इमेज कैप्शन, जनरल नरवणे की किताब ‘फ़ोर स्टार्स ऑफ़ डेस्टिनी’ पर लोकसभा में विवाद हुआ था
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इस साल 2 फ़रवरी 2026 को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने एक अप्रकाशित किताब के कुछ पन्ने पढ़ने की कोशिश की. लेकिन बीजेपी के नेताओं ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा था कि जो किताब छपी ही नहीं है, उसके अंश कैसे पढ़े जा सकते हैं.
विवाद इतना गहराया कि दिल्ली पुलिस ने बिना सक्षम अधिकारियों की मंज़ूरी के अप्रकाशित पुस्तक की प्री-प्रिंट कॉपी प्रसारित होने पर संज्ञान लेते हुए मामला दर्ज कर लिया था.
इस अप्रकाशित किताब का नाम है ‘फ़ोर स्टार्स ऑफ़ डेस्टिनी’ और इसके लेखक हैं- भारत के चीफ़ ऑफ़ आर्मी स्टाफ़ रहे जनरल मनोज मुकुंद (एमएम) नरवणे.
इनके परिचय में अहम बात ये है कि इन्होंने भारतीय सेना का उस वक़्त नेतृत्व किया, जब गलवान घाटी में चीन और भारत के सैनिक आमने-सामने आ गए.
बीबीसी संवाददाता जुगल पुरोहित को दिए इंटरव्यू में जनरल एमएम नरवणे ने किताब से जुड़े विवाद, भारत-चीन के बीच के सीमा विवाद और कई अन्य मुद्दों पर बात की है.
वीडियो कैप्शन, मनोज नरवणे ने चीन पर पूछे गए किस सवाल पर जवाब देने से किया इनकार?
किताब से जुड़े विवाद पर क्या बोले जनरल नरवणे?
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इमेज कैप्शन, जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब के मुद्दे पर पीएम मोदी के ख़िलाफ़ यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था (फ़ाइल तस्वीर)
संसद में हुए विवाद से जुड़ा सवाल पूछने पर जनरल नरवणे ने कहा कि इस मुद्दे से उनका कोई संबंध नहीं है, उन्हें इसकी जानकारी नहीं थी कि ऐसा कुछ होने वाला है.
उन्होंने कहा, “मेरा नाम लेकर अगर कोई मुद्दा खड़ा करने की कोशिश करे या विवाद पैदा करे तो ज़रूरी नहीं कि उसका मुझसे कोई ताल्लुक़ है. मुझे इस बारे में सबसे पहले अपने दोस्तों से पता चला, उन्होंने फ़ोन करके बताया था.”
दरअसल, राहुल गांधी जिस अप्रकाशित किताब के कुछ अंश पढ़ रहे थे, मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ वह किताब जनवरी 2024 में बाज़ार में आने वाली थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ. ये किताब रिव्यू के लिए रक्षा मंत्रालय के पास है.
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है, “यह किताब 2020 में चीन के साथ पूर्वी लद्दाख़ में हुए सैन्य विवाद के बारे में बताती है. इसमें गलवान घाटी की झड़प और अग्निपथ योजना का भी ज़िक्र है. इस किताब में 31 अगस्त 2020 की रात को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से हुई बातचीत का ज़िक्र है.”
जनरल नरवणे ने बताया कि लोकसभा में उठे विषय को लेकर उनसे न तो कभी राहुल गांधी ने संपर्क किया और न ही कांग्रेस पार्टी ने.
उन्होंने कहा, “इस मुद्दे पर और बातचीत नहीं करनी चाहिए, क्योंकि यह बहुत निम्न स्तर की चर्चा है. दुनिया में इतना कुछ घटित हो रहा है, उस पर चर्चा करते हैं.”
क्या पीएम मोदी ने कहा था, ‘जो उचित समझो, वो करो’
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इमेज कैप्शन, जनरल नरवणे का मानना है कि चीन को समझने के लिए भारत के ‘चीनी एक्सपर्ट्स’ को चीन की मंदारिन भाषा आनी चाहिए.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी दावा करते रहे हैं कि चीन-भारत के संघर्ष के दौरान केंद्र सरकार ने सेना को स्पष्ट निर्देश नहीं दिए.
इसी साल फ़रवरी में राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश के भोपाल में हुई एक रैली में जनरल नरवणे की अप्रकाशित किताब का फिर ज़िक्र किया था. उन्होंने दावा किया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के ज़रिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनरल नरवणे को संदेश दिया था- “जो उचित समझो, वो करो”.
क्या पीएम मोदी ने सचमुच रक्षा मंत्री से यह बात कही थी? इस पर जनरल नरवणे कहते हैं कि किताब रिव्यू में है, इस पर बात करना उचित नहीं होगा.
हालांकि, उन्होंने कहा, “आख़िर में यह एक मिलिट्री डिसीज़न था कि क्या करना है और क्या नहीं. जब ऐसे आदेश मिलते हैं, तो इसका मतलब है कि सरकार को अपनी सेना और अपने चीफ़ पर पूरा भरोसा है कि वह जो भी कार्रवाई करेंगे, जो भी निर्णय लेंगे, वह एकदम सही होगा.”
वो कहते हैं, “इसको इसी दृष्टि से देखना चाहिए, ना कि उनकी नज़र से जो लोग इसका मुद्दा खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं.”
‘चीन को समझना आसान नहीं है’
क्या भारत के रणनीतिक हलकों में चीन को लेकर उतनी गहरी समझ है? इस पर जनरल नरवणे कहते हैं, “चीन को समझना आसान नहीं है. वह एक बहुत बड़ा देश है, उनका सिस्टम अलग है और काम करने का तरीक़ा भी अलग है. इसलिए उच्च स्तर पर यह ज़रूरी है कि हम चीन पर अधिक अध्ययन करें.”
जनरल नरवणे का मानना है कि चीन को समझने के लिए भारत के ‘चीनी एक्सपर्ट्स’ को चीन की मंदारिन भाषा आनी चाहिए.
उन्होंने कहा, “जब हमारे विद्वान, पत्रकार और अकादमिक लोग चीन में रहेंगे, वहां पढ़ाई करेंगे और नौकरी करेंगे, तब जाकर हमें चीन के बारे में गहरी जानकारी मिलेगी. लेकिन रणनीतिक और सैन्य स्तर पर कोई कमी नहीं है.”
जनरल नरवणे का मानना है कि चीन के साथ संबंध सहज करने के लिए सबसे पहले सीमा विवाद सुलझना चाहिए. उनका कहना है कि भारत अपनी सीमा कहीं और मानता है और चीन कहीं और.
वो कहते हैं, “दोनों देशों के बीच जितनी बातचीत होगी, मतभेद उतने ही कम होते जाएंगे. ये काम धीरे-धीरे ही हो सकता है.”
क्या चीन ने भारत के इलाक़े पर क़ब्ज़ा किया है?
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इमेज कैप्शन, जनरल नरवणे का कहना है कि पेट्रोलिंग के दौरान भारत और चीन की सेना का आमना-सामना होना स्वाभाविक है
बीबीसी को दिए इंटरव्यू में जनरल नरवणे ने कहा कि भारत ने अपनी कोई ज़मीन नहीं खोई है.
उन्होंने कहा, “मैं यह एक बार फिर स्पष्ट करना चाहता हूं कि हमने कुछ नहीं खोया. पीएम मोदी ने अपने एक भाषण में सही कहा था कि भारत ने एक इंच ज़मीन भी नहीं गंवाई है.”
अगर वहां घुसपैठ ही नहीं हुई, तो चीन से विवाद किस बात का है? इस सवाल पर नरवणे कहते हैं कि यह धारणा का अंतर है.
उन्होंने कहा, “भारत जहां तक अपनी सीमा मानता है, वह वहां तक जाता है, जबकि चीन जहां तक सीमा मानता है, वह वहां तक आता है. इसलिए पेट्रोलिंग के दौरान हमारा आमना-सामना होना स्वाभाविक है. कई बार यह सामना शांतिपूर्ण होता है और कई बार मुठभेड़ भी हो जाती है.”
उन्होंने कहा कि चीन और भारत की सेना का सामना पहली दफ़ा नहीं हुआ है, ऐसा पहले भी होता आया है.
पाकिस्तान को लेकर क्या बोले जनरल नरवणे
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इमेज कैप्शन, जनरल नरवणे का मानना है कि चीन और पाकिस्तान के साथ डील करने में फ़र्क़ है
जनरल नरवणे मानते हैं कि चीन और पाकिस्तान में फ़र्क़ है, दोनों को अलग-अलग तरीक़े से डील किया जाता है.
उन्होंने कहा, “पाकिस्तान के साथ हमारा आतंकवाद का मामला है, जो चीन के साथ नहीं है. अगर आतंकवाद का ख़तरा हो तो पाकिस्तान के ख़िलाफ़ गोली चलाने की पूरी छूट है, चाहे वह सीमा पर हो या जम्मू-कश्मीर में.”
“लेकिन चीन के साथ ऐसी स्थिति ही नहीं आती, क्योंकि वहां आतंकवाद का कोई प्रश्न नहीं है. इसलिए फ़र्क़ स्वाभाविक है.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.