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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजे ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लिए बड़ा झटका हैं. जो पार्टी पिछले चुनावों में 215 सीटों पर जीतकर आई थी, वह इस बार सौ सीटें भी नहीं जीत पाई है.
इससे भी बड़ी बात यह है कि राज्य में उस पार्टी यानी बीजेपी को जीत मिली है, जिसका ममता बनर्जी और उनकी पार्टी मुखर विरोध करती रही है.
ममता बनर्जी केंद्र में सत्ता पर काबिज़ बीजेपी के विरोधियों के बीच इतना बड़ा चेहरा थीं कि उनके समर्थन में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव भी खड़े दिखे और बिहार में आरजेडी के नेता तेजस्वी यादव भी.
लेकिन कई विपक्षी नेताओं के समर्थन के बाद भी ममता बनर्जी अपनी सत्ता बचाने में नाकाम रही हैं. यह न केवल एक अहम विपक्षी पार्टी के लिए झटका है, बल्कि इसका असर केंद्र के स्तर पर विपक्षी दलों के प्रभाव पर भी पड़ सकता है.
साल 2024 के लोकसभा चुनावों में केंद्र की मोदी सरकार और बीजेपी के ख़िलाफ़ बने ‘इंडिया ब्लॉक’ के बड़े चेहरे के तौर पर भी ममता बनर्जी को देखा जा रहा था, उन्होंने ही लालू प्रसाद यादव और उस समय विपक्षी गुट में रहे नीतीश कुमार को विपक्षी गठबंधन की पहली बैठक पटना में करने की सलाह दी थी.