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ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन यानी आइसा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को शनिवार सुबह हिरासत से रिहा कर दिया गया.
नेहा बोरा को शुक्रवार शाम में दिल्ली पुलिस ने लहरा दो तिरंगा मार्च के दौरान हिरासत में ले लिया था.
हिरासत से बाहर आने की जानकारी नेहा ने अपने एक्स हैंडल से भी दी है.
नेहा ने लिखा है, ”मुझे रिहा कर दिया गया है. मैं चाहती हूं कि अभिजीत दीपके को रिहा किया जाए. साथ ही दिल्ली पुलिस हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा करे. लोकतंत्र और संविधान के लिए लड़ने को अपराध नहीं बनाया जा सकता!”
इससे पहले देर रात तक उनके समर्थक दिल्ली पुलिस से पूछते रहे कि नेहा कहाँ हैं.
आधी रात बाद पता चला कि नेहा आरके पुरम पुलिस स्टेशन में हैं. नेहा के एक्स हैंडल से बताया गया है कि उन्हें आरके पुरम पुलिस स्टेशन में पाँच घंटे तक रखा गया.
हिरासत से बाहर आने का वीडियो नेहा समाचार एजेंसी एनएआई ने एक्स पर पोस्ट किया है.
इस वीडियो में दिख रहा कि उनके साथ चार-पाँच लोग हैं. शुरू में नेहा से कुछ प्रतिक्रिया देने के लिए कहा गया तो उन्होंने कहा- क्या बोलूँ यार? इतना कहकर आगे बढ़ गईं.
आइसा कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन का स्टूडेंट विंग है. सीपीआईएम(एल) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने नेहा की रिहाई पर प्रतिक्रिया देते हुए एक्स पर लिखा है, ”नेहा फिर से आज़ाद हैं! घंटों तक अवैध रूप से अगवा कर हिरासत में रखने के बाद दिल्ली पुलिस को नेहा को फिर से रिहा करना पड़ा. यह हमारी क़ानूनी टीम की लगातार कोशिशों, सभी साथियों की सतर्कता, जागरूक नागरिक समाज और सक्रिय विपक्ष के प्रयासों की बदौलत संभव हुआ.”
”पुलिस की ऐसी ग़ैर-ज़िम्मेदाराना, अराजक, प्रतिशोधपूर्ण और क्रूर हरकतें लोगों के प्रतिरोध को कमज़ोर करने के बजाय और मज़बूत, एकजुट और दृढ़ बनाएंगी.”

नेहा बोरा और सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके को 16 अक्टूबर की शाम हिरासत में लिया गया था.
हिरासत से बाहर आने से पहले नेहा के वकील सुपंत सिन्हा ने कहा था, ”आरके पुरम पुलिस स्टेशन में नेहा को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है. वकील से बातचीत करने की भी अनुमति नहीं दी जा रही है.”
कॉकरोच जनता पार्टी की लीगल हेड रत्ना सिंह ने एक्स पर लिखा है कि अभिजीत दीपके को अरेस्ट कर लिया गया है और उन्हें एसईएम कोर्ट में पेश किया जाएगा.
रत्ना सिंह का कहना है कि अभिजीत को कहाँ रखा गया, इसकी जानकारी उन्हें अब भी नहीं है और वकीलों को भी नहीं मिलने दिया जा रहा है.
इससे पहले रत्ना सिंह ने एक्स पर लिखा था, ”आप घटनाक्रम को समझिए. दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया. सभी पर नज़र रखी गई. हिरासत में रखा और फिर न्यायिक हिरासत में भिजवा दिया. दिल्ली पुलिस को अभिजीत और नेहा, दोनों की मौजूदा लोकेशन की जानकारी तुरंत सार्वजनिक करनी चाहिए.
किसी को भी घंटों तक हिरासत में नहीं रखा जाना चाहिए, बिना उसके परिवार, वकीलों या संबंधित लोगों को उसकी लोकेशन और क़ानूनी स्थिति की जानकारी दिए. नेहा और अभिजीत कहां हैं? दिल्ली पुलिस को इसका जवाब देना होगा.”
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हिरासत से बाहर आने पर नेहा ने क्या कहा?
नेहा ने हिरासत से बाहर आने के बाद कहा, “क़ानून-व्यवस्था की हर तरह से धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. आम नागरिकों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है, जैसे वे कोई खूंखार अपराधी हों. इस देश में लंबे समय से ऐसा होता आया है.”
नेहा ने कहा, ”मौजूदा आंदोलन ने साफ़ तौर पर उजागर कर दिया है कि लोगों को कैसे हिरासत में लिया जा रहा है. चाहे दिन हो या शाम, लोगों को हिरासत में लेकर पूरी रात थाने में रखा जाता है और फिर अगली सुबह या शाम को रिहा किया जाता है. आख़िर किस अधिकार के तहत ऐसा किया जा रहा है? किस क़ानून या आदेश के तहत हिरासत में लिए गए लोगों को पूरी रात थाने में रखा जा सकता है?”
”क़ानूनी तौर पर सूर्यास्त के बाद, ख़ासकर महिलाओं, को रिहा कर दिया जाना चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है. इसके अलावा, अब अराजकता और अव्यवस्था का एक नया नैरेटिव गढ़ा जा रहा है. कैसी अराजकता और कैसी अव्यवस्था? वह जो आपने सेंट्रल दिल्ली में फैलाई है? दिल्ली के लोग राहत की सांस तक नहीं ले पा रहे हैं. वे काम पर जाने के लिए जिस भी रास्ते से निकलते हैं, उसे बंद पाते हैं.”
”आप पूरे देश में अराजकता और अव्यवस्था फैला रहे हैं. कृपया भारत के लोगों को बख्श दीजिए. ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग चलाइए और एसआईआर की प्रक्रिया रोकिए, ताकि इस देश के आम नागरिक राहत की सांस ले सकें, सुकून महसूस कर सकें और उनके मतदान के अधिकार सुरक्षित रह सकें.”
उन्होंने कहा, “पुलिस ने मुझसे मेरा नाम, पता और दूसरी जानकारियां मांगीं. लंबे समय तक उन्होंने मुझे बोलने या किसी क़ानूनी सलाहकार (वकील) से सलाह लेने तक नहीं दिया. हमारे वकील मुझ तक पहुंचने की कोशिश में 5-6 घंटे तक लगे रहे. जब हम किसी तरह उन्हें फोन कर पाए, उसके बाद ही उन्हें मुझसे मिलने की अनुमति दी गई. ये लोग लंबे समय से इसी तरह की हरकतें करते आ रहे हैं.”

नेहा ने कहा, ”आप पूरे देश में अराजकता और अव्यवस्था फैला रहे हैं. कृपया भारत के लोगों को बख्श दीजिए. ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग चलाइए और एसआईआर की प्रक्रिया रोकिए, ताकि इस देश के आम नागरिक राहत की सांस ले सकें, सुकून महसूस कर सकें और उनके मतदान के अधिकार सुरक्षित रह सकें.”
उन्होंने कहा, “पुलिस ने मुझसे मेरा नाम, पता और दूसरी जानकारियां मांगीं. लंबे समय तक उन्होंने मुझे बोलने या किसी क़ानूनी सलाहकार (वकील) से सलाह लेने तक नहीं दिया. हमारे वकील मुझ तक पहुंचने की कोशिश में 5-6 घंटे तक लगे रहे. जब हम किसी तरह उन्हें फोन कर पाए, उसके बाद ही उन्हें मुझसे मिलने की अनुमति दी गई. ये लोग लंबे समय से इसी तरह की हरकतें करते आ रहे हैं.”
अभिजीत दीपके को मिला था नोटिस
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हिरासत में लिए जाने से पहले दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के संस्थापक को एक नोटिस दिया था और उनसे रैली में शामिल नहीं होने के लिए कहा था.
नोटिस में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत लागू निषेधाज्ञा का हवाला दिया गया था.
अभिजीत दीपके शनिवार शाम ‘लहारा दो तिरंगा मार्च’ स्थल के लिए निकले थे, लेकिन कुछ ही देर बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया.
इस दौरान अभिजीत पुलिस से पूछते दिखे कि उन्होंने किस क़ानून का उल्लंघन किया है.
उन्होंने कहा, “मैंने अभी किस क़ानून का उल्लंघन किया है? मैं अकेला हूँ.”
विपक्ष के नेताओं ने पूछा नेहा कहाँ हैं?
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पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल, तमिलनाडु के पूर्व सीएम एमके स्टालिन और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव समेत विपक्ष के कई नेताओं ने पूछा कि दिल्ली पुलिस ये बताए कि दीपके और बोरा को कहाँ रखा गया है.
हालांकि दिल्ली पुलिस ने इन सवालों का जवाब अब तक नहीं दिया है.
विपक्ष के कुछ नेताओं ने इसे अघोषित इमरजेंसी क़रार दिया.
अखिलेश यादव ने एक्स पर लिखा, ”नेहा बोरा कहाँ हैं? इसकी कहीं कोई ख़बर नहीं है. एक लड़की को रात में डिटेन करके कहाँ ले जाया गया है, पुलिस इसकी जानकारी दे. राष्ट्रीय महिला आयोग तत्काल इस अति संवेदनशील प्रकरण का संज्ञान ले. नेहा बोरा को तुरंत रिहा किया जाए!”
ममता बनर्जी ने एक्स पर लिखा था, “राष्ट्रीय झंडा थामने के लिए अभिजीत दीपके को हिरासत में लिया गया है. ज़रा इस बात पर गौर कीजिए. आज़ाद भारत में हमारे युवाओं को शांतिपूर्ण ढंग से अपने लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने के लिए हिरासत में लिया जा रहा है.”
उन्होंने कहा था, ” ये अघोषित आपातकाल है. असहमति से डरने वाली सरकार अब एक पूरी पीढ़ी को चुप कराने के लिए डराने-धमकाने की कोशिश कर रही है. यह एक फासीवादी शासन का आचरण है. ये सरकार ऐसी आवाज़ को बर्दाश्त नहीं कर पा रही है, जिसे वो नियंत्रित नहीं कर सकती.”
अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर कहा, “यह खुली तानाशाही के अलावा कुछ नहीं है. क्या तिरंगा फहराना अपराध है? अभिजीत की गिरफ़्तारी दिखाती है कि मोदी जी उनसे कितना डरते हैं.”
उन्होंने एक्स पर लिखा, “उनके ठिकाने की जानकारी दिए बिना उन्हें हिरासत में रखना खुले तौर पर ग़ैर-क़ानूनी और बेहद अमानवीय है. केंद्र सरकार को उन्हें तुरंत रिहा करना चाहिए और शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को दबाना बंद करना चाहिए. आंदोलन को कुचलने की हर कोशिश उसे और मज़बूत ही करेगी.”
जेएनयूएसयू की पूर्व अध्यक्ष आइशी घोष ने कहा, “पहले हम पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन गए थे और अब मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन आए हैं. हमें सिर्फ़ गुमशुदगी की शिकायत दर्ज करानी थी क्योंकि हमें अभी पता चला कि नेहा आरके पुरम में हैं और हमारा एक प्रतिनिधिमंडल वहां भी गया है.”
उन्होंने कहा, ” हम अभी तक अभिजीत का ठिकाना नहीं ढूंढ पा रहे; जहाँ भी जाते हैं, वे किसी और पुलिस स्टेशन का नाम बता देते हैं. यह बहुत ग़लत है. और एक बात, आप लड़कियों को हिरासत में ले रहे हैं. सात बजे के बाद उन्हें हिरासत में लेकर रखना ग़ैर-क़ानूनी है.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.
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