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पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट में नाम वापस जुड़वाने के लिए कैसे काम कर रहे हैं ट्राइब्यूनल ?

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Sep 30, 2026


वोटर लिस्ट में नाम वापस जोड़ने की अर्ज़ी मंज़ूर होने तक ‘डिलीटेड वोटरों’ की अनिश्चितता दूर नहीं हो रही है. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

इमेज कैप्शन, वोटर लिस्ट में नाम वापस जोड़ने की अर्ज़ी मंज़ूर होने तक ‘डिलीटेड वोटरों’ की अनिश्चितता दूर नहीं हो रही है (प्रतीकात्मक तस्वीर)

मुर्शिदाबाद के मोहम्मद मोसलेउद्दीन सुभानी के परिवार में छह भाई-बहन हैं. पश्चिम बंगाल में हाल में हुए विधानसभा चुनाव में उनमें से कोई भी वोट नहीं डाल पाया.

इसकी वजह ये थी कि वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान चुनाव आयोग ने एक ही पिता के छह बच्चे होने को ‘तार्किक विसंगति’ के रूप में चिह्नित किया था. इसके बाद सभी छह भाई-बहनों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए.

सुभानी कहते हैं, “जब हमारी सुनवाई हुई थी, तब हमने सभी ज़रूरी दस्तावेज़ दिखाए थे. इसके बावजूद हम सभी के नाम हटा दिए गए. एक वयस्क भारतीय नागरिक होने के बावजूद मैं पहली बार वोट नहीं दे पाया.”

सुभानी की तरह क़रीब 27 लाख लोगों को न्यायिक प्रक्रिया के तहत वोट देने के लिए अयोग्य माना गया था. चुनाव से ठीक पहले उनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए.

पश्चिम बंगाल में जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं वो वापस उन्हें लिस्ट में जोड़ने की मांग कर रहे हैं (फ़ाइल फ़ोटो)

इमेज कैप्शन, पश्चिम बंगाल में जिनके नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं वो वापस उन्हें लिस्ट में जोड़ने की मांग कर रहे हैं (फ़ाइल फ़ोटो)

अब वोट देने का अधिकार वापस पाने के लिए इनमें से कई लोगों को ट्राइब्यूनल के फ़ैसले का इंतज़ार करना पड़ रहा है.

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