जेएनएन, नई दिल्ली। विज्ञानियों ने चावल के दाने के आकार की एक माइक्रोचिप पर ऐसा ‘इंद्रधनुष’ तैयार किया है, जो एक साथ प्रकाश की कई सटीक दूरी वाली आवृत्तियां पैदा कर सकता है। इन आवृत्तियों को मिलीमीटर तरंगों में बदला जा सकता है।
इससे भविष्य में 6जी नेटवर्क में एक साथ अधिक संचार चैनल बनाने और ज्यादा डाटा भेजने की क्षमता बढ़ सकती है। हालांकि, यह अभी प्रयोगशाला स्तर की तकनीक है और इसे व्यावहारिक 6जी नेटवर्क में इस्तेमाल करने से पहले कई चरणों से गुजरना होगा।
यह शोध ब्रिटेन की लाफबरो यूनिवर्सिटी के विज्ञानियों के नेतृत्व में अंतरराष्ट्रीय टीम ने किया है। इसके नतीजे हाल में नेचर कम्युनिकेशंस जर्नल में प्रकाशित हुए।
शोधकर्ताओं ने एक ऐसी प्रणाली प्रदर्शित की है, जिसमें एक स्थिर और उच्च गुणवत्ता वाला ‘माइक्रोकांब’ तैयार होता है। इससे एक साथ कई सटीक रूप से अंतर वाली मिलीमीटर-वेव आवृत्तियां पैदा की जा सकती हैं।
क्यों कहा गया ‘चिप पर इंद्रधनुष’
माइक्रोकांब को समझने के लिए इसे इंद्रधनुष से जोड़कर देखा जा सकता है। इंद्रधनुष में प्रकाश की अलग-अलग आवृत्तियां अलग-अलग रंगों के रूप में दिखाई देती हैं।
माइक्रोकांब में भी प्रकाश की कई आवृत्तियां होती हैं, लेकिन वे एक-दूसरे में लगातार मिलती नहीं हैं। वे कंघी के दांतों की तरह सटीक और समान अंतराल पर व्यवस्थित होती हैं। इस प्रयोग में पैदा हुआ प्रकाश इंसानी आंखों को दिखाई नहीं देता।
माइक्रोकांब बनाने के लिए आम तौर पर लेजर प्रकाश को माइक्रोरेजोनटर में डाला जाता है। यह चिप पर बनी बेहद छोटी संरचना होती है, जिसमें प्रकाश फंसकर लगातार घूम सकता है।
लाफबरो की टीम ने माइक्रोरेजोनटर को ऑप्टिकल फाइबर के एक बड़े लूप से जोड़ दिया। लेजर प्रकाश दोनों के बीच लगातार घूमता रहा। इससे माइक्रोकांब की अवस्थाएं आसानी से बनने के साथ स्थिर भी बनी रहीं।
एक साथ कई चैनल बनाने की संभावना
इस प्रयोग की अहमियत इसलिए है क्योंकि इससे केवल एक मिलीमीटर-वेव आवृत्ति नहीं, बल्कि कई सटीक रूप से व्यवस्थित आवृत्तियां एक साथ पैदा की जा सकती हैं। हर आवृत्ति भविष्य में संचार के लिए अलग चैनल के रूप में इस्तेमाल की जा सकती है। इसका मतलब है कि एक ही सिस्टम से समानांतर रूप से ज्यादा जानकारी भेजने की संभावना बढ़ सकती है।
मिलीमीटर तरंगों में भविष्य की वायरलेस संचार प्रणालियों के लिए अधिक बैंडविड्थ उपलब्ध हो सकती है। यानी इनके जरिये ज्यादा डाटा को तेजी से भेजने की संभावना है।
नए अध्ययन की खास उपलब्धि यही है कि शोधकर्ताओं ने माइक्रोकांब की सटीकता और स्थिरता को मिलीमीटर-वेव सिग्नल में भी बनाए रखने का प्रदर्शन किया है।
लाफबरो यूनिवर्सिटी के डा. ल्यूक पीटर्स के अनुसार, दुनिया में डाटा की जरूरत तेजी से बढ़ रही है और लोगों को ज्यादा जानकारी, ज्यादा तेजी और अधिक रिजोल्यूशन के साथ भेजने और प्राप्त करने की जरूरत है। मिलीमीटर-वेव इस बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद कर सकती हैं। उनके मुताबिक, यह तकनीक आगे चलकर तेज और अधिक क्षमता वाले 6जी नेटवर्क में योगदान दे सकती है।
6जी से आगे भी कई इस्तेमाल
इस तकनीक का संभावित इस्तेमाल केवल संचार क्षेत्र तक सीमित नहीं है। शोधकर्ताओं के अनुसार, बेहद सटीक मिलीमीटर-वेव आवृत्तियों का इस्तेमाल रडार सिस्टम, स्पेक्ट्रोस्कोपी और खगोलीय उपकरणों में भी किया जा सकता है। इनके जरिये पदार्थों का अधिक सटीक अध्ययन और ब्रह्मांड से जुड़े बेहद सूक्ष्म माप किए जा सकते हैं।
चिप छोटी, पूरा सिस्टम अभी बड़ा
माइक्रोचिप का आकार फिलहाल करीब चावल के दाने जितना है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पूरी तकनीक इतनी छोटी हो गई है। मौजूदा प्रायोगिक सिस्टम अभी टेबलटाप प्रयोगशाला सेटअप है। शोधकर्ता अब इसके आकार और ऊर्जा खपत को कम करने पर काम कर रहे हैं। भविष्य में इसके छोटे संस्करणों को ऐसे उपकरणों में इस्तेमाल किया जा सकता है जहां आकार, वजन और ऊर्जा खपत कम रखना जरूरी है, मसलन उपग्रहों में।