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पीएचपी की ख़ामी से दुनियाभर में साइबर अलर्ट, भारतीय यूज़र्स के लिए कितना बड़ा ख़तरा?

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Oct 22, 2026


नियॉन रोशनी में लैपटॉप पर कीबोर्ड पर हाथों से टाइप करते हुए दिखाती एक स्टॉक तस्वीर.

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एक दशक से भी ज़्यादा समय तक इंटरनेट के बड़े हिस्से को चलाने वाली तकनीक में मौजूद गंभीर ख़ामियां पकड़ में नहीं आ सकी थीं.

इन ख़ामियों का पता लगाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद ली गई और इसके बाद दुनियाभर में साइबर सुरक्षा को लेकर अलर्ट जारी हो गया.

बीबीसी संवाददाता ओसमंड चिया के मुताबिक ये ख़ामियां पीएचपी नाम की एक प्रोग्रामिंग लैंग्वेज में हैं, जिसका इस्तेमाल 2000 के दशक से दुनियाभर में वेबसाइट बनाने के लिए किया जाता रहा है. भारत में भी बड़ी संख्या में वेबसाइट और ऑनलाइन सेवाएं इस तकनीक पर निर्भर हैं, इसलिए इसका असर भारतीय यूज़र्स और संस्थानों तक भी पहुंच सकता है.

बुधवार को इन ख़ामियों का पता चलने के बाद दुनियाभर की सरकारें और साइबर सुरक्षा एजेंसियां इसके असर को रोकने की कोशिश में जुट गई हैं. उन्होंने वेबसाइट चलाने वालों से नया इमरजेंसी सुरक्षा अपडेट इंस्टॉल करने या ज़रूरत पड़ने पर अपने प्लेटफ़ॉर्म को ऑफ़लाइन करने की सलाह दी है.

साइबर सुरक्षा कंपनी विज़ उन कंपनियों में शामिल है, जिनके शोधकर्ताओं ने इन ख़ामियों का पता लगाया. कंपनी ने इन्हें एआई की मदद से अब तक सामने आई “सबसे गंभीर” ख़ामियां बताया है.

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