जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। ब्रिक्स सम्मेलन में परोसी गई देश की सांस्कृतिक विविधता वैश्विक मेहमानों के लिए भारत ने अपनी समृद्ध और विविध खाद्य संस्कृति का अनूठा खजाना खोल दिया है।
इस भव्य आयोजन में दुनिया भर से पहुंचे राष्ट्राध्यक्षों और मेहमानों की थाली में भारत के कोने-कोने की खास क्षेत्रीय डिशेज के साथ-साथ हमारी पारंपरिक माटी की महक वाले ‘श्री अन्न’ (मोटे अनाज/मिलेट्स) को विशेष रूप से परोसा जा रहा है।
गाला डिनर का मेन्यू आतिथ्य परंपरा का प्रतीक
आइटीसी होटल्स के महाप्रबंधक रजनीश मल्लर और कॉरपोरेट शेफ मनीषा भसीन ने इस विशेष भोज की तैयारियों के पीछे की अनूठी कहानियों को साझा करते हुए बताया कि कैसे यह मेनू भारत की आतिथ्य परंपरा को वैश्विक मंच पर जीवंत कर रहा है।
राजमा, दम आलू बनारसी और बाजरा-रागी के लजीज व्यंजन रजनीश मल्लर ने बताया कि ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए तैयार किया गया यह क्यूरेटेड मेनू भारत की पाक कला की अद्भुत विविधता को दर्शाता है।
इसमें देश के विभिन्न राज्यों के स्वाद को शामिल किया गया है, जिसमें ‘राजमा’ और ‘दम आलू बनारसी’ जैसे प्रसिद्ध व्यंजन विशेष आकर्षण का केंद्र हैं।
इसके साथ ही, भोजन में पारंपरिक भारतीय मसालों की खूशबू और बाजरे एवं रागी जैसे पौष्टिक मिलेट्स पर विशेष जोर दिया गया है, जो भारत की बदलती और स्वास्थ्य-केन्द्रित फूड संस्कृति को बयां करते हैं। सुबह के नाश्ते से लेकर दोपहर के भोजन तक में मिलेट्स की विभिन्न वैरायटी ने मेहमानों का मन मोह लिया है।
बुखारा, दम पुख्त और कबाब व करी, वेस्टर्न, एशियन, चाइनीज क्यूजीन भी मनीषा भसीन ने गर्व महसूस करते हुए कहा कि जी-20 और वर्ल्ड एआइ समिट के बाद ब्रिक्स सम्मेलन में खान-पान की जिम्मेदारी संभालना उनके लिए एक बड़ा सम्मान है।
उन्होंने बताया कि दुनिया भर से आए मेहमानों की पसंद का ख्याल रखते हुए मेनू में ‘बुखारा’, ‘दम पुख्त’, कबाब और करी जैसी पारंपरिक भारतीय डिशेज के साथ-साथ वेस्टर्न, एशियन और चाइनीज क्यूजीन को भी शामिल किया गया है ताकि हर अतिथि को घर जैसा स्वाद मिल सके।
शेफ भसीन ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में 2023 के जी-20 सम्मेलन में शुरू हुआ मिलेट्स का यह अभियान आज लोगों की दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है, और इसी कड़ी में ब्रिक्स के इस भोज में ‘मिलेट पुलाव’ और ‘सामक (बार्नयार्ड मिलेट) की खीर’ जैसी अनूठी चीजें परोसी जा रही हैं।
जहां कला एवं शिल्प के धागों से जुड़ रहे हैं वैश्विक दिल
नई दिल्ली के ऐतिहासिक राष्ट्रीय हस्तशिल्प और हथकरघा संग्रहालय (नेशनल क्राफ्ट्स म्यूजियम एंड हस्तकला अकादमी) के प्रांगण में इन दिनों दुनिया भर की सांस्कृतिक विविधता जीवंत हो उठी है।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के अवसर पर सजे इस भव्य ‘ब्रिक्स बाजार’ में सदस्य और साझेदार देशों की प्राचीन कला और पारंपरिक शिल्पकला का अद्भुत संसार देखने को मिल रहा है।
‘क्राफ्टिंग कल्चर, कनेक्टिंग पीपल’ (संस्कृति गढ़ना, लोगों को जोड़ना) की थीम पर आधारित यह बाजार 10 सितंबर से शुरू हुआ है और 15 सितंबर तक चलेगा, जो वैश्वीकरण के दौर में लोक-संस्कृतियों को एक साझा मंच प्रदान कर रहा है।
सांस्कृतिक समागम में दिख रही है प्राचीन तकनीकों की अनूठी बानगी इस सांस्कृतिक समागम में अमेरिका की सबसे प्राचीन जीवित परंपराओं में से एक ब्राजील की चिकनी मिट्टी की कला (क्ले आर्ट) से लेकर बेलारूस की पारंपरिक लोक शिल्प ‘विलो वीविंग’ (बांस या विलो की टहनियों से बुनाई) तक की अनूठी बानगी देखने को मिल रही है।
आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, ब्राजील की प्रसिद्ध मूर्तिकार क्लेजियानिया रिबेरो डी लीमा पाइवा और बेलारूस की मास्टर लाना स्लास्टसियोन जैसे दिग्गज कलाकार अपनी प्राचीन तकनीकों का जादू बिखेर रहे हैं।
इसके अलावा, कजाकिस्तान के ज्वेलरी आर्टिस्ट सेरिक यरस्बेकोव की चांदी की कलाकृतियां और ईरान की नादिया करीमी द्वारा पीढ़ी-दर-पीढ़ी सहेजी गई पारंपरिक बलूची कढ़ाई भी इस मेले का मुख्य आकर्षण हैं, जिसमें रेशमी धागों से उकेरे गए बारीक नक्काशीदार पैटर्न आगंतुकों का मन मोह रहे हैं।
समृद्ध वस्त्र एवं शिल्प परंपराओं तथा वैश्विक जुड़ाव की भावना विदेश और वस्त्र राज्य मंत्री पवित्रा मार्गेरिटा ने इंटरनेट मीडिया पर इस आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ब्रिक्स बाजार भारत की दो सबसे बड़ी ताकतों – हमारी समृद्ध वस्त्र और शिल्प परंपराओं तथा वैश्विक जुड़ाव की हमारी भावना – को एक मंच पर पिरोता है।
यह मेला विभिन्न देशों के कारीगरों, डिजाइनरों और रचनात्मक उद्यमों को एक साथ लाकर प्रामाणिक हस्तशिल्प और कलाकृतियों का परिचय करा रहा है, जिससे सांस्कृतिक आदान-प्रदान और लोगों के बीच आपसी संबंध और अधिक मजबूत हो रहे हैं।
खाने की मेज पर सिल्वर-प्लेटेड बर्तन
वैश्विक मेहमानों के स्वागत के लिए जयपुर की प्रतिष्ठित कंपनी ‘अरुण्स ग्रुप आफ कंपनीज’ ने अद्भुत शिल्पकारी का परिचय दिया है। कंपनी ने मेहमानों के भोज के लिए विशेष रूप से चांदी की परत (सिल्वर-प्लेटेड) वाले बर्तन और कटलरी तैयार की है, जो भारत की प्राचीन और समृद्ध आतिथ्य परंपरा की भव्य दास्तां बयां करती है।
यह शानदार कलेक्शन पारंपरिक भारतीय उत्सवों और शाही मेहमाननवाजी के अनुकूल है, जिसमें न्यूनतम डिजाइन के बजाय जटिल और भव्य चांदी का काम किया गया है।
इसमें कई खूबसूरत सिल्वर बाउल, ट्रे, थालियां, सर्विंग डिश और अलंकृत बर्तन शामिल हैं, जो खाने की मेज पर भारत की सांस्कृतिक विरासत की चमक बिखेर रहे हैं।
कुल दस अलग-अलग चरणों में खास बर्तनों की बारीकी से होती है फिनिशिंग कंपनी के सीईओ अरुण पबुवाल ने गर्व के साथ बताया कि वीआइपी आयोजनों में अपनी कला का लोहा मनवाने का उनका यह पहला अनुभव नहीं है।
इससे पहले वे वर्ष 2023 के ऐतिहासिक जी-20 शिखर सम्मेलन और देश में कई अन्य विशिष्ट राष्ट्रपति दौरों के लिए भी ऐसी कलाकृतियां तैयार कर चुके हैं। उनकी कटलरी आधुनिकता और परंपरा का एक बेजोड़ मिश्रण है।
वहीं, प्रबंध निदेशक अंतरा पबुवाल ने उत्पादों की गुणवत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इन बर्तनों की यूएसपी इनकी बेहतरीन क्वालिटी है। उन्होंने बताया कि बेस प्रोडक्ट से लेकर डिजाइन और प्लेटिंग तक में कोई समझौता नहीं किया जाता।
हर बर्तन भारी और टिकाऊ होता है, तथा कुल दस अलग-अलग चरणों में इसकी बारीकी से फिनिशिंग की जाती है। वैश्विक मंच पर भारत की यह कलात्मक प्रस्तुति देश के लिए गौरव का विषय है।
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