छत्तीसगढ़ के रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग द्वारा मारुति ग्रैंड विटारा को बदलने के अहम फैसले के बाद अब इस मामले में एक नया मोड़ आ गया है। कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी (Maruti Suzuki) ने इस फैसले को स्वीकार करने से इनकार करते हुए इसके खिलाफ ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटाने का फैसला किया है।
मारुति सुजुकी ने कोर्ट के फैसले पर क्या बड़ा दावा किया है?
गुरुवार को जारी एक आधिकारिक बयान में मारुति सुजुकी ने उपभोक्ता आयोग के फैसले पर असहमति जताई और अपने रुख को स्पष्ट किया:
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कार पूरी तरह E20 अनुकूल थी:
कंपनी ने साफ तौर पर कहा कि पीड़ित ग्राहक की ग्रैंड विटारा कार पूरी तरह से E20 ईंधन के अनुकूल थी।
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ओनर्स मैनुअल में था जिक्र:
मारुति ने दावा किया कि कार के E20 अनुकूल होने की यह जानकारी गाड़ी के साथ मिलने वाले ‘ओनर्स मैनुअल’ में भी स्पष्ट रूप से दर्ज की गई थी।
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ईंधन में मिलावट के सबूत:
कंपनी का कहना है कि उनके पास गाड़ी के ईंधन में मिलावट होने के पुख्ता सबूत थे, जिन्हें आयोग के फैसले में सही ढंग से शामिल या प्रदर्शित नहीं किया गया।
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ऊपरी फोरम में अपील की तैयारी:
इन तर्कों के आधार पर मारुति सुजुकी ने घोषणा की है कि वह इस फैसले के खिलाफ संबंधित उच्च फोरम में कानूनी चुनौती देगी।