डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत ने बच्चों की टीकाकरण में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और यूनिसेफ की ओर से बुधवार को जारी ताजा अनुमानों के अनुसार, भारत ने “जीरो-डोज” वाले बच्चों (यानी वे बच्चे जिन्हें जीवन के पहले साल में एक भी टीका नहीं लगा) की संख्या 2024 के अनुमानित 9.09 लाख से घटाकर 2025 में 6.79 लाख कर दी है।
नेशनल इम्यूनाइजेशन कवरेज के अनुमानों से यह भी पता चलता है कि 2001 में पहली बार ये अनुमान जारी होने के बाद से, भारत अब खसरे (मीजल्स) का टीका न लगवाने वाले सबसे ज्यादा बच्चों वाले टाप 10 देशों में शामिल नहीं है।
भारत में अब 95 प्रतिशत बच्चों को डिप्थीरिया, टेटनस और पर्टुसिस (डीटीपी3) के तीन टीके और खसरे से बचाने वाले टीके (एमसीवी2) की दूसरी डोज पूरी तरह से लग चुकी है। डब्ल्यूएचओ और यूनिसेफ ने इस कामयाबी का श्रेय उन खास टीकाकरण अभियानों को दिया है, जिनका मकसद शहरी झुग्गी-बस्तियों, प्रवासी आबादी, दुर्गम इलाकों में जीरो-डोज वाले बच्चों तक पहुंचना था।
2025 में दुनिया भर में अनुमानित 1.35 करोड़ बच्चे “जीरो-डोज” वाले रहे यानी उन्हें जीवन के पहले साल में एक भी टीका नहीं लगा। इनमें भारत के लगभग 6.79 लाख बच्चे शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में दुनिया भर में 90 प्रतिशत बच्चों (यानी लगभग 11.6 करोड़) को डीटीपी वैक्सीन की कम से कम एक डोज मिली, जबकि 85 प्रतिशत (यानी लगभग 11 करोड़) ने तीन डोज का कोर्स पूरा किया।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)