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दुनिया भर में तेजी से बढ़ रहे हैं खतरनाक उमस भरी गर्मी के दिन, बच्चे और गर्भवती महिलाएं सबसे बड़े जोखिम में

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Jun 25, 2026


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में खतरनाक उमस भरी गर्मी के दिनों की संख्या में काफी वृद्धि हुई है। क्लाइमेट सेंट्रल नामक अमेरिकी एनजीओ द्वारा बुधवार को जारी एक नई वैश्विक अध्ययन रिपोर्ट में यह खुलासा किया गया है।

अध्ययन के अनुसार, वेट-बल्ब तापमान 25°C या उससे अधिक होने वाले दिनों को ‘खतरनाक उमस भरी गर्मी के दिन’ माना जाता है। यह माप तापमान और आर्द्रता को मिलाकर देखता है, जो पसीने के जरिए शरीर के ठंडा होने की क्षमता को दर्शाता है।

अमेरिका स्थित गैर सरकारी संगठन क्लाइमेट सेंट्रल द्वारा बुधवार को जारी किए गए अध्ययन में इस वृद्धि का मुख्य कारण मानव जनित जलवायु संकट को बताया गया है। इसमें कहा गया है कि वैश्विक स्तर पर ऐसे दिनों की संख्या 1970 के दशक में प्रति वर्ष 10 से बढ़कर पिछले दशक (2016-25) में प्रति वर्ष 23 हो गई है।

भारत में स्थिति

1970 के दशक में भारत में औसतन 101 ऐसे दिन प्रति वर्ष थे।

2016-2025 के दौरान यह संख्या बढ़कर 141 दिनों प्रति वर्ष हो गई।

इस अध्ययन में विश्व भर के 254 देशों और क्षेत्रों तथा 961 शहरों को शामिल किया गया और पाया गया कि भारतीय शहरों में खतरनाक उमस भरे गर्मी के दिनों में तीव्र वृद्धि हुई है। दिल्ली में, यह संख्या 1970 के दशक में 96 दिनों से बढ़कर 2016-25 में 135 हो गई।

मुंबई में, यह इसी अवधि में 136 से बढ़कर 206 हो गई, और चेन्नई में 205 से बढ़कर 257 हो गई। सबसे अधिक प्रभावित भारतीय शहर तमिलनाडु का तिरुनेलवेली था, जहां यह संख्या 119 से बढ़कर 273 हो गई।

अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि बुजुर्ग, बच्चे, गर्भवती महिलाएं, पहले से बीमार व्यक्ति और बिना कूलिंग सुविधा वाले लोग सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। उमस के कारण सामान्य लगने वाले दिन भी बेहद खतरनाक हो सकते हैं।

डॉ. लिसा पटेल ने कहा कि 1970 के दशक की तुलना में खतरनाक नम गर्मी दोगुनी से ज्यादा हो गई है। यह स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।

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