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तीन बार अमेरिकी वीजा रिजेक्ट, अब बने ट्रंप के चहेते… कौन हैं संजय मेहरोत्रा? जिन्होंने ट्रिलियन-डॉलर क्लब में बनाई जगह

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May 27, 2026


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। कभी अमेरिकी दूतावास के बाहर छात्र वीजा के लिए घंटों इंतजार करने वाले कानपुर के एक युवा छात्र ने आज दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण टेक कंपनियों में से एक की कमान संभाल ली है।

भारतीय मूल के संजय मेहरोत्रा अब उन चुनिंदा भारतीयों की सूची में शामिल हो गए हैं, जो ट्रिलियन डॉलर वैल्यू वाली अमेरिकी कंपनियों का नेतृत्व कर रहे हैं।

माइक्रोन टेक्नोलॉजी (Micron Technology) के CEO संजय मेहरोत्रा की कंपनी ने AI बूम के बीच मंगलवार को 1 ट्रिलियन डॉलर मार्केट कैप का आंकड़ा पार कर लिया। इसके साथ ही माइक्रोन अमेरिका की शीर्ष 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल हो गई। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि कभी अमेरिका ने उन्हें लगातार तीन बार छात्र वीजा देने से इनकार कर दिया था।

तीन बार ठुकराया अमेरिका का वीजा

साल 1976 की गर्मियों में कानपुर में पले-बढ़े और BITS पिलानी में पढ़ रहे संजय मेहरोत्रा अमेरिका में उच्च शिक्षा के लिए जाना चाहते थे। उन्हें तीन अमेरिकी विश्वविद्यालयों में प्रवेश मिल चुका था और सभी दस्तावेज भी पूरे थे, लेकिन अमेरिकी दूतावास ने लगातार तीन बार उनका छात्र वीजा खारिज कर दिया।

रिपोर्ट के अनुसार, उनके पिता हार मानने को तैयार नहीं थे। वे नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास में बेटे के साथ रुके रहे। उन्होंने दूतावास अधिकारी की तस्वीर देख ली थी और अंदाजा लगाया कि अधिकारी लंच पर गया है।

वे घंटों इंतजार करते रहे ताकि सीधे उससे पूछ सकें कि आखिर वीजा क्यों रोका जा रहा है। आखिरकार उनकी जिद काम आई और संजय मेहरोत्रा को अमेरिका जाने की अनुमति मिल गई।

अब ट्रिलियन डॉलर क्लब में भारतीयों की तिकड़ी

संजय मेहरोत्रा की सफलता ने भारतीय मूल के टेक दिग्गजों की एक ऐतिहासिक तिकड़ी को पूरा कर दिया है।

आज दुनिया की तीन बड़ी ट्रिलियन डॉलर टेक कंपनियों का नेतृत्व भारतीय मूल के CEO कर रहे हैं। इन तीनों की पृष्ठभूमि साधारण भारतीय मध्यमवर्गीय परिवारों से रही है।

  • सत्य नडेला – Microsoft
  • सुंदर पिचाई – Alphabet (Google)
  • संजय मेहरोत्रा – Micron Technology

Sanjay Mehrotra (2)

बिना फोन वाला घर, पड़ोसी के फोन से बात

संजय मेहरोत्रा का परिवार कानपुर में रहता था और उनके घर में फोन तक नहीं था। अमेरिका में शुरुआती दिनों में वे अपने माता-पिता से पड़ोसी का फोन के जरिए बात करते थे। पड़ोसी के घर लैंडलाइन पर कॉल जाती और फिर उनके माता-पिता को बुलाया जाता।

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AI ने बदली माइक्रोन की किस्मत

जब संजय मेहरोत्रा 2017 में माइक्रोन के CEO बने थे, तब कंपनी की वैल्यू लगभग 20 अरब डॉलर थी। आज AI क्रांति के चलते कंपनी 1 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े तक पहुंच चुकी है।

दरअसल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में सिर्फ प्रोसेसर ही नहीं, बल्कि हाई-बैंडविड्थ मेमोरी चिप्स की भी भारी मांग बढ़ी है।

Nvidia के AI प्रोसेसर जहां AI को शक्ति देते हैं, वहीं Micron की मेमोरी चिप्स डेटा को स्टोर और प्रोसेस करने में अहम भूमिका निभाती हैं।

2026 में माइक्रोन के शेयरों में करीब 180 प्रतिशत की तेजी आई है, जबकि सिर्फ मई महीने में ही इसमें 75 प्रतिशत उछाल दर्ज किया गया।

डोनल्ड ट्रंप भी कर चुके हैं तारीफ

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने भी माइक्रोन और संजय मेहरोत्रा की खुलकर प्रशंसा की है। व्हाइट हाउस में मुलाकात के बाद ट्रंप ने माइक्रोन को ‘सबसे हॉट स्टॉक्स में से एक’ बताया था।

इतना ही नहीं, ट्रंप उन्हें अपने चीन दौरे पर बिजनेस डेलिगेशन का हिस्सा बनाकर भी ले गए थे। यह दिलचस्प इसलिए है क्योंकि MAGA राजनीति अक्सर वैश्वीकरण और इमिग्रेशन की आलोचना करती रही है।

भारत में बड़ा निवेश कर रही माइक्रोन

माइक्रोन अब भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का अहम केंद्र बनाने में भी बड़ी भूमिका निभा रही है। कंपनी गुजरात के साणंद में ATMP (Assembly, Testing, Marking and Packaging) प्लांट बना रही है। इसमें माइक्रोन 800 मिलियन डॉलर से ज्यादा का निवेश कर रही है।

यह परियोजना भारत की 2.75 अरब डॉलर की सेमीकंडक्टर रणनीति का हिस्सा है। साणंद में बनने वाला यह प्लांट दुनिया के सबसे बड़े सिंगल-फ्लोर क्लीनरूम में से एक होगा। इस परियोजना से हजारों इंजीनियरों, तकनीशियनों और मैन्युफैक्चरिंग विशेषज्ञों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।

सत्य नडेला और सुंदर पिचाई से कैसे अलग हैं मेहरोत्रा?

विशेषज्ञों के मुताबिक, संजय मेहरोत्रा की उपलब्धि कुछ मायनों में और भी कठिन मानी जाती है। Microsoft और Google पहले से ही टेक दिग्गज थे, जब नडेला और पिचाई ने कमान संभाली। लेकिन Micron मेमोरी चिप उद्योग में काम करती है, जहां प्रतिस्पर्धा बेहद कठिन और पूंजी निवेश बहुत ज्यादा होता है।

इस सेक्टर में Samsung और SK Hynix जैसी एशियाई कंपनियों का दबदबा रहा है। इसके बावजूद मेहरोत्रा ने माइक्रोन को AI युग की सबसे महत्वपूर्ण कंपनियों में शामिल कर दिया।

भारतीय मूल के CEO क्यों बन रहे हैं अमेरिका की ताकत?

आज अमेरिका की कई बड़ी टेक कंपनियों की कमान भारतीय मूल के पेशेवरों के हाथ में है। इसकी एक बड़ी वजह उनका तकनीकी कौशल, प्रबंधन क्षमता और वैश्विक सप्लाई चेन को संभालने की क्षमता मानी जाती है।

सत्य नडेला, सुंदर पिचाई और संजय मेहरोत्रा — तीनों की कार्यशैली में कुछ समानताएं दिखती हैं। ये सिलिकॉन वैली के पुराने ‘स्टार CEO’ मॉडल से अलग माने जाते हैं।

  • शांत और लो-प्रोफाइल व्यक्तित्व
  • इंजीनियरिंग पर गहरी पकड़
  • लंबी रणनीति पर फोकस
  • दिखावे से दूरी

संजय मेहरोत्रा की कहानी सिर्फ व्यक्तिगत सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह आधुनिक अमेरिका के बदलते स्वरूप को भी दिखाती है। जिस छात्र को कभी अमेरिका में प्रवेश पाने के लिए संघर्ष करना पड़ा था, आज वही अमेरिकी तकनीकी शक्ति और सेमीकंडक्टर रणनीति का अहम चेहरा बन चुका है।

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