डिजिटल डेस्क, चेन्नई। तमिलनाडु में अलग राज्य ध्वज को लेकर एक बार फिर राजनीतिक विवाद छिड़ गया है। राज्य मंत्री आधव अर्जुन ने घोषणा की कि तमिलनाडु का अपना राज्य ध्वज होगा।
उनके इस बयान पर भाजपा ने तीखा पलटवार किया और इसे अलगाववादी मानसिकता को बढ़ावा देने वाला कदम करार दिया है।
‘तमिलनाडु के पास भी होगा अपना ध्वज’
मंत्री आधव अर्जुन ने अपने बयान में कहा, ‘ देश के कई राज्यों के पास अपना ध्वज है, लेकिन तमिलनाडु के पास कोई ध्वज नहीं है। तमिलनाडु के लिए एक राज्य ध्वज लाया जाएगा। साथ ही आधव अर्जुन ने दो भाषा नीति को जरूरी बताते हुए कहा, ‘हमें स्कूली दिनों से ही अपनी मातृभाषा तमिल को प्राथमिकता देनी होगी।’
उन्होंने कहा, ‘अंग्रेजी सिर्फ कारोबार की भाषा है। चीन, जापान और फ्रांस में लोग अपनी ही भाषा में बात करते हैं। तमिल कोई ऐसी भाषा नहीं होनी चाहिए जिसे चुनने का विकल्प हो, इसे अनिवार्य होना चाहिए।’
राज्य मंत्री के बयान पर बीजेपी का पलटवार
मंत्री के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी नेता विनोझ पी. सेल्वम ने सोशल साइट X पर कहा, ‘ इस तरह की बयानबाजी अलगाववादी सोच को हवा देती है। यह लोगों को अपनी तमिल पहचान और भारतीय पहचान को एक-दूसरे के विरोधी के रूप में देखने के लिए उकसाती है। जब हमें दोनों पर गर्व होना चाहिए, तो समाज में विभाजन क्यों पैदा किया जा रहा है?’
बीजेपी नेता ने आगे कहा, ‘हमारी भाषा को आपके ध्वज का इंतजार नहीं है और न ही हमारी सभ्यता को आपके प्रमाण पत्र की जरूरत है। भारतीय तिरंगे के नीचे हमारी तमिल पहचान कभी छोटी नहीं होती।’
‘चर्च और मस्जिद में भी अनिवार्य करेंगे तमिल?’
बीजेपी नेता ने मंत्री की भाषा नीति पर सवाल उठाते हुए उन पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया। सेल्वम ने कहा, ‘अगर आपको सच में तमिल की इतनी ही चिंता है, तो अपनी बातों में एकरूपता लाएं। आप मंदिरों में तमिल भाषा के इस्तेमाल पर जोर देते हैं।’
उन्होंने आगे कहा, ‘क्या आप चर्च और मस्जिद में भी यही मांग करेंगे? या फिर अनिवार्य तमिल को लेकर आपका उत्साह सिर्फ मंदिर के दरवाजों तक ही सीमित है? अपने सिद्धांतों को हर जगह समान रूप से लागू करें, फिर हमें तमिल ध्वज के बारे में उपदेश दें।’
राज्य सरकार से रोजगार पर ध्यान देने की मांग
बीजेपी नेता ने राज्य सरकार से युवाओं के भविष्य और रोजगार पर ध्यान केंद्रित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि तमिल माध्यम के छात्रों, शोध, रोजगार और उद्यमियों के लिए उसके पास क्या ठोस कार्ययोजना और समय सीमा है।
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ध्वज डिजाइन करना बहुत आसान काम है, लेकिन राज्य और युवाओं का बेहतर भविष्य बनाने के लिए जमीनी स्तर पर कड़ी मेहनत करनी पड़ती है।
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