इमेज कैप्शन, पुलिस ने त्विषा के पति समर्थ सिंह और पूर्व जज उनकी सास गिरिबाला सिंह के ख़िलाफ़ दहेज प्रताड़ना से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज किया था….में
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त्विषा शर्मा मौत मामले की जांच कर रही केंद्रीय जांच एजेंसी (सीबीआई) अब उन परिस्थितियों की भी पड़ताल कर रही है जिनमें शुरुआती पुलिस जांच हुई थी.
मामले से जुड़े दस्तावेज़ों और सबूतों के ज़ब्त किए जाने के रिकॉर्ड्स को लेकर नए सवाल सामने आए हैं.
नोएडा की मॉडल और अभिनेत्री त्विषा शर्मा 12 मई 2026 को भोपाल स्थित अपने ससुराल में मृत पाई गई थीं.
इसके बाद स्थानीय पुलिस ने जांच शुरू की थी, लेकिन परिवार की ओर से जांच में ख़ामियों और ससुराल पक्ष की ओर से जांच को प्रभावित करने के आरोप लगाए जाने के बाद मामला सीबीआई को सौंप दिया गया.
रस्सी की बरामदगी पर सवाल
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इमेज कैप्शन, त्विषा के पति समर्थ सिंह ने 22 मई को जबलपुर में सरेंडर किया था
अब सीबीआई न केवल मौत की परिस्थितियों बल्कि शुरुआती जांच के दौरान जुटाए गए सबूतों और उनकी हैंडलिंग की भी समीक्षा कर रही है.
मामले में नया विवाद उस फंदे या लिगेचर सामग्री को लेकर सामने आया है जिसे पुलिस ने कथित तौर पर घटनास्थल से बरामद किया था.
त्विषा के परिवार की ओर से पैरवी कर रहे वकील अंकुर पांडे ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, “13 मई 2026 की सुबह 9:42 बजे सब इंस्पेक्टर दिनेश शर्मा ने जिस रस्सी या फंदे को ज़ब्त किया, उसके ज़ब्ती दस्तावेज़ में यह स्पष्ट नहीं है कि उस रस्सी या फंदे की पहचान किस व्यक्ति ने की थी.”
अंकुर पांडे का कहना है कि दस्तावेज़ में उस व्यक्ति का विवरण दर्ज नहीं है जिसने बरामद सामग्री को कथित रूप से फंदे के रूप में चिन्हित किया.
उन्होंने यह भी आरोप लगाया, “बरामदगी के बाद रस्सी को तत्काल परीक्षण के लिए नहीं भेजा गया बल्कि वह काफ़ी समय तक जांच अधिकारी के वाहन में रखी गई.”
हालांकि इस संबंध में पुलिस का पक्ष अलग है.
मामले की शुरुआती जांच से जुड़े थाना प्रभारी सुनील दुबे ने पत्रकारों से कहा, “फ़ॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफ़एसएल) की टीम ने मौक़े का निरीक्षण किया था और उसी दौरान लिगेचर सामग्री की पहचान कर उसे सुरक्षित ज़ब्त किया गया था.”
सबूतों की बरामदगी में देरी?
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इमेज कैप्शन, सीबीआई इस मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह को गिरफ़्तार कर चुकी है
बीबीसी ने जो दस्तावेज़ देखे हैं उनके मुताबिक़, एम्स भोपाल ने 12-13 मई की दरम्यानी रात 12:05 बजे पुलिस को मौत की सूचना दी थी.
रिकॉर्ड बताते हैं कि पहला ज़ब्ती मेमो 13 मई की सुबह 9:42 बजे तैयार किया गया, जिसमें कथित लिगेचर सामग्री, एक एचपी लैपटॉप और एक आईफ़ोन को ज़ब्त किया जाना दर्ज है.
उसी दिन दोपहर 3:30 बजे एक अन्य मोबाइल फ़ोन ज़ब्त किया गया. इसके बाद मेडिकल दस्तावेज़ों को क़ब्ज़े में लिया गया और शाम 6:40 बजे घर में लगे सीसीटीवी सिस्टम से जुड़ा डीवीआर ज़ब्त किया गया.
बीबीसी ने इससे जुड़े रिकॉर्ड देखे हैं. इसके मुताबिक़ सीसीटीवी फ़ुटेज में दिखाई दिया कि त्विषा ने जो हेडफ़ोन पहन रखा था वो 23 मई को बरामद किया गया. यानी मौत के लगभग दस दिन बाद.
हालांकि भोपाल पुलिस का कहना है कि हेडफ़ोन की बरामदगी में हुई देरी से मामले पर कोई असर नहीं पड़ता.
केस डायरी के दस्तावेज़ों तक पहुंच का आरोप
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इमेज कैप्शन, त्विषा के माता-पिता बचाव पक्ष पर कई गंभीर आरोप लगा चुके हैं
त्विषा के परिवार की ओर से एक और सवाल उठाया गया है.
अधिवक्ता अंकुर पांडे का कहना है कि लिगेचर सामग्री से संबंधित ज़ब्ती दस्तावेज़ केस डायरी का हिस्सा था.
उनके मुताबिक़ उस समय गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह अभियुक्त नहीं थे, इसलिए क़ानूनी रूप से उन्हें उस दस्तावेज़ तक पहुंच का अधिकार नहीं होना चाहिए था.
अंकुर पांडे का कहना है, “जब गिरिबाला सिंह ने अग्रिम ज़मानत याचिका लगाई थी तो इन्हीं सबूतों को जब्त करने से जुड़े उस दस्तावेज़ में लगाए थे. हमारा सवाल यह है कि आख़िर उस वक़्त तक गिरिबाला सिंह को अभियुक्त नहीं बनाया गया था बावजूद इसके केस डायरी के दस्तावेज़ उन तक कैसे पहुंचे?”.
इस पूरे मामले पर अब तक सीबीआई की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
परिवार के वकील का यह भी दावा है कि 13 मई को तैयार अन्य तीन ज़ब्ती मेमो में समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह का विवरण दर्ज था, जबकि लिगेचर सामग्री से जुड़े दस्तावेज़ में कथित रूप से अहम ब्योरे गायब थे.
उनका कहना है कि यह शुरुआती जांच की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है.
मेडिकल रिकॉर्ड भी जांच के दायरे में
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इमेज कैप्शन, त्विषा के परिवार का कहना है कि 12 मई की रात मौत से पहले त्विषा लगातार उनके संपर्क में थीं
मामले में सीबीआई अब मेडिकल रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है.
जांच एजेंसी ने मनोचिकित्सक डॉक्टर सत्यकांत त्रिवेदी से पूछताछ की है, जिनका नाम उन दस्तावेज़ों में सामने आया था जिन्हें बचाव पक्ष ने अदालत में पेश किया था.
गिरिबाला सिंह की ओर से अदालत में यह दावा किया गया था कि त्विषा मानसिक तनाव और मनोवैज्ञानिक समस्याओं से जूझ रही थीं और उनका उपचार चल रहा था.
भोपाल में पदस्थ एक पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “सीबीआई की टीम यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उपचार वास्तव में हुआ था या नहीं, अगर हुआ था तो किस प्रकार का था, कितना सीरियस था.”
डॉक्टर सत्यकांत त्रिवेदी ने सीबीआई की ओर से की गई पूछताछ किए जाने की पुष्टि की है.
हालांकि उन्होंने मरीज़ की गोपनीयता का हवाला देते हुए काउंसलिंग से जुड़ी व्यक्तिगत जानकारी साझा करने से इनकार किया है.
क्या कहता है बचाव पक्ष?
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इमेज कैप्शन, त्विषा शर्मा के परिवार के लोगों ने अपनी मांगों को लेकर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाक़ात की थी
गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह ने पहले भी त्विषा के परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों को ख़ारिज किया है.
उनके वकीलों ने सबूतों से छेड़छाड़, जांच को प्रभावित करने और जांच प्रक्रिया में हस्तक्षेप संबंधी आरोपों को स्वीकार नहीं किया है.
बीबीसी ने जो पुलिस रिकॉर्ड, ज़ब्ती मेमो और अदालत में दाख़िल दस्तावेज़ देखे हैं वो शुरुआती जांच की प्रक्रिया की एक विस्तृत टाइमलाइन बताते हैं. इन्हीं दस्तावेज़ों के आधार पर त्विषा के परिवार की ओर से जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं.
परिवार की ओर से उठाए गए सवालों में कथित लिगेचर सामग्री की बरामदगी, उसकी पहचान, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की ज़ब्ती और जांच दस्तावेज़ों तक अभियुक्त गिरिबाला सिंह और त्विषा के पति समर्थ सिंह की पहुंच जैसे मुद्दे शामिल हैं.
त्विषा शर्मा की मृत्यु के मामले ने तब और तूल पकड़ा जब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के निर्देश पर 24 मई को एम्स दिल्ली के डॉक्टरों की टीम ने त्विषा का दूसरा पोस्टमार्टम किया.
इसी दौरान राज्य सरकार की अनुशंसा के बाद मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई.
इस बीच कई दिनों तक पुलिस की पहुंच से बाहर रहने के बाद समर्थ सिंह को 22 मई को जबलपुर से हिरासत में लिया गया, जबकि 27 मई को हाईकोर्ट द्वारा अग्रिम ज़मानत रद्द किए जाने के एक दिन बाद सीबीआई ने गिरिबाला सिंह को गिरफ़्तार कर लिया.
2 जून को सीबीआई की विशेष अदालत ने समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह दोनों को 16 जून तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया.
इसके बाद से सीबीआई घटनास्थल, मेडिकल रिकॉर्ड, डिजिटल सबूतों और शुरुआती पुलिस जांच की प्रक्रिया की पड़ताल कर रही है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.