इंद्रजीत सिंह, कोलकाता । बंगाल विधानसभा चुनाव के रुझानों में भाजपा की प्रचंड जीत के संकेत मिलते ही राज्य प्रशासनिक तंत्र अचानक सतर्क मोड में आ गया है। राज्य सचिवालय ‘नवान्न’ सहित कई प्रमुख सरकारी दफ्तरों को सुरक्षा के लिहाज से छावनी में तब्दील कर दिया गया है।
केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है और हर गतिविधि पर बारीकी से नजर रखी जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, नवान्न के भीतर और बाहर सुरक्षा का घेरा कई स्तरों में मजबूत किया गया है। केंद्रीय बलों के जवान न केवल प्रवेश और निकास बिंदुओं पर तैनात हैं, बल्कि अंदर आने-जाने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों की गतिविधियों पर भी कड़ी निगरानी रख रहे हैं। खास तौर पर इस बात पर ध्यान दिया जा रहा है कि कोई भी व्यक्ति किसी फाइल या महत्वपूर्ण दस्तावेज के साथ बाहर तो नहीं जा रहा।
प्रशासनिक हलकों में इस अचानक बढ़ी सख्ती को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हैं। माना जा रहा है कि चुनाव परिणामों से पहले संवेदनशील दस्तावेजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। अधिकारियों को भी मौखिक रूप से सतर्क रहने और किसी भी असामान्य गतिविधि की तुरंत सूचना देने के निर्देश दिए गए हैं।
नवान्न के अलावा राज्य के अन्य महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कई जगहों पर अतिरिक्त सीसीटीवी निगरानी शुरू की गई है और रिकार्ड रूम, डेटा सेंटर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में प्रवेश को सीमित कर दिया गया है। कर्मचारियों के बैग की जांच की जा रही है और पहचान पत्र के बिना किसी को अंदर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव परिणामों के पहले इस तरह की सख्ती असामान्य नहीं है, लेकिन इस बार रुझानों की तीव्रता और संभावित सत्ता परिवर्तन की आशंका ने प्रशासन को और ज्यादा चौकन्ना कर दिया है। खासकर उन विभागों में जहां नीतिगत फैसलों, वित्तीय लेन-देन या महत्वपूर्ण परियोजनाओं से जुड़े दस्तावेज मौजूद हैं, वहां विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
हालांकि, राज्य सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर इस सख्ती पर कोई विस्तृत बयान सामने नहीं आया है। लेकिन प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि यह एक एहतियाती कदम है, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता या दस्तावेजों के दुरुपयोग की संभावना को रोका जा सके।