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गायत्री गोपीचंद और त्रिशा जॉली ने जीता कांस्य पदक, जो काम पिता पी. गोपीचंद नहीं कर पाए वो बेटी ने कर दिखाया

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Aug 23, 2026


गायत्री गोपीचंद और उनकी महिला युगल जोड़ीदार त्रिशा जॉली

इमेज स्रोत, BAI

इमेज कैप्शन, त्रिशा जॉली (बाएं) और गायत्री गोपीचंद ने बीडब्ल्यूएफ़ वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज़ मेडल जीता है

पुलेला गोपीचंद के शानदार खेल जीवन की सबसे यादगार बातों में से एक उनकी 2001 में बर्मिंघम में ऑल इंग्लैंड ओपन जीत है. हालांकि वो बीडब्लूएफ़ वर्ल्ड चैंपियनशिप नहीं जीत पाए.

जिस दौर में भारतीय बैडमिंटन विश्व स्तर पर अपनी पहचान बनाने की जद्दोजहद कर रहा था गोपीचंद ने प्रकाश पादुकोण के पदचिह्नों पर चलते हुए, भारतीय बैडमिंटन के उभार का एक प्रमुख चेहरा बनने का गौरव हासिल किया.

उल्लेखनीय है कि प्रकाश पादुकोण ने 1980 में यह प्रतिष्ठित ख़िताब जीता था.

पुलेला गोपीचंद की उसके बाद की यात्रा एक चैंपियन खिलाड़ी से ऐसे कोच बनने तक पहुँची, जिसने भारतीय बैडमिंटन के कई सितारों को तराशा. इनमें साइना नेहवाल, पीवी सिंधु, किदांबी श्रीकांत, एचएस प्रणय और कई अन्य खिलाड़ी शामिल हैं.

लेकिन इस सप्ताहांत 52 साल के गोपीचंद ने अपने 30 साल के करियर में पहली बार एक नया अनुभव हासिल किया. उन्होंने पहले भी अपने शागिर्दों को वर्ल्ड चैंपियनशिप पोडियम पर चढ़ते देखा था. इस बार उस मंच पर उनकी अपनी बेटी गायत्री खड़ी थी.

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