डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ग्वालियर की 13 वर्षीय छात्रा का शव भिंड में सिंध नदी किनारे मिलने के बाद मामला और पेंचीदा हो गया है। पुलिस की शुरुआती जांच और फारेंसिक टीम द्वारा कराए गए सीन रिक्रिएशन में सौतेले पिता की बताई पूरी कहानी वैज्ञानिक साक्ष्यों से मेल नहीं खा रही है।
बता दें कि सौतेले पिता ने पुलिस को बताया कि गत 24 मई की रात छात्रा घर में पढ़ रही थी। रात करीब 11 बजे बिजली जाने पर उसकी मां जागी तो बेटी घर में नहीं मिली। कुछ देर तलाश के बाद दंपती लौटा तो घर अंदर से बंद था।
पिता ने दीवार फांदकर घर में प्रवेश किया और करीब 25 मिनट बाद बाहर आकर बताया कि बच्ची ने साड़ी के फंदे से आत्महत्या कर ली है। पुलिस के लिए यही 25 मिनट सबसे बड़ा सवाल बन गया है।
जांचकर्ता यह समझने का प्रयास कर रहे हैं कि उस दौरान घर के अंदर क्या हुआ और इतने समय बाद ही आत्महत्या की जानकारी क्यों दी गई। इसी वजह से पुलिस अब आत्महत्या की थ्योरी से आगे बढ़कर अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है। पुलिस ने शव की पहचान सुनिश्चित करने के लिए अब डीएनए परीक्षण कराने का फैसला लिया है।
शव ठिकाने लगाने की कहानी भी सवालों में, मां भी जांच के घेरे में-पुलिस जांच में सामने आया है कि कथित तौर पर बच्ची की मौत के बाद आरोपित पिता अपनी कार लेकर पेट्रोल पंप पहुंचा, वहां सीएनजी भरवाई, फिर शव को लेकर भिंड पहुंच गया। उसने शव को सिंध नदी में फेंक दिया।
पूछताछ में उसने पत्नी से यह भी कहा था कि नदी में मौजूद मगरमच्छ शव को खा जाएंगे और घटना का कोई सुराग नहीं मिलेगा। वहीं, पुलिस अब मृतका की मां की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है। अधिकारियों का मानना है कि यदि उसे घटना की जानकारी थी तो उसने पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी।
एफएसएल टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण कर सीन रिक्रिएशन कराया। जांचकर्ताओं ने यह परखा कि क्या अकेला व्यक्ति इतनी कम अवधि में शव को फंदे पर लटकाकर पूरी घटना को आत्महत्या का रूप दे सकता था। शुरुआती संकेतों ने पुलिस की शंकाओं को और मजबूत किया है।