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अपने अनुयायियों के बीच बागेश्वर बाबा के नाम से चर्चित हिन्दू धर्मगुरु धीरेंद्र शास्त्री की एक टिप्पणी पर विवाद हो गया है. धीरेंद्र शास्त्री ने यह बयान मध्य प्रदेश के शिवपुरी में एक कार्यक्रम के दौरान भगवान राम और कृष्ण की तुलना करते हुए दिया था.
धीरेंद्र कृष्ण गर्ग (जिन्हें धीरेंद्र शास्त्री के नाम से भी जाना जाता है) ने अपने एक कार्यक्रम में जो कहा, उस पर सोशल मीडिया में काफ़ी बहस हो रही है.
कई लोग उनके बयान की आलोचना कर रहे हैं. अब इस विवाद में कई नेताओं की भी एंट्री हो गई है.
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव, निर्दलीय सांसद पप्पू यादव, शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी और कांग्रेस समेत कई दलों के नेताओं ने उनके इस बयान पर आपत्ति जताई है. उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री के ख़िलाफ़ कार्रवाई की मांग भी की है.
हालांकि विश्व हिन्दू परिषद और एनडीए के घटक दलों के कुछ नेताओं ने शास्त्री का बचाव किया है.
वहीं विवाद बढ़ता देख धीरेंद्र शास्त्री ने भी अपने बयान को लेकर सफ़ाई दी है.
अखिलेश यादव और पप्पू यादव क्या बोले?
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समाजवादी पार्टी के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा, “सनातनी चुप क्यों हैं. एक बाबा अपमानित कर रहे हैं. पहले भगवान कृष्ण को अपमानित किया. अब सुनने में आ रहा है कि प्रभु श्रीराम के पिताजी के बारे में क्या कह रहे हैं. ये आख़िरकार सनातनी लोगों के बुलडोजर कहां चले गए हैं. अगर उनके पास बुलडोजर हैं तो बगल के प्रदेश के मुख्यमंत्री के पास बुलडोजर भिजवा देना चाहिए. आख़िरकार सरकार क्या कर रही है?”
धीरेंद्र शास्त्री के बयान के बाद रायबरेली में वकीलों ने ज़िलाधिकारी के दफ़्तर के सामने नारेबाज़ी भी की.
वकीलों का कहना है, “इस बयान को हम लोग नहीं सहने वाले हैं. ये बीजेपी के एजेंट बनकर काम कर रहे हैं. हमारी मांग है कि ज़िलाधिकारी इन पर एफ़आईआर करें और इनके ख़िलाफ़ कठोर कार्रवाई की जाए.”
वहीं, बिहार के पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव धीरेंद्र शास्त्री के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर दिल्ली में संसद मार्ग पुलिस स्टेशन पहुंचे.
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पप्पू यादव ने कहा, “उनका (धीरेंद्र शास्त्री) आचरण शुरू से ही संदिग्ध रहा है. संदिग्ध आचरण वाले लोगों को आरएसएस और बीजेपी वालों ने हमेशा बढ़ावा दिया है. मैंने पहले भी कहा है कि बाबाओं को कथा कहने का जो अधिकार दिया जाता है, उसके लिए एक सख़्त क़ानून हो. धर्म पर बोलने के लिए मॉडल कोड ऑफ़ कंडक्ट होना चाहिए, जो क़ानून के तहत हो.”
पप्पू यादव ने आरोप लगाया, “पहले ये धर्म को बांटते रहते थे. अब धर्म में भी अलग धर्म बनाने की कोशिश हो रही है. इन्हें नेताओं और एक पार्टी ने प्रायोजित किया है. इन्होंने 29 अक्तूबर को प्रवचन दिया था और सोमवार को तीन मिनट का वीडियो ख़ुद शेयर भी किया.”
धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) की पूर्व राज्यसभा सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने एक्स पर लिखा, “यह कैसे सही हो सकता है? अब यह धर्मशास्त्री भगवान राम और भगवान कृष्ण के बीच तुलना कर रहे हैं? जिस पार्टी ने उन्हें बढ़ावा दिया है, उसकी ओर से चुप्पी क्यों है?”
धीरेंद्र शास्त्री की सफ़ाई
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हालांकि अपने बयान पर बढ़ने विवाद के बीच धीरेंद्र शास्त्री ने सफाई दी है.
धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “मैंने भाव में बहकर श्री ठाकुर जी (कृष्ण) को उलाहना दिया था, इस पर बहुत लोगों ने अर्थ का अनर्थ निकाला. हम भगवान राम और भगवान कृष्ण में उलाहना देकर भेद नहीं करना चाहते थे. मैं ख़ुद कृष्ण का भक्त हूं. किसी को कोई ठेस पहुंचा तो हम क्षमाप्रार्थी हैं. हमने भगवान को बांटने की कोशिश नहीं की.
अखिलेश यादव के धीरेंद्र शास्त्री पर दिए बयान के जवाब में उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओपी राजभर ने कहा, “उनको (अखिलेश को) कृष्ण से क्या मतलब है. उनको मथुरा जाना चाहिए कृष्ण भगवान के दर्शन करने, वे जा ही नहीं रहे हैं. केवल ट्विटर और प्रेस कॉन्फ़्रेंस में बोलते हैं.”
धीरेंद्र शास्त्री के विवादित बयान और अखिलेश यादव की ओर से उनकी आलोचना के बाद विश्व हिन्दू परिषद के प्रवक्ता श्रीराज नायर ने प्रतिक्रिया दी है.
उन्होंने कहा, “विश्व हिन्दू परिषद का स्पष्ट मानना है कि हर हिन्दू ‘हिन्दू’ है. चाहे वह किसी भी मत, पंथ, संप्रदाय, पूजा-पद्धति या किसी भी भौगोलिक क्षेत्र में रहने वाला व्यक्ति हो. अखिलेश यादव चुनावी हिन्दू हैं. वे केवल चुनाव के वक़्त हिन्दू का राग अलापते हैं.”
पहले भी रहे हैं विवादों में
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सितंबर महीने में भी बागेश्वर बाबा के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज करने की मांग को लेकर कोलकाता के भवानीपुर पुलिस थाने में शिकायत दी गई थी.
दक्षिण कोलकाता ज़िला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप प्रसाद ने अपनी शिकायत में कहा था, “उन्होंने (धीरेंद्र शास्त्री) दुर्गा पूजा के दौरान मांस खाने के लिए बंगालियों को ‘पाखंडी’ कहा है. हम बागेश्वर बाबा के बिना जानकारी वाले बयान की निंदा करते हैं और उन्हें पश्चिम बंगाल के लोगों से माफ़ी मांगनी चाहिए.”
उस वक़्त धीरेंद्र शास्त्री ने हावड़ा ज़िले के लिलुआ में दुर्गा पूजा के दौरान हिंदुओं से शाकाहारी भोजन करने की अपील की थी.
विपक्षी पार्टियों ने आरोप लगाया था कि प्रदेश की बीजेपी सरकार बंगाल की संस्कृति का अपमान कर रही है.
विवाद के बाद पश्चिम बंगाल बीजेपी की स्टेट यूनिट के अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य ने धीरेंद्र शास्त्री का नाम लिए बिना उनकी उस अपील को ख़ारिज कर दिया था.
धीरेंद्र शास्त्री मध्य प्रदेश के छतरपुर ज़िले के गढ़ा गांव में स्थित बागेश्वर धाम के पुजारी हैं. साल 2022 में नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान अंधविश्वास फैलाने के आरोपों के बाद पहली बार उनका नाम सुर्ख़ियों में आया था.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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