लद्दाख में स्थानीय सत्ता के समीकरण बदलने की तैयारी है। प्रशासन ने केंद्र शासित प्रदेश के आठ जिलों में स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषदों (हिल डेवलपमेंट काउंसिल) के लिए 100 निर्वाचन क्षेत्रों की अधिसूचना बुधवार को जारी कर दी। इनमें नवगठित संकू जिले की परिषद के 13 निर्वाचन क्षेत्र भी शामिल हैं। परिषदों के चुनाव की तारीखों का एलान अभी नहीं हुआ है।
अब तक लद्दाख में लेह और कारगिल में ही दो हिल डेवलपमेंट काउंसिल थीं। नए ढांचे के तहत आठों जिलों में अलग-अलग परिषदों के गठन का रास्ता साफ हो गया है। इसके साथ ही निर्वाचित पार्षदों की कुल संख्या 52 से बढ़कर 100 हो जाएगी। प्रशासन के इस फैसले से स्थानीय प्रतिनिधित्व का दायरा बढ़ेगा और क्षेत्रीय राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना है।
लेह में सबसे ज्यादा 22 सीटें
अधिसूचना के अनुसार लेह हिल काउंसिल में 22, कारगिल में 21, संकू में 13 और चांगथांग में 10 निर्वाचन क्षेत्र होंगे। नुब्रा, शाम और जंस्कार में नौ-नौ, जबकि द्रास में सात निर्वाचन क्षेत्र अधिसूचित किए गए हैं। निर्वाचन क्षेत्रों का निर्धारण पंचायत हलकों और नगर निकाय वार्डों को आधार बनाकर किया गया है। इसमें मतदाताओं की संख्या और भौगोलिक क्षेत्र को भी ध्यान में रखा गया है।
लेह में कार्यकाल खत्म, कारगिल परिषद भंग
लेह हिल काउंसिल के चेयरमैन का कार्यकाल समाप्त होने के बाद समय पर चुनाव नहीं हो सके थे। इसके बाद परिषद भंग कर दी गई थी और प्रशासनिक जिम्मेदारी उपायुक्त को सौंप दी गई थी। वहीं, कारगिल हिल काउंसिल में चेयरमैन के कार्यकाल को लेकर राजनीतिक खींचतान चल रही थी। कांग्रेस के साथ ढाई-ढाई साल के समझौते के तहत पद संभालने वाले चेयरमैन का निर्धारित कार्यकाल पूरा होने के बाद भी पद पर बने रहने का मुद्दा विवाद का कारण बना। बुधवार को प्रशासन ने कारगिल परिषद को भी भंग कर दिया।
संकू के गठन से बदला परिषदों का ढांचा
लद्दाख प्रशासन ने हाल ही में संकू को आठवां जिला घोषित किया है। इसके बाद हिल काउंसिल कानून में संशोधन कर सभी आठ जिलों में परिषदों के गठन का प्रावधान किया गया। अब 100 निर्वाचन क्षेत्रों की अधिसूचना के साथ नई व्यवस्था के तहत चुनाव की तैयारी आगे बढ़ी है। चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इन परिषदों के लिए मतदान कब कराया जाएगा।
लद्दाख की राजनीति में हिल काउंसिल की अहम भूमिका रही है। स्थानीय विकास और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व से जुड़े फैसलों में इन परिषदों की भूमिका के कारण आगामी चुनाव राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण होंगे। हालांकि, नई व्यवस्था में आठों परिषदों के चुनाव की प्रक्रिया और समय-सारिणी को लेकर प्रशासन की अगली घोषणा का इंतजार है।