पीटीआई, ठाणे। अपनी 18 महीने की बेटी की हत्या करने वाली महिला को ठाणे की एक अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने बच्ची के पिता को अपराध छिपाने और बच्ची को जल्दबाजी में दफनाकर साक्ष्य मिटाने के लिए चार साल जेल की सजा सुनाई।
बुधवार को सेशन जज आरडी. सावंत ने बचाव पक्ष की दलील को खारिज कर दिया कि बच्ची की मौत त्वचा की दुर्लभ बीमारी से हुई थी। अभियोजन पक्ष ने मेडिकल साक्ष्यों और दंपती की दो अन्य बेटियों के बयानों के आधार पर मजबूती से पक्ष रखा।
दोनों बेटियों ने अपनी मां को रसोई के चाकू से नवजात पर हमला करते देखा था। नाबालिगों की गवाही को स्वीकार करते हुए, अदालत ने माना कि बच्चों की भरोसेमंद गवाही किसी को दोषी ठहराने का एकमात्र आधार हो सकती है।
अदालत ने नूरानी खातून जाहिद शेख को भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) की धारा 302 (हत्या) के तहत दोषी ठहराया। बच्चे के पिता, जाहिद सलामत शेख को साक्ष्य मिटाने का दोषी पाया गया।
बच्ची की हत्या मार्च, 2024 में ठाणे ज़िले के मुंब्रा इलाके में की गई थी। पुलिस को तस्वीरों के साथ गुमनाम शिकायत मिलने के बाद यह मामला सामने आया, जिसके बाद गहन फोरेंसिक जांच की गई और स्थानीय कब्रिस्तान से बच्ची का शव बाहर निकाला गया।
बचाव पक्ष ने दावा किया कि बच्चे की मृत्यु एपिडर्मोलिसिस बुलोसा नामक आनुवंशिक बीमारी के कारण हुई थी। हालांकि, अदालत ने शव को कब्र से निकालने के बाद शव परीक्षण करने वाले डॉक्टर की रिपोर्ट के आधार पर इस दावे को खारिज कर दिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि नवजात के सिर और गर्दन के हिस्से पर 14 गहरे घाव थे।