की व्यक्तिगत स्वतंत्रता या किसी कानूनी अधिकार पर असर डालते हों।

नियमों में जवाबदेही के बारे में कहा गया है कि एआई की सहायता से किसी भी अधिकारी द्वारा लिए गए सभी निर्णयों की जवाबदेही पूरी तरह से उसी अधिकारी पर होगी, और किसी स्पष्ट रूप से गलत, गैर-कानूनी या हानिकारक निर्णय के लिए जवाबदेही से बचने के आधार के रूप में, किसी एआई सिस्टम के आउटपुट, किसी ‘ब्लैक बॉक्स’ सिस्टम की अस्पष्टता, या ‘हैलुसिनेशन’ (भ्रम) की घटना का हवाला देना स्वीकार्य नहीं होगा।

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नियम के उल्लंघन पर नियम

समुचित प्राधिकारी यह सुनिश्चित करेगा कि किसी अदालत में प्रत्येक एआई प्रणाली या एआई उपकरण के संचालन के लिए जवाबदेही की स्पष्ट और दस्तावेजी नियम स्थापित किये जाएं। सुप्रीम कोर्ट की एआई कमेटी के तत्वाधान में ये निमय ड्राफ्ट हुए हैं।

कहा गया है कि किसी भी नियम के उल्लंघन की सूचना तत्काल एआई सचिवालय को दी जाएगी, जिसे एआई समिति के समक्ष रखा जाएगा, और एआई समिति जांच के बाद, ऐसे सुधारात्मक उपायों का निर्देश देगी, जिसमें अगर वो उचित समझे तो संबंधित एआई प्रणाली का निलंबन भी शामिल है।

अदालतों में एआई के इस्तेमाल के नियमों पर सुप्रीम कोर्ट के वकील और साइबर कानून विशेषज्ञ विराग गुप्ता कहते हैं कि एआई के संस्थागत इस्तेमाल के लिए सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के नियमों में बदलाव हो। संवेदनशील निजी और न्यायिक डाटा की सुरक्षा के लिए संसद से 2023 के पारित डीपीडीपी कानून को लागू किया जाए।

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