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तरुण तेजपाल केस: फ़ैसले में सर्वाइवर के पक्ष में कही गईं ये तीन बातें

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Aug 7, 2026


तरुण तेजपाल की बाम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच के सामने पेश होने की साल 2014 की तस्वीर

इमेज स्रोत, Getty Images

इमेज कैप्शन, तरुण तेजपाल की बाम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच के सामने पेश होने की साल 2014 की तस्वीर

कई मर्दों के साथ यौन संबंध रखनेवाली या यौन हिंसा के बाद मुस्कुराते हुए या परेशान न दिखनेवाली स्‍त्री का बयान कितना सच्चा होता है?

गुरुवार को न्यूज़ मैगज़ीन तहलका के पूर्व संपादक तरुण तेजपाल को बलात्कार का दोषी करार देने वाले अदालत के फ़ैसले में इसी सवाल का जवाब है.

बॉम्बे हाई कोर्ट की गोवा बेंच ने तेजपाल को साल 2013 में गोवा में हुए तहलका पत्रिका के एक अंतरराष्ट्रीय आयोजन के दौरान अपनी जूनियर सहकर्मी के बलात्कार के लिए दस साल की सज़ा सुनाई है.

81 पेज का यह फ़ैसला जस्टिस डॉ. नीला गोखले और जस्टिस अमित जामसंदेकर की बेंच ने गोवा सरकार की ओर से दाख़िल अपील को मंज़ूर करते हुए सुनाया.

साल 2021 में एक निचली अदालत ने तेजपाल को बरी कर दिया था और अपने फ़ैसले में सर्वाइवर के बर्ताव और यौन चरित्र की आलोचना की थीं. वह फ़ैसला जस्‍ट‍िस क्षमा जोशी का था.

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