दुनिया की दो महाशक्तियों अमेरिका और रूस ने बीते कई दशकों से अलग-अलग देशों के सुरक्षा मानक तय करने में बड़ी भूमिका निभाई है। जहां पश्चिमी देश बड़े स्तर पर अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर रहे हैं तो वहीं पूर्वी देशों की निर्भरता सोवियत संघ और फिर रूस पर रही। हालांकि, अब यह स्थिति बदल रही है। जहां रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते मॉस्को की तरफ से सुरक्षा के लिए हथियारों की आपूर्ति पहले ही मुश्किल में पड़ चुकी है तो वहीं अब अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के मनमाने फैसलों के बाद कई देश उससे भी अपनी निर्भरता घटाने की कोशिश में जुटे हैं।
इसी कड़ी में अब यूरोप ने बड़ा कदम उठाया है। यूरोप के नौ देशों के नेताओं ने हाल ही में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के साथ पेरिस में एक बैठक की और यूरोप के अपने एकीकृत एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल गठबंधन को बनाने का एलान किया। अब बुधवार को यूरोपीय संघ (ईयू) और यूक्रेन ने साथ में ड्रोन बनाने के एक समझौते पर भी हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस घोषणा में यूरोप ने वादा किया कि वह अलग-अलग देशों की औद्योगिक क्षमताओं और करीबी सहयोग का सही इस्तेमाल करते हुए वह एक ऐसा रक्षा कवच बनाएगा, जो कि एकीकृत होगा और इसका ढांचा हर किसी को बचाएगा।