• Sun. Jun 21st, 2026

24×7 Live News

Apdin News

खूब फल फूल रहा है फूड डिहाइड्रेट बिजनेस, विदेशों में डॉर्म तक कैसे पहुंची NASA खिचड़ी?

Byadmin

Jun 21, 2026


डिजिटल डेस्क, मुंबई। जब श्रेया शाह ने मुंबई के सोफिया कॉलेज से माइक्रोबायोलॉजी में बीएससी की पढ़ाई पूरी की तो उन्होंने शायद ही सोचा होगा कि बैक्टीरिया की ग्रोथ और माइक्रोबियल अरेस्ट (सूक्ष्मजीवों की वृद्धि रोकने) के बारे में उनकी सीख एक कामयाब बिजनेस की नींव बनेगी।

आज, शाह अपना दिन एक ऐसे काम में बिताती हैं जिससे उनके प्रोफेसर और भारतीय माताएं खुश होंगी। वह खाने को डिहाइड्रेट (सुखाकर पानी निकालना) करती हैं। शाह उन प्रोफेशनल फूड डिहाइड्रेटर्स के बढ़ते कॉटेज इंडस्ट्री का हिस्सा हैं जो विदेश में पढ़ रहे और काम कर रहे भारतीयों की जरूरतों को पूरा करते हैं, वे भारतीय जो घर के बने खाने को याद करते हैं।

नासा की फ्रीज-ड्राइंग तकनीक

अब नासा द्वारा विकसित ‘फीज-ड्राइंग’ की महंगी तकनीक भी उपलब्ध है। ये प्रोफेशनल दाल, करी, खिचड़ी, मखनी और अन्य पसंदीदा व्यंजनों को कुरकुरे, सूखे रूप में बदल रहे हैं।

वैक्यूम-सील्ड होने के कारण ये पैकेट आसानी से ले जाए जा सकते हैं, कस्टम्स से आसानी से निकल जाते हैं और बस एक कप उबलते गर्म पानी से ‘मां के घी-युक्त प्यार’ के रूप में फिर से तैयार हो जाते हैं।

खूब बढ़ा रहा बिजनेस

दुनिया भर के कॉलेज कैंपस में भारतीय छात्रों की बढ़ती संख्या के साथ-साथ खाने को डिहाइड्रेट (पानी सुखाना) और फ्रीज-ड्राई करने का बिजनेस भी तेजी से बढ़ा है सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, इनकी संख्या 14 लाख है और यह लगातार बढ़ रही है।

खबरें और भी

अपने बच्चों के बिना अंडे वाला खाना खाने की आदत छूटने की चिंता में परेशान मांएं अब मुंबई, अहमदाबाद, सोनीपत और दिल्ली जैसी जगहों पर खुली इन छोटी-छोटी फैक्टरियों में खाना भेजती हैं। घर के खाने की कमी पूरी करने के लिए कंपनियां अपने ब्रांड के तहत ‘घर जैसा’ और ‘मम्मी वाला खाना’ पैक करके बेचती हैं।

श्रेया शाह बताती हैं, “नमी की वजह से ही माइक्रोबियल ग्रोथ होती है जिससे खाना खराब होता है, इसलिए जब हम नमी निकाल देते हैं तो खाना बिना प्रिजर्वेटिव के एक साल या उससे ज्यादा समय तक चल सकता है।” खाने में मौजूद पानी की मात्रा के आधार पर उसे डिहाइड्रेट करने के लिए उन्हें कम से कम 12 घंटे चाहिए होते हैं।

नवी मुंबई की रहने वाली पारुल पटेल बताती हैं कि वह नियमित रूप से अपने बेटे को खाना भेजती हैं। उनका बेटा अमेरिका के साउथ कैरोलिना के एक ग्रामीण रिपब्लिकन शहर में मेडिकल रेसीडेंसी कर रहा है, जहां ज्यादातर लोगों ने कभी थाई करी तो क्या भारतीय खाना भी नहीं चखा है।

कुछ सब्जियों को डिहाइड्रेट करने पर वे अच्छी नहीं बनतीं। जैसे, आलू को लेकर मिली-जुली राय है। कई लोगों को लगता है कि दोबारा पानी सोखने के बाद उनका टेक्सचर वैसा नहीं रहता। पनीर के क्यूब्स चबाने में मुश्किल या खुरदरे हो जाते हैं, लेकिन कद्दूकस किया हुआ पनीर अच्छा लगता है। पाव भाजी, सभी तरह की दालें और सांभर तो हमेशा पसंद किए जाते हैं।

डिहाइड्रेशन के मुकाबले फ्रीज-ड्राइंग बेहतर

हाल ही में पटेल ने कुछ रिसर्च की और पाया कि स्वाद, टेक्सचर और न्यूट्रिशन के मामले में डिहाइड्रेशन के मुकाबले फ्रीज-ड्राइंग बेहतर है। आम के गूदे में पानी, चीनी और उड़नशील कंपाउंड होते हैं इसलिए डिहाइड्रेशन से यह चमड़े जैसी शीट में बदल जाता है, जबकि फ्रीज-ड्राइंग से अल्फोंसो आम की जादुई खुशबू बनी रहती है और इसे फिर से ताजे आमरस जैसा बनाया जा सकता है।

डिहाइड्रेशन की तुलना में फ्रीज-ड्राइंग महंगी है, लेकिन इससे स्वाद और ज्यादा पोषक तत्व बने रहते हैं। दोनों तरीकों से खाने से पानी निकाला जाता है, लेकिन डिहाइड्रेशन में गर्मी का इस्तेमाल होता है, जबकि फ्रीज-ड्राइड खाने को पूरी तरह जमा दिया जाता है, वैक्यूम चैंबर में रखा जाता है और बर्फ सीधे पानी की भाप में बदल जाती है, जिससे लिक्विड वाली स्टेज नहीं आती।

यह भी पढ़ें: न अतिरिक्त पैसे, न समय में राहत; 45 डिग्री गर्मी में काम करने वाले डिलीवरी पार्टनर हो रहे डिहाइड्रेशन का शिकार

By admin